संतकबीरनगर जिले की सियासत भी मौसम के मिजाज की तरह उस वक्त गर्म हो चली जब कद्दावर सपा नेता पूर्व विधायक दिग्विजय नारायण चतुर्वेदी उर्फ जय चौबे ने समाजवादी पार्टी से खुद को अलग कर लिया। समाजवादी पार्टी से इस्तीफा देने के बाद पूर्व विधायक जय चौबे ने सपा सुप्रीमो के ऊपर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि अखिलेश यादव एक दूषित मानसिकता वाले व्यक्ति है जिनकी पार्टी में सामान्य वर्ग के लिए कोई जगह नहीं है। पूर्व विधायक जय चौबे ने अखिलेश के पीडीए नीति पर तंज कसते हुए कहा कि पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक कोई भी अब अखिलेश के साथ नही चलेगा। आपको बता दें कि पूर्व विधायक जय चौबे समाजवादी पार्टी से लोकसभा सीट के लिए प्रत्याशिता की रेस में सबसे आगे थे लेकिन पार्टी ने ऐन वक्त पर उन्हे टिकट न देकर पूर्व विधायक लक्ष्मीकांत उर्फ पप्पू निषाद को टिकट दे दिया। जिले में समाजवादी विचारधारा को आगे बढ़ाने के साथ विधान सभा चुनाव में पार्टी का मत प्रतिशत बढ़ाने वाले पूर्व विधायक जय चौबे को जब पार्टी ने टिकट नहीं दिया तब उन्होंने पार्टी से बगावत कर ये एलान किया कि एक सप्ताह के अंदर ही वो अपना कोई राजनैतिक फैसला लेंगे। इसके साथ ही साथ पूर्व विधायक जय चौबे ने सपा से घोषित कैंडिडेट लक्ष्मीकांत उर्फ पप्पू निषाद के खिलाफ तंज कसते हुए कहा कि जो व्यक्ति प्रधानी चुनाव नही जीत पाया, जो व्यक्ति नगर निकाय चुनाव में बुरी तरह हारा, ऐसे पप्पू निषाद को टिकट देकर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने जनता की मांग को ठुकराने का काम किया हैं। पूर्व विधायक जय चौबे ने कहा कि मैंने सपा मुखिया अखिलेश यादव से सर्वे कराने के लिए भी अनुरोध करते हुए कहा था कि सर्वे में जिसकी लोकप्रियता और जनाधार दिखे उसे आप टिकट दीजिएगा लेकिन अखिलेश ने मेरी मांग को ठुकरा के एक ऐसे व्यक्ति को टिकट दे दिया जिसका कोई जनाधार ही नही, टिकट पाने वाला व्यक्ति कभी पार्टी हित में काम नही किया, कभी किसी कार्यकर्ता के साथ खड़ा नहीं नजर आया वहीं मै बीजेपी विधायक रहने के दौरान मुस्लिम समाज की महिला को समाजवादी पार्टी से ब्लॉक प्रमुख बनाया, बलराम यादव को समाजवादी पार्टी से जिला पंचायत अध्यक्ष बनाया। 2022 में पार्टी का चुनाव चिन्ह न पाने वाले व्यक्ति जगत जायसवाल को समाजवादी पार्टी से ऐतिहासिक मतो से चुनाव जितवाया। इसके बाद से लगातार पार्टी को जिले में मजबूत करने का काम करता चला आ रहा था, सभी वर्ग के लोगों के साथ अल्पसंख्य वर्ग के हितों की लड़ाई लड़ते चला आ रहा था लेकिन अखिलेश यादव ने जनता की मांग को ठुकरा कर एक ऐसे व्यक्ति को टिकट दे दिया जो कभी पार्टी हित के लिए कार्य नहीं किया।