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सत्यमेव टाइम्स में आपका स्वागत है   नाम है संदीप कुमार मीना....... कभी-कभी वर्दी के पीछे छिपा इंसान अपने पद, प्रतिष्ठा और अधिकारों से कहीं बड़ा नजर आता है। कंधों पर चमकते सितारे भले ही जिम्मेदारियों और अधिकारों की पहचान हों, लेकिन जब वही वर्दी किसी दुखी परिवार के आंसू पोंछने और अनाथ होते सपनों को संबल देने के लिए आगे बढ़ती है, तो उसका सम्मान दिल की गहराइयों तक पहुंच जाता है। ऐसे  अफसर जब मानवता के लिए हाथ आगे बढ़ाते हुए किसी का दर्द कम करने का प्रयास करते हैं तब भावनाएं कलम के जरिये समाज के सामने लाना मीडिया का बड़ा जिम्मा बन जाता हैं. मुझे मीडिया क्षेत्र मे कार्य करते हुए लगभग 20 वर्ष हो चुके है, इस 20 साल के पत्रकारिता सफर मे मैंने कई अफसर (IAS-IPS देखे और उनकी कार्य प्रणाली का नजदीकी से अध्ययन किया. सभी अफसर अपनी अपनी शैली के लिए अलग पहचान छोड़ गये लेकिन हम इस बात को और आगे ना बढ़ाते हुए असल मुद्दे पर आते है.... हम अब बात करते हैं उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले के पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना की जिन्होंने अपनी एक संवेदनशील पहल से खाकी का ऐसा मानवीय चेहरा सामने रखा है जिसकी सभी प्रशंसा करते नही थक रहें। 2018 बैच के आईपीएस अधिकारी संदीप कुमार मीना अपराध और अपराधियों के खिलाफ अपने सख्त तेवर के लिए पहचाने जाते हैं। कानून व्यवस्था के मोर्चे पर कठोरता दिखाने वाले इस पुलिस अधिकारी का दिल एक दिवंगत पत्रकार के परिवार की पीड़ा देखकर पसीज उठा। वरिष्ठ पत्रकार शोभित पाण्डेय के असामयिक निधन ने न केवल पत्रकारिता जगत को झकझोर दिया, बल्कि उनके परिवार के सामने भी जीवन की कठिन चुनौतियां खड़ी कर दीं। पिता का साया उठने के बाद बच्चों की पढ़ाई, परवरिश और भविष्य को लेकर परिवार की चिंताएं होना स्वाभाविक हैं। शोभित पाण्डेय पत्रकारिता जगत का एक जाना-पहचाना नाम थे। उन्होंने अपनी लेखनी से जनपद के अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों को आवाज दी। निष्पक्षता, निर्भीकता और कर्मठता उनकी पहचान रही। वह वर्तमान में हिन्दुस्तान समाचार पत्र में क्राइम रिपोर्टर के रूप में कार्यरत थे। इससे पहले अमर उजाला में चीफ ब्यूरो की जिम्मेदारी भी निभा चुके थे। उनके जाने से पत्रकारिता जगत में जो खालीपन पैदा हुआ है, उसकी