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सत्यमेव टाइम्स में आपका स्वागत है विशेष आलेख -मोहित मौर्या (राजनैतिक चिंतक) भारत की विकास यात्रा के वास्तविक स्तंभ हमारे गाँव हैं, जहाँ आज भी अधिकांश आबादी निवास करती है और कृषि, पशुपालन व हस्तशिल्प जैसे पारंपरिक व्यवसायों पर निर्भर है। स्वतंत्रता के बाद से ही ग्रामीण विकास और रोज़गार सृजन सरकारों की प्राथमिकता रही है, क्योंकि गाँवों के आर्थिक सशक्तिकरण के बिना समावेशी विकास संभव नहीं। इसी क्रम में मनरेगा जैसी योजनाओं ने करोड़ों परिवारों को आजीविका सुरक्षा देकर पलायन रोकने में अहम भूमिका निभाई। अब विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में बढ़ते भारत के लिए केवल रोज़गार देना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसे उत्पादक, टिकाऊ और विकासोन्मुख बनाना भी आवश्यक है। इसी सोच के साथ लागू VB-G RAM G Act (विकसित भारत गारंटी फॉर रूरल एम्पलॉयमेंट एण्ड लिवलिहुड मिशन एक्ट) महज़ रोज़गार की गारंटी नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर, आधुनिक और सशक्त बनाने का व्यापक विज़न प्रस्तुत करता है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार की चुनौती केवल बेरोज़गारी तक सीमित नहीं है, बल्कि अल्प रोज़गार, प्रच्छन्न बेरोज़गारी, मौसमी काम और कम आय जैसी समस्याएँ भी इससे जुड़ी हैं। खेती पर अत्यधिक निर्भरता के कारण वर्ष के कई महीनों में ग्रामीण परिवार आय के संकट से जूझते हैं। ऐसे में रोज़गार गारंटी योजनाएँ उनके लिए सुरक्षा कवच का कार्य करती हैं। VB-G RAM G Act इसी सुरक्षा कवच को और अधिक सुदृढ़ बनाता है, जिसमें ग्रामीण परिवारों को अधिक रोजगार दिवस, समयबद्ध भुगतान तथा कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष बल दिया गया है। इससे न केवल नियमित आय सुनिश्चित होगी और आर्थिक असुरक्षा कम होगी, बल्कि ग्रामीण गरीबों, भूमिहीन श्रमिकों, महिलाओं तथा वंचित वर्गों के जीवन स्तर में भी सकारात्मक सुधार आएगा। अक्सर रोजगार योजनाओं पर यह आरोप लगाया जाता है कि वे केवल अस्थायी काम उपलब्ध कराती हैं, लेकिन VB-G RAM G Act की विशेषता यह है कि इसमें दीर्घकालिक विकास को प्राथमिकता देने वाले कार्यों पर ज़ोर दिया गया है। जल संरक्षण, तालाबों का निर्माण एवं जीर्णोद्धार, ग्रामीण सड़कों का विकास, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण, भूमि सुधार, जलवायु-अनुकूल कृषि ढाँचे तथा सामुदायिक परिसंपत्तियों के निर्माण जैसे कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी विकास की मजबूत नींव रखते हैं। इनसे रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ-साथ गाँवों की उत्पादक क्षमता भी सुदृढ़ होती है। प्रभावी जल संरक्षण से भूजल स्तर सुधरता है, सिंचाई सुविधाएँ बढ़ती हैं और कृषि उत्पादन में वृद्धि होती है। इसी प्रकार बेहतर सड़क संपर्क किसानों और ग्रामीण उत्पादकों को बाज़ारों तक आसान पहुँच उपलब्ध कराकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देता है। आज ग्रामीण भारत का सबसे बड़ा वर्ग युवा है, जो बेहतर रोजगार की तलाश में शहरों की ओर पलायन करता है। इससे गाँवों की उत्पादक शक्ति कमजोर होती है और शहरों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ता है। VB-G RAM G Act इस चुनौती का समाधान प्रस्तुत करते हुए ग्रामीण युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और विकास के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास करता है। यदि इस योजना को कौशल विकास कार्यक्रमों से प्रभावी ढंग से जोड़ा जाए, तो युवा केवल श्रमिक नहीं बल्कि प्रशिक्षित कार्यबल के रूप में विकसित होंगे। इससे विनिर्माण, कृषि आधारित उद्योगों, ग्रामीण उद्यमिता और स्थानीय रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे। डिजिटल तकनीक, आधुनिक कृषि, जल प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण तथा सामुदायिक विकास से जुड़कर ग्रामीण युवा भविष्य की अर्थव्यवस्था के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकेंगे और उनका पलायन भी कम होगा। