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सत्यमेव टाइम्स में आपका स्वागत है [caption id="attachment_20544" align="alignnone" width="258"] सपा प्रत्याशी - जगत जायसवाल(फाइल फोटो)[/caption]  
संतकबीरनगर जिले में नगर निकाय की सियासत में सपा ने अपने पत्ते खोल दिए हैं। कभी साइकिल पर सवार होकर नगर पालिका खलीलाबाद के चेयरमैन बने जगत जायसवाल के ऊपर पार्टी ने बड़ा दांव खेलते हुए सत्तारूढ़ दल की मुसीबतें बढ़ा दिया है। पार्टी के इस फैसले को राजनीति के जानकार एक ऐसा मास्टर स्ट्रोक बता रहें है जिसकी वजह से इस सीट पर बीजेपी अब लड़ाई में नही है। राजनैतिक जानकारों की माने तो सपा का यह मास्टर स्ट्रोक बीजेपी को बाउंड्री से बाहर कर जीत का बड़ा विकल्प चुन लिया है। कभी सपा की नैय्या पार करने वाले जगत जायसवाल से इस बार भी पार्टी को उम्मीद है कि वो पार्टी के दामन में जीत की झोली डाल देंगे।
जगत जायसवाल पूर्व में सपा से ही चेयरमैन रहे, साल १७ में जब उन्हे पार्टी ने टिकट भी नही दिया तब वो पार्टी से बगावत कर हाथी पर सवार हुए और चुनाव में निवर्तमान चेयरमैन श्याम सुंदर वर्मा से मामूली अंतरो से चुनाव हार गए। चुनाव में मिली हार को वो स्वीकार न कर रिकाउंटिंग के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाए। कोर्ट के आदेश पर अंततः वोटो की गिनती हुई जिसमे उन्हे पुनः हार का सामना करना पड़ा। खुद के राजनैतिक वजूद की लड़ाई बचाने के लिए जगत जायसवाल लगातार बीजेपी और सपा से नजदीकियां बढ़ाने में लगे रहे।बीजेपी से जब उन्हे कोई आश नही रहा तब बीते दिनों उन्होंने समाजवादी पार्टी की सदस्यता हासिल करते हुए टिकट की दावेदारी कर दी, रूठे पुराने साथियों को मनाने में कामयाब रहे जगत जायसवाल को जब पार्टी ने अपना कैंडिडेट घोषित किया तब उनके समर्थकों में खुशी की लहर देखने को मिली। जगत को टिकट मिलने के बाद सोशल मीडिया वॉर भी शुरू हो गया, यह वॉर गैर दलीय लोगों ने शुरू करते हुए टिकट के एक अन्य दावेदार सपा के नगर अध्यक्ष परवेज के पक्ष में संवेदना दिखाते हुए पार्टी के अंदर फूट के बीज बोने की कोशिसे शुरू कर दिए हैं। हालांकि सपा के किसी जिम्मेदार पदाधिकारी ने जगत के टिकट का कोई विरोध नहीं किया है। जगत को लेकर पार्टी के पदाधिकारियों ने सोशल मीडिया पर किसी तरह की कोई नकारात्मक प्रतिक्रिया फिलहाल अभी तक नही दी है जिसका ये अंदाज लगाया जा सकता है कि सभी पदाधिकारी शीर्ष नेतृत्व के फैसले से सहमत है। जबकि गैर दलीय लोग जगत की एक फोटो के सहारे उन्हे संघी बताने की कोशिश सोशल मीडिया पर कर सपा खेमे में जगत को लेकर विद्रोह करवाने पर तुले हुए है। जगत को लोग उनके कार्यों की वजह से जानते है ये बात किसी से छिपी नही, साधारण जीवन जीने वाले जगत जायसवाल ने अपने कार्यकाल में नगर इलाके का जो विकास कराया वो आज भी लोगों की जुबां पर है। शहर के विभिन्न वार्डों में सड़क निर्माण, बिजली व्यवस्था, जल निकासी, तमाम नए दुकानों का निर्माण,औद्योगिक एरिया का विकास, अंत्येष्टि स्थल निर्माण, हीरालाल पीजी कालेज से लेकर शहर को जोड़ने वाली सड़क, बैंक चौराहे से लेकर विधियानी को जोड़ने वाली सड़क समेत तमाम विकास कार्य करवाने वाले पूर्व चेयरमैन जगत जायसवाल की छवि एक सेक्युलर नेता के तौर पर की जाती है। जिन्हे हिंदू वर्ग भी मानता है और मुसलमान वर्ग भी। अब जब पार्टी ने उनपर दांव खेला है तो कुछ सोच समझकर ही खेला होगा। पार्टी भी नगर निकाय चुनाव के बहाने २०२४ तक अपनी जमीन इतना अधिक मजबूत करना चाहती है जिससे उसे आगामी लोकसभा चुनाव में ज्यादे से ज्यादे फायदा हो। समाजवादी पार्टी के द्वारा जगत जायसवाल को टिकट दिए जाने के बाद राजनीति के पंडितों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि भाजपा के लिए अब इस सीट को निकालना काफी मुश्किल होगा क्योंकि जगत के साथ लोगों की संवेदनाएं भी है और जगत जनता के बीच लोकप्रिय भी है।

सपा का मास्टर स्ट्रोक ! क्या बीजेपी को करेगा बाउंड्री से बाहर?