भरपाई आसान नहीं है। लेकिन इस दुखद घड़ी में पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने केवल औपचारिक शोक संवेदना व्यक्त करने तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने पुलिस परिवार की ओर से दिवंगत पत्रकार के परिजनों को 5 लाख 51 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। इस सहयोग का उद्देश्य बच्चों की शिक्षा-दीक्षा को निर्बाध बनाए रखना और उनके उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में आर्थिक कठिनाइयों को बाधा नहीं बनने देना है। अब जरा उस परिवार की मनःस्थिति को महसूस कीजिए, जहां पिता की यादें तो हैं, लेकिन उनका हाथ थामकर आगे बढ़ने वाला साया अब साथ नहीं है। ऐसे में किसी जिम्मेदार अधिकारी का आगे बढ़कर बच्चों के भविष्य की चिंता करना महज आर्थिक मदद नहीं, बल्कि टूटते हौसलों को संभालने वाला भरोसा है। 5 लाख 51 हजार रुपये की यह राशि उन बच्चों की किताबों, उनकी शिक्षा और उनके सपनों को आगे बढ़ाने में सहायक बनेगी। पुलिस अधीक्षक ने दिवंगत पत्रकार को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा परिजनों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की। वास्तव में, पुलिस की पहचान केवल अपराधियों की गिरफ्तारी और कानून के इकबाल से नहीं होती, बल्कि समाज के कमजोर और दुखी लोगों के साथ खड़े होने से भी बनती है। संदीप कुमार मीना की यह पहल बताती है कि सख्ती और संवेदनशीलता एक ही व्यक्तित्व के दो मजबूत पक्ष हो सकते हैं। अपराधियों के सामने कानून की कठोरता और पीड़ित परिवार के सामने मानवीय करुणा,यही एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी की असली पहचान है। किसी के जाने के बाद उसकी जगह कोई नहीं ले सकता। पिता का साया बच्चों को दोबारा नहीं मिल सकता, लेकिन उनके सपनों को बिखरने से बचाने के लिए बढ़ा एक मददगार हाथ जिंदगी की दिशा जरूर बदल सकता है। संतकबीरनगर में खाकी ने आज यही संदेश दिया है। मेरा सलाम उस वर्दी को, जिसने अपने अधिकारों से नहीं, बल्कि अपने मानवीय व्यवहार से दिल जीत लिया- अजय श्रीवास्तव-CEO-सत्यमेव टाइम्स [caption id="attachment_28282" align="alignnone" width="300"] परिजनों को सांत्वना और सहयोग राशि देते IPS संदीप मीना[/caption] [caption id="attachment_28285" align="alignnone" width="300"] IPS संदीप कुमार मीना(फ़ाइल फोटो)[/caption]