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना किसी भी विकास योजना की सफलता संभव नहीं है। पिछले वर्षों में रोजगार गारंटी योजनाओं में महिलाओं की बढ़ती सहभागिता ने उन्हें आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान करने के साथ-साथ परिवार एवं समाज में उनकी निर्णय लेने की क्षमता को भी मजबूत किया है। VB-G RAM G Act महिलाओं को रोजगार के साथ स्वयं सहायता समूहों, सामुदायिक गतिविधियों तथा स्थानीय विकास परियोजनाओं से जुड़ने के नए अवसर प्रदान करता है। महिलाओं की आय बढ़ने से बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवार के जीवन स्तर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस प्रकार यह अधिनियम महिला सशक्तिकरण के माध्यम से ग्रामीण समाज में व्यापक सामाजिक परिवर्तन का आधार बन सकता है। किसी भी सरकारी योजना की सफलता उसकी पारदर्शिता और प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। अतीत में फर्जी लाभार्थियों, भुगतान में देरी तथा कमजोर निगरानी जैसी समस्याओं के कारण अनेक योजनाएँ अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकीं। इसके विपरीत VB-G RAM G Act में डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग किया गया है। बायोमेट्रिक सत्यापन, जियो-टैगिंग, ऑनलाइन मॉनिटरिंग तथा प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) जैसी व्यवस्थाएँ योजना को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाती हैं। इससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगता है तथा लाभ सीधे वास्तविक लाभार्थियों तक पहुँचता है। साथ ही प्रशासन वास्तविक समय में परियोजनाओं की प्रगति की निगरानी कर आवश्यक सुधार भी कर सकता है। वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन वैश्विक चुनौती बन चुका है। अनियमित वर्षा, सूखा, बाढ़ तथा प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण का सबसे अधिक प्रभाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। VB-G RAM G Act में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी गई है। जल संरक्षण, वृक्षारोपण, भूमि सुधार तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण जैसे कार्य रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी सहायक होंगे। यह दृष्टिकोण ग्रामीण विकास को सतत विकास से जोड़ता है और भविष्य में जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "विकसित भारत 2047" के लक्ष्य की सफलता ग्रामीण भारत की आत्मनिर्भरता पर निर्भर करती है और VB-G RAM G Act इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। गाँवों में रोजगार, आधारभूत संरचना का विकास, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाकर यह अधिनियम आत्मनिर्भर गाँवों के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करता है। इससे शहरों की ओर पलायन कम होगा, संतुलित एवं समावेशी विकास को बढ़ावा मिलेगा तथा ग्रामीण समाज आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से अधिक सशक्त बन सकेगा। यद्यपि VB-G RAM G Act एक महत्वाकांक्षी पहल है, किन्तु इसकी सफलता प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। स्थानीय प्रशासन की क्षमता, पंचायतों की सक्रिय भूमिका, समयबद्ध भुगतान, गुणवत्तापूर्ण कार्य तथा सामाजिक सहभागिता इसके प्रमुख आधार हैं। यदि रोजगार योजनाओं को कौशल विकास, स्वरोजगार, ग्रामीण उद्यमिता और कृषि आधारित उद्योगों से जोड़ा जाए तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में स्थायी परिवर्तन संभव होगा। सामाजिक अंकेक्षण, सामुदायिक निगरानी तथा तकनीकी नवाचार इस योजना को और अधिक प्रभावी बना सकते हैं। यह अधिनियम केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजगार, आजीविका, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, डिजिटल पारदर्शिता और आत्मनिर्भरता को एकीकृत करने वाली व्यापक कार्ययोजना है। पारदर्शी और प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से यह करोड़ों ग्रामीण परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है, बेरोजगारी को कम कर सकता है तथा ग्रामीण भारत को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। वास्तव में, VB-G RAM G Act ग्रामीण भारत के लिए एक नए युग की शुरुआत है, जहाँ रोजगार केवल जीविका का साधन नहीं, बल्कि समृद्धि, आत्मनिर्भरता और सतत विकास का मजबूत आधार बनेगा। मोहित मौर्य