सपा प्रत्याशी – जगत जायसवाल(फाइल फोटो)

 

संतकबीरनगर जिले में नगर निकाय की सियासत में सपा ने अपने पत्ते खोल दिए हैं। कभी साइकिल पर सवार होकर नगर पालिका खलीलाबाद के चेयरमैन बने जगत जायसवाल के ऊपर पार्टी ने बड़ा दांव खेलते हुए सत्तारूढ़ दल की मुसीबतें बढ़ा दिया है। पार्टी के इस फैसले को राजनीति के जानकार एक ऐसा मास्टर स्ट्रोक बता रहें है जिसकी वजह से इस सीट पर बीजेपी अब लड़ाई में नही है। राजनैतिक जानकारों की माने तो सपा का यह मास्टर स्ट्रोक बीजेपी को बाउंड्री से बाहर कर जीत का बड़ा विकल्प चुन लिया है। कभी सपा की नैय्या पार करने वाले जगत जायसवाल से इस बार भी पार्टी को उम्मीद है कि वो पार्टी के दामन में जीत की झोली डाल देंगे।
जगत जायसवाल पूर्व में सपा से ही चेयरमैन रहे, साल १७ में जब उन्हे पार्टी ने टिकट भी नही दिया तब वो पार्टी से बगावत कर हाथी पर सवार हुए और चुनाव में निवर्तमान चेयरमैन श्याम सुंदर वर्मा से मामूली अंतरो से चुनाव हार गए। चुनाव में मिली हार को वो स्वीकार न कर रिकाउंटिंग के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाए। कोर्ट के आदेश पर अंततः वोटो की गिनती हुई जिसमे उन्हे पुनः हार का सामना करना पड़ा। खुद के राजनैतिक वजूद की लड़ाई बचाने के लिए जगत जायसवाल लगातार बीजेपी और सपा से नजदीकियां बढ़ाने में लगे रहे।बीजेपी से जब उन्हे कोई आश नही रहा तब बीते दिनों उन्होंने समाजवादी पार्टी की सदस्यता हासिल करते हुए टिकट की दावेदारी कर दी, रूठे पुराने साथियों को मनाने में कामयाब रहे जगत जायसवाल को जब पार्टी ने अपना कैंडिडेट घोषित किया तब उनके समर्थकों में खुशी की लहर देखने को मिली। जगत को टिकट मिलने के बाद सोशल मीडिया वॉर भी शुरू हो गया, यह वॉर गैर दलीय लोगों ने शुरू करते हुए टिकट के एक अन्य दावेदार सपा के नगर अध्यक्ष परवेज के पक्ष में संवेदना दिखाते हुए पार्टी के अंदर फूट के बीज बोने की कोशिसे शुरू कर दिए हैं। हालांकि सपा के किसी जिम्मेदार पदाधिकारी ने जगत के टिकट का कोई विरोध नहीं किया है। जगत को लेकर पार्टी के पदाधिकारियों ने सोशल मीडिया पर किसी तरह की कोई नकारात्मक प्रतिक्रिया फिलहाल अभी तक नही दी है जिसका ये अंदाज लगाया जा सकता है कि सभी पदाधिकारी शीर्ष नेतृत्व के फैसले से सहमत है। जबकि गैर दलीय लोग जगत की एक फोटो के सहारे उन्हे संघी बताने की कोशिश सोशल मीडिया पर कर सपा खेमे में जगत को लेकर विद्रोह करवाने पर तुले हुए है। जगत को लोग उनके कार्यों की वजह से जानते है ये बात किसी से छिपी नही, साधारण जीवन जीने वाले जगत जायसवाल ने अपने कार्यकाल में नगर इलाके का जो विकास कराया वो आज भी लोगों की जुबां पर है। शहर के विभिन्न वार्डों में सड़क निर्माण, बिजली व्यवस्था, जल निकासी, तमाम नए दुकानों का निर्माण,औद्योगिक एरिया का विकास, अंत्येष्टि स्थल निर्माण, हीरालाल पीजी कालेज से लेकर शहर को जोड़ने वाली सड़क, बैंक चौराहे से लेकर विधियानी को जोड़ने वाली सड़क समेत तमाम विकास कार्य करवाने वाले पूर्व चेयरमैन जगत जायसवाल की छवि एक सेक्युलर नेता के तौर पर की जाती है। जिन्हे हिंदू वर्ग भी मानता है और मुसलमान वर्ग भी। अब जब पार्टी ने उनपर दांव खेला है तो कुछ सोच समझकर ही खेला होगा। पार्टी भी नगर निकाय चुनाव के बहाने २०२४ तक अपनी जमीन इतना अधिक मजबूत करना चाहती है जिससे उसे आगामी लोकसभा चुनाव में ज्यादे से ज्यादे फायदा हो। समाजवादी पार्टी के द्वारा जगत जायसवाल को टिकट दिए जाने के बाद राजनीति के पंडितों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि भाजपा के लिए अब इस सीट को निकालना काफी मुश्किल होगा क्योंकि जगत के साथ लोगों की संवेदनाएं भी है और जगत जनता के बीच लोकप्रिय भी है।

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