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संत कबीर नगर- बखिरा थाना क्षेत्र में हुए जानलेवा हमले के दो आरोपियों - शिवम पाठक उर्फ बंटी पाठक और अमन पाल - की जमानत अर्जी सत्र न्यायाधीश मोहनलाल विश्वकर्मा ने ख़ारिज कर दी है। जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी विशाल श्रीवास्तव ने अदालत में जोरदार विरोध करते हुए बताया कि आरोपियों का कृत्य बेहद गंभीर था और इससे पीड़ित की जान जा सकती थी। यह मामला तब सामने आया जब देवेंद्र यादव नाम के एक व्यक्ति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि 16 जुलाई की शाम लगभग 6:15 बजे, वह तिघरा ब्लॉक पर ग्राम सभा के काम से गए थे। तभी बंटी पाठक, अनुराग उर्फ डॉन, सौरभ मिश्रा और दो अन्य अज्ञात लोगों ने उन पर हमला कर दिया। देवेंद्र के अनुसार, आरोपियों ने उन्हें बुरी तरह मारा-पीटा, गाली-गलौज की और जान से मारने की नीयत से कट्टे (पिस्टल) से उन पर चार गोलियाँ चलाईं। बाकी आरोपियों ने हवा में फायरिंग की। इस