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संतकबीरनगर जिले के सपा खेमे में उस वक्त उत्साह का संचार नजर आया जब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने निष्ठावान कार्यकर्ता नित्यानंद यादव को राज्य कार्यकारिणी में स्थान देते हुए उन्हे प्रदेश सचिव पद पर मनोनीत किया। नित्यानंद यादव के मनोनयन से जुड़ा पत्र जैसे ही सोशल मीडिया में वायरल हुआ वैसे ही उनके चाहने वालों ने उन्हे बड़ी संख्या में बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल राजनैतिक भविष्य की कामना की। समर्थकों और चाहने वालों से बड़ी संख्या में मिली बधाइयों के मद्देनजर नित्यानंद यादव ने सभी का आभार प्रकट करते हुए कहा कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उन्हे जो जिम्मेदारी सौंपी है उसपर खरा उतरने का वो कार्य करेंगे।
आपको बता दें कि छात्र राजनीति के जरिए सक्रिय राजनीति की धारा से वर्ष 1992 में जुड़ने वाले नित्यानंद यादव अपनी जुझारू और बेबाक छवि के लिए जाने जाते हैं।वर्ष 1992 में पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने के बाद लगातार पार्टी हितों के लिए संघर्ष करने वाले नित्यानंद यादव जनहित की लड़ाई में 21 दिनों तक जेल में भी रहे। पूर्व में समाजवादी छात्र सभा का जिला उपाध्यक्ष, समाजवादी युवजन सभा का जिला अध्यक्ष, लोहिया वाहिनी का राष्ट्रीय सचिव रहने के साथ अपने गांव का ग्राम प्रधान और प्रधान संघ का जिलाध्यक्ष रह चुके नित्यानंद पार्टी के जिला महासचिव भी रह चुके हैं। पार्टी के सभी आंदोलनो और कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने के कारण बसपा सरकार में उनके ऊपर दर्जनों मुकदमे भी दर्ज किए गए थे।

पार्टी के प्रति निष्ठा का “नित्यानंद” को मिला इनाम, बनाए गए प्रदेश सचिव

संतकबीरनगर जिले के सपा खेमे में उस वक्त उत्साह का संचार नजर आया जब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने निष्ठावान कार्यकर्ता नित्यानंद यादव को राज्य कार्यकारिणी में स्थान देते हुए उन्हे प्रदेश सचिव पद पर मनोनीत किया। नित्यानंद यादव के मनोनयन से जुड़ा पत्र जैसे ही सोशल मीडिया में वायरल हुआ वैसे ही उनके चाहने वालों ने उन्हे बड़ी संख्या में बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल राजनैतिक भविष्य की कामना की। समर्थकों और चाहने वालों से बड़ी संख्या में मिली बधाइयों के मद्देनजर नित्यानंद यादव ने सभी का आभार प्रकट करते हुए कहा कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उन्हे जो जिम्मेदारी सौंपी है उसपर खरा उतरने का वो कार्य करेंगे।
आपको बता दें कि छात्र राजनीति के जरिए सक्रिय राजनीति की धारा से वर्ष 1992 में जुड़ने वाले नित्यानंद यादव अपनी जुझारू और बेबाक छवि के लिए जाने जाते हैं।वर्ष 1992 में पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने के बाद लगातार पार्टी हितों के लिए संघर्ष करने वाले नित्यानंद यादव जनहित की लड़ाई में 21 दिनों तक जेल में भी रहे। पूर्व में समाजवादी छात्र सभा का जिला उपाध्यक्ष, समाजवादी युवजन सभा का जिला अध्यक्ष, लोहिया वाहिनी का राष्ट्रीय सचिव रहने के साथ अपने गांव का ग्राम प्रधान और प्रधान संघ का जिलाध्यक्ष रह चुके नित्यानंद पार्टी के जिला महासचिव भी रह चुके हैं। पार्टी के सभी आंदोलनो और कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने के कारण बसपा सरकार में उनके ऊपर दर्जनों मुकदमे भी दर्ज किए गए थे।

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