‘द लीडर्स’ चैनल पर सपा सांसद ने उठाए पुराने मामले और निषाद समाज के हितों से जुड़े मुद्दे, निषाद पार्टी की राजनीति पर भी की टिप्पणी
संतकबीरनगर। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले निषाद समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और नेतृत्व को लेकर बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है। समाजवादी पार्टी के सांसद पप्पू निषाद ने निजी चैनल ‘द लीडर्स’ पर बातचीत के दौरान कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद की राजनीति, कसरवल कांड और उनके परिवार की राजनीतिक भूमिका पर सवाल उठाए। उनके बयान ने प्रदेश की सियासत में निषाद समाज के समर्थन को लेकर जारी प्रतिस्पर्धा को फिर चर्चा में ला दिया है।
पप्पू निषाद ने सात जून 2015 को गोरखपुर के कसरवल में हुए रेलवे ट्रैक आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि इस घटना में जान गंवाने वाले अखिलेश निषाद और जेल जाने वाले आंदोलनकारियों के संघर्ष को याद रखा जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि संबंधित न्यायिक कार्यवाही के दौरान डॉ. संजय निषाद ने घटना से अपना संबंध न होने और इलाज के लिए लखनऊ जाने की बात कही थी।
सपा सांसद ने निषाद पार्टी के नेतृत्व पर परिवार के सदस्यों को राजनीतिक अवसर देने और समाज के बुनियादी मुद्दों पर अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाने के आरोप भी लगाए। उन्होंने टिकट वितरण में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए इन आरोपों पर स्पष्टीकरण की जरूरत जताई।
पप्पू निषाद ने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के नेतृत्व को निषाद समाज के अधिकारों के लिए बेहतर विकल्प बताते हुए आगामी विधानसभा चुनाव में सपा का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने कसरवल मामले से संबंधित न्यायिक आदेश को पढ़ने और उसके तथ्यों को समझने पर भी जोर दिया।
2027 पर नजर: पप्पू निषाद के बयान से स्पष्ट है कि निषाद समाज के राजनीतिक समर्थन को लेकर सपा और निषाद पार्टी के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो सकती है। अब डॉ. संजय निषाद की प्रतिक्रिया और समाज के मतदाताओं का रुख इस राजनीतिक बहस की दिशा तय करने में अहम होगा।