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सत्यमेव टाइम्स में आपका स्वागत है संतकबीरनगर। महायोगी गोरखनाथ यूनिवर्सिटी के बी.एस.सी. एग्रीकल्चर के छात्र/छात्राओं का ग्रुप शुक्रवार को संतकबीरनगर जिले के इंडस्ट्रियल एरिया खलीलाबाद में स्थित पीआरडीएफ सीड्स (बीज विधायन संयंत्र) के फैक्ट्री पर पहुंचकर विजिट किया। यहां पर छात्र/छात्राओं ने पीआरडीएफ बीज को लेकर एमडी पुष्कर चौधरी से संवाद किया और बीज के उत्पादन तथा आपूर्ति से अवगत होते हुए। बीज के उत्पादन संबंध में श्री चौधरी ने छात्र/छात्राओं को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस बीज से फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए स्वस्थ एवं अनुवांशिक रूप से शुद्ध बीज एक महत्वपूर्ण अवयव है। उन्होंने बताया कि प्रमाणित बीज अनुवांशिक एवं भौतिक रूप से शुद्ध होते हैं तथा पौधों में एकरूपता, गुणों में समानता तथा पकने की अवधि एक पाई जाती है। इसकी क्षमता उत्तम होती है और दाना पुष्ट भरा व चमकदार होता है। इस बीज के उपयोग से सामान्य' बीच की उपेक्षा उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि होती है। विजिट पर आये छात्र/छात्राओं ने फैक्ट्री का भी भ्रमण किया। इस दौरान महायोगी गोरखनाथ यूनिवर्सिटी के एग्रीकल्चर विभाग की डॉ. शास्वती प्रेम कुमारी तथा छात्र/छात्राएं आशुतोष राय, अभिषेक चौरसिया, शुभम मौर्या, आलोक गुप्ता, अंजलि, वादल पटेल, प्रियांश मौर्या, आदर्श मौर्या, अमित राय, अभिषेक चौधरी, आंचल चतुर्वेदी, शिवम सिंह, साक्षी, निकिता गौड़, आस्था गुप्ता, अनुष्का गुप्ता, अनिवाश जायसवाल, दीक्षा पटेल, संध्या सिंह, प्राची, विकास निषाद, संदीप निषाद सहित अन्य उपस्थित रहे।

छात्र/छात्राओं ने पीआरडीएफ बीज फैक्ट्री का किया विजिट

संतकबीरनगर। महायोगी गोरखनाथ यूनिवर्सिटी के बी.एस.सी. एग्रीकल्चर के छात्र/छात्राओं का ग्रुप शुक्रवार को संतकबीरनगर जिले के इंडस्ट्रियल एरिया खलीलाबाद में स्थित पीआरडीएफ सीड्स (बीज विधायन संयंत्र) के फैक्ट्री पर पहुंचकर विजिट किया। यहां पर छात्र/छात्राओं ने पीआरडीएफ बीज को लेकर एमडी पुष्कर चौधरी से संवाद किया और बीज के उत्पादन तथा आपूर्ति से अवगत होते हुए। बीज के उत्पादन संबंध में श्री चौधरी ने छात्र/छात्राओं को जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि इस बीज से फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए स्वस्थ एवं अनुवांशिक रूप से शुद्ध बीज एक महत्वपूर्ण अवयव है। उन्होंने बताया कि प्रमाणित बीज अनुवांशिक एवं भौतिक रूप से शुद्ध होते हैं तथा पौधों में एकरूपता, गुणों में समानता तथा पकने की अवधि एक पाई जाती है। इसकी क्षमता उत्तम होती है और दाना पुष्ट भरा व चमकदार होता है। इस बीज के उपयोग से सामान्य’ बीच की उपेक्षा उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि होती है। विजिट पर आये छात्र/छात्राओं ने फैक्ट्री का भी भ्रमण किया। इस दौरान महायोगी गोरखनाथ यूनिवर्सिटी के एग्रीकल्चर विभाग की डॉ. शास्वती प्रेम कुमारी तथा छात्र/छात्राएं आशुतोष राय, अभिषेक चौरसिया, शुभम मौर्या, आलोक गुप्ता, अंजलि, वादल पटेल, प्रियांश मौर्या, आदर्श मौर्या, अमित राय, अभिषेक चौधरी, आंचल चतुर्वेदी, शिवम सिंह, साक्षी, निकिता गौड़, आस्था गुप्ता, अनुष्का गुप्ता, अनिवाश जायसवाल, दीक्षा पटेल, संध्या सिंह, प्राची, विकास निषाद, संदीप निषाद सहित अन्य उपस्थित रहे।

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