ग्रामीण समृद्धि की नई इबारत: आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ता VB-G RAM G Act-:

विशेष आलेख -मोहित मौर्या (राजनैतिक चिंतक)

भारत की विकास यात्रा के वास्तविक स्तंभ हमारे गाँव हैं, जहाँ आज भी अधिकांश आबादी निवास करती है और कृषि, पशुपालन व हस्तशिल्प जैसे पारंपरिक व्यवसायों पर निर्भर है। स्वतंत्रता के बाद से ही ग्रामीण विकास और रोज़गार सृजन सरकारों की प्राथमिकता रही है, क्योंकि गाँवों के आर्थिक सशक्तिकरण के बिना समावेशी विकास संभव नहीं। इसी क्रम में मनरेगा जैसी योजनाओं ने करोड़ों परिवारों को आजीविका सुरक्षा देकर पलायन रोकने में अहम भूमिका निभाई। अब विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में बढ़ते भारत के लिए केवल रोज़गार देना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसे उत्पादक, टिकाऊ और विकासोन्मुख बनाना भी आवश्यक है। इसी सोच के साथ लागू VB-G RAM G Act (विकसित भारत गारंटी फॉर रूरल एम्पलॉयमेंट एण्ड लिवलिहुड मिशन एक्ट) महज़ रोज़गार की गारंटी नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर, आधुनिक और सशक्त बनाने का व्यापक विज़न प्रस्तुत करता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार की चुनौती केवल बेरोज़गारी तक सीमित नहीं है, बल्कि अल्प रोज़गार, प्रच्छन्न बेरोज़गारी, मौसमी काम और कम आय जैसी समस्याएँ भी इससे जुड़ी हैं। खेती पर अत्यधिक निर्भरता के कारण वर्ष के कई महीनों में ग्रामीण परिवार आय के संकट से जूझते हैं। ऐसे में रोज़गार गारंटी योजनाएँ उनके लिए सुरक्षा कवच का कार्य करती हैं। VB-G RAM G Act इसी सुरक्षा कवच को और अधिक सुदृढ़ बनाता है, जिसमें ग्रामीण परिवारों को अधिक रोजगार दिवस, समयबद्ध भुगतान तथा कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष बल दिया गया है। इससे न केवल नियमित आय सुनिश्चित होगी और आर्थिक असुरक्षा कम होगी, बल्कि ग्रामीण गरीबों, भूमिहीन श्रमिकों, महिलाओं तथा वंचित वर्गों के जीवन स्तर में भी सकारात्मक सुधार आएगा।
अक्सर रोजगार योजनाओं पर यह आरोप लगाया जाता है कि वे केवल अस्थायी काम उपलब्ध कराती हैं, लेकिन VB-G RAM G Act की विशेषता यह है कि इसमें दीर्घकालिक विकास को प्राथमिकता देने वाले कार्यों पर ज़ोर दिया गया है। जल संरक्षण, तालाबों का निर्माण एवं जीर्णोद्धार, ग्रामीण सड़कों का विकास, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण, भूमि सुधार, जलवायु-अनुकूल कृषि ढाँचे तथा सामुदायिक परिसंपत्तियों के निर्माण जैसे कार्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी विकास की मजबूत नींव रखते हैं। इनसे रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ-साथ गाँवों की उत्पादक क्षमता भी सुदृढ़ होती है। प्रभावी जल संरक्षण से भूजल स्तर सुधरता है, सिंचाई सुविधाएँ बढ़ती हैं और कृषि उत्पादन में वृद्धि होती है। इसी प्रकार बेहतर सड़क संपर्क किसानों और ग्रामीण उत्पादकों को बाज़ारों तक आसान पहुँच उपलब्ध कराकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देता है।
आज ग्रामीण भारत का सबसे बड़ा वर्ग युवा है, जो बेहतर रोजगार की तलाश में शहरों की ओर पलायन करता है। इससे गाँवों की उत्पादक शक्ति कमजोर होती है और शहरों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ता है। VB-G RAM G Act इस चुनौती का समाधान प्रस्तुत करते हुए ग्रामीण युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और विकास के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास करता है। यदि इस योजना को कौशल विकास कार्यक्रमों से प्रभावी ढंग से जोड़ा जाए, तो युवा केवल श्रमिक नहीं बल्कि प्रशिक्षित कार्यबल के रूप में विकसित होंगे। इससे विनिर्माण, कृषि आधारित उद्योगों, ग्रामीण उद्यमिता और स्थानीय रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे। डिजिटल तकनीक, आधुनिक कृषि, जल प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण तथा सामुदायिक विकास से जुड़कर ग्रामीण युवा भविष्य की अर्थव्यवस्था के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकेंगे और उनका पलायन भी कम होगा।
महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना किसी भी विकास योजना की सफलता संभव नहीं है। पिछले वर्षों में रोजगार गारंटी योजनाओं में महिलाओं की बढ़ती सहभागिता ने उन्हें आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान करने के साथ-साथ परिवार एवं समाज में उनकी निर्णय लेने की क्षमता को भी मजबूत किया है। VB-G RAM G Act महिलाओं को रोजगार के साथ स्वयं सहायता समूहों, सामुदायिक गतिविधियों तथा स्थानीय विकास परियोजनाओं से जुड़ने के नए अवसर प्रदान करता है। महिलाओं की आय बढ़ने से बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवार के जीवन स्तर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस प्रकार यह अधिनियम महिला सशक्तिकरण के माध्यम से ग्रामीण समाज में व्यापक सामाजिक परिवर्तन का आधार बन सकता है।
किसी भी सरकारी योजना की सफलता उसकी पारदर्शिता और प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। अतीत में फर्जी लाभार्थियों, भुगतान में देरी तथा कमजोर निगरानी जैसी समस्याओं के कारण अनेक योजनाएँ अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकीं। इसके विपरीत VB-G RAM G Act में डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग किया गया है। बायोमेट्रिक सत्यापन, जियो-टैगिंग, ऑनलाइन मॉनिटरिंग तथा प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) जैसी व्यवस्थाएँ योजना को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाती हैं। इससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगता है तथा लाभ सीधे वास्तविक लाभार्थियों तक पहुँचता है। साथ ही प्रशासन वास्तविक समय में परियोजनाओं की प्रगति की निगरानी कर आवश्यक सुधार भी कर सकता है।
वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन वैश्विक चुनौती बन चुका है। अनियमित वर्षा, सूखा, बाढ़ तथा प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण का सबसे अधिक प्रभाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। VB-G RAM G Act में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी गई है। जल संरक्षण, वृक्षारोपण, भूमि सुधार तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण जैसे कार्य रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी सहायक होंगे। यह दृष्टिकोण ग्रामीण विकास को सतत विकास से जोड़ता है और भविष्य में जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की सफलता ग्रामीण भारत की आत्मनिर्भरता पर निर्भर करती है और VB-G RAM G Act इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। गाँवों में रोजगार, आधारभूत संरचना का विकास, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाकर यह अधिनियम आत्मनिर्भर गाँवों के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करता है। इससे शहरों की ओर पलायन कम होगा, संतुलित एवं समावेशी विकास को बढ़ावा मिलेगा तथा ग्रामीण समाज आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से अधिक सशक्त बन सकेगा।
यद्यपि VB-G RAM G Act एक महत्वाकांक्षी पहल है, किन्तु इसकी सफलता प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। स्थानीय प्रशासन की क्षमता, पंचायतों की सक्रिय भूमिका, समयबद्ध भुगतान, गुणवत्तापूर्ण कार्य तथा सामाजिक सहभागिता इसके प्रमुख आधार हैं। यदि रोजगार योजनाओं को कौशल विकास, स्वरोजगार, ग्रामीण उद्यमिता और कृषि आधारित उद्योगों से जोड़ा जाए तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में स्थायी परिवर्तन संभव होगा। सामाजिक अंकेक्षण, सामुदायिक निगरानी तथा तकनीकी नवाचार इस योजना को और अधिक प्रभावी बना सकते हैं। यह अधिनियम केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजगार, आजीविका, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, डिजिटल पारदर्शिता और आत्मनिर्भरता को एकीकृत करने वाली व्यापक कार्ययोजना है। पारदर्शी और प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से यह करोड़ों ग्रामीण परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है, बेरोजगारी को कम कर सकता है तथा ग्रामीण भारत को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। वास्तव में, VB-G RAM G Act ग्रामीण भारत के लिए एक नए युग की शुरुआत है, जहाँ रोजगार केवल जीविका का साधन नहीं, बल्कि समृद्धि, आत्मनिर्भरता और सतत विकास का मजबूत आधार बनेगा।

मोहित मौर्य

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