सख्ती के साथ संवेदनशीलता का मिसाल बना UP का यह IPS….

 

नाम है संदीप कुमार मीना…….

कभी-कभी वर्दी के पीछे छिपा इंसान अपने पद, प्रतिष्ठा और अधिकारों से कहीं बड़ा नजर आता है। कंधों पर चमकते सितारे भले ही जिम्मेदारियों और अधिकारों की पहचान हों, लेकिन जब वही वर्दी किसी दुखी परिवार के आंसू पोंछने और अनाथ होते सपनों को संबल देने के लिए आगे बढ़ती है, तो उसका सम्मान दिल की गहराइयों तक पहुंच जाता है। ऐसे  अफसर जब मानवता के लिए हाथ आगे बढ़ाते हुए किसी का दर्द कम करने का प्रयास करते हैं तब भावनाएं कलम के जरिये समाज के सामने लाना मीडिया का बड़ा जिम्मा बन जाता हैं. मुझे मीडिया क्षेत्र मे कार्य करते हुए लगभग 20 वर्ष हो चुके है, इस 20 साल के पत्रकारिता सफर मे मैंने कई अफसर (IAS-IPS देखे और उनकी कार्य प्रणाली का नजदीकी से अध्ययन किया. सभी अफसर अपनी अपनी शैली के लिए अलग पहचान छोड़ गये लेकिन हम इस बात को और आगे ना बढ़ाते हुए असल मुद्दे पर आते है…. हम अब बात करते हैं उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले के पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना की जिन्होंने अपनी एक संवेदनशील पहल से खाकी का ऐसा मानवीय चेहरा सामने रखा है जिसकी सभी प्रशंसा करते नही थक रहें।
2018 बैच के आईपीएस अधिकारी संदीप कुमार मीना अपराध और अपराधियों के खिलाफ अपने सख्त तेवर के लिए पहचाने जाते हैं। कानून व्यवस्था के मोर्चे पर कठोरता दिखाने वाले इस पुलिस अधिकारी का दिल एक दिवंगत पत्रकार के परिवार की पीड़ा देखकर पसीज उठा। वरिष्ठ पत्रकार शोभित पाण्डेय के असामयिक निधन ने न केवल पत्रकारिता जगत को झकझोर दिया, बल्कि उनके परिवार के सामने भी जीवन की कठिन चुनौतियां खड़ी कर दीं। पिता का साया उठने के बाद बच्चों की पढ़ाई, परवरिश और भविष्य को लेकर परिवार की चिंताएं होना स्वाभाविक हैं। शोभित पाण्डेय पत्रकारिता जगत का एक जाना-पहचाना नाम थे। उन्होंने अपनी लेखनी से जनपद के अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों को आवाज दी। निष्पक्षता, निर्भीकता और कर्मठता उनकी पहचान रही। वह वर्तमान में हिन्दुस्तान समाचार पत्र में क्राइम रिपोर्टर के रूप में कार्यरत थे। इससे पहले अमर उजाला में चीफ ब्यूरो की जिम्मेदारी भी निभा चुके थे। उनके जाने से पत्रकारिता जगत में जो खालीपन पैदा हुआ है, उसकी भरपाई आसान नहीं है। लेकिन इस दुखद घड़ी में पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने केवल औपचारिक शोक संवेदना व्यक्त करने तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने पुलिस परिवार की ओर से दिवंगत पत्रकार के परिजनों को 5 लाख 51 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की। इस सहयोग का उद्देश्य बच्चों की शिक्षा-दीक्षा को निर्बाध बनाए रखना और उनके उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में आर्थिक कठिनाइयों को बाधा नहीं बनने देना है।
अब जरा उस परिवार की मनःस्थिति को महसूस कीजिए, जहां पिता की यादें तो हैं, लेकिन उनका हाथ थामकर आगे बढ़ने वाला साया अब साथ नहीं है। ऐसे में किसी जिम्मेदार अधिकारी का आगे बढ़कर बच्चों के भविष्य की चिंता करना महज आर्थिक मदद नहीं, बल्कि टूटते हौसलों को संभालने वाला भरोसा है। 5 लाख 51 हजार रुपये की यह राशि उन बच्चों की किताबों, उनकी शिक्षा और उनके सपनों को आगे बढ़ाने में सहायक बनेगी।
पुलिस अधीक्षक ने दिवंगत पत्रकार को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा परिजनों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की। वास्तव में, पुलिस की पहचान केवल अपराधियों की गिरफ्तारी और कानून के इकबाल से नहीं होती, बल्कि समाज के कमजोर और दुखी लोगों के साथ खड़े होने से भी बनती है। संदीप कुमार मीना की यह पहल बताती है कि सख्ती और संवेदनशीलता एक ही व्यक्तित्व के दो मजबूत पक्ष हो सकते हैं। अपराधियों के सामने कानून की कठोरता और पीड़ित परिवार के सामने मानवीय करुणा,यही एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी की असली पहचान है।
किसी के जाने के बाद उसकी जगह कोई नहीं ले सकता। पिता का साया बच्चों को दोबारा नहीं मिल सकता, लेकिन उनके सपनों को बिखरने से बचाने के लिए बढ़ा एक मददगार हाथ जिंदगी की दिशा जरूर बदल सकता है। संतकबीरनगर में खाकी ने आज यही संदेश दिया है।

मेरा सलाम उस वर्दी को, जिसने अपने अधिकारों से नहीं, बल्कि अपने मानवीय व्यवहार से दिल जीत लिया- अजय श्रीवास्तव-CEO-सत्यमेव टाइम्स

परिजनों को सांत्वना और सहयोग राशि देते IPS संदीप मीना

IPS संदीप कुमार मीना(फ़ाइल फोटो)

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