जागरूक नागरिक दिनेश चंद्र श्रीवास्तव का छलका दर्द, विभागीय अधिकारियों पर लगाया संवेदनहीनता का आरोप
संतकबीरनगर। दीपावली पर जहां घर-घर दीप जल रहे हैं, रंग-बिरंगी विद्युत झालरों से मकान जगमगा रहे हैं, वहीं संतकबीरनगर के एक गांव का टोला आज भी बिजली की रोशनी से महरूम है। यह अंधेरा किसी एक रात का नहीं, बल्कि आजादी के लगभग 79 वर्षों बाद भी विकास के दावों पर सवाल खड़ा करता एक ऐसा सच है, जो व्यवस्था की संवेदनशीलता को झकझोर रहा है।
मामला हैंसर बाजार ब्लॉक के बारीडीहा गांव के छोटकी डड़िया टोले का है। यहां के निवासी दिनेश चंद्र श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर उदासीनता का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि 27 अगस्त 2024 से लगातार इस समस्या को शासन-प्रशासन और विभागीय अधिकारियों के संज्ञान में लाया जा रहा है, लेकिन अब तक विद्युतीकरण नहीं हो सका।
दिनेश बताते हैं कि काफी प्रयास के बाद विद्युत विभाग के अधिकारियों ने गांव का दौरा किया था। उस दौरान टोले में विद्युतीकरण, जर्जर तारों को बदलने और ब्रह्मस्थान से पंचायत भवन तक विद्युत पोल लगाने का आश्वासन मिला, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
उनकी चिंता सिर्फ बिजली के बल्ब जलाने तक सीमित नहीं है। उनका सवाल है कि मोबाइल, लैपटॉप और डिजिटल शिक्षा के दौर में बिजली के अभाव में बच्चों का भविष्य कैसे संवरेगा? दीपावली के दिन उन्होंने यहां तक कहा कि यदि विभागीय स्तर पर धनराशि की समस्या है तो ग्रामीण आपस में पैसा देने को भी तैयार हैं, लेकिन अब और इंतजार नहीं करना चाहते।
दिनेश ने चेतावनी दी है कि समाधान नहीं हुआ तो मामला मुख्यमंत्री और इलाहाबाद हाईकोर्ट तक ले जाया जाएगा। दीपावली के इस पर्व पर उनका सवाल व्यवस्था से है—जब हर घर रोशन करने की बात होती है, तो छोटकी डड़िया कब अंधेरे से बाहर आएगा?