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संतकबीरनगर। जिले में अवैध और मिलावटी शराब के कारोबार से जुड़े मामलों के सामने आने के बाद आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। हाल ही में पुलिस कार्रवाई में नकली व जल-मिश्रित शराब बरामद होने के बाद यह सवाल और बड़ा हो गया है कि आखिर आबकारी विभाग की नियमित जांच और निगरानी के बावजूद अवैध शराब का कारोबार कैसे फल-फूल रहा है? मिलावटी शराब महज राजस्व चोरी का मामला नहीं, बल्कि सीधे लोगों की जिंदगी और स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर खतरा है। शराब में अनधिकृत तरीके से पानी अथवा अन्य पदार्थों की मिलावट जानलेवा साबित हो सकती है। ऐसे में आबकारी विभाग की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। स्थानीय स्तर पर कार्रवाई का जिम्मा संभालने वाले अधिकारियों की सक्रियता पर सवाल उठाते हुए यह पूछा जाना स्वाभाविक है कि क्या शराब की दुकानों, गोदामों और संदिग्ध ठिकानों की नियमित जांच वास्तव में प्रभावी ढंग से हो रही है? यदि पुलिस को अवैध शराब पकड़ने में सफलता मिल रही है तो आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पहले क्यों नहीं सक्रिय हुई? अब निगाहें प्रदेश के आबकारी मंत्री पर भी हैं कि वे संतकबीरनगर में सामने आए मामलों को गंभीरता से लेते हुए विभागीय निगरानी की समीक्षा कराएंगे या नहीं। जरूरत है कि जिम्मेदारी तय हो, नियमित छापेमारी बढ़ाई जाए और मिलावटी शराब के नेटवर्क पर कठोर कार्रवाई हो, ताकि लोगों की जान से खिलवाड़ पूरी तरह रोका जा सके।

शराब के शौकीन रहें सावधान, मिलावटी शराब से सेहत को खतरा

संतकबीरनगर। जिले में अवैध और मिलावटी शराब के कारोबार से जुड़े मामलों के सामने आने के बाद आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। हाल ही में पुलिस कार्रवाई में नकली व जल-मिश्रित शराब बरामद होने के बाद यह सवाल और बड़ा हो गया है कि आखिर आबकारी विभाग की नियमित जांच और निगरानी के बावजूद अवैध शराब का कारोबार कैसे फल-फूल रहा है?

मिलावटी शराब महज राजस्व चोरी का मामला नहीं, बल्कि सीधे लोगों की जिंदगी और स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर खतरा है। शराब में अनधिकृत तरीके से पानी अथवा अन्य पदार्थों की मिलावट जानलेवा साबित हो सकती है। ऐसे में आबकारी विभाग की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

स्थानीय स्तर पर कार्रवाई का जिम्मा संभालने वाले अधिकारियों की सक्रियता पर सवाल उठाते हुए यह पूछा जाना स्वाभाविक है कि क्या शराब की दुकानों, गोदामों और संदिग्ध ठिकानों की नियमित जांच वास्तव में प्रभावी ढंग से हो रही है? यदि पुलिस को अवैध शराब पकड़ने में सफलता मिल रही है तो आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पहले क्यों नहीं सक्रिय हुई?

अब निगाहें प्रदेश के आबकारी मंत्री पर भी हैं कि वे संतकबीरनगर में सामने आए मामलों को गंभीरता से लेते हुए विभागीय निगरानी की समीक्षा कराएंगे या नहीं। जरूरत है कि जिम्मेदारी तय हो, नियमित छापेमारी बढ़ाई जाए और मिलावटी शराब के नेटवर्क पर कठोर कार्रवाई हो, ताकि लोगों की जान से खिलवाड़ पूरी तरह रोका जा सके।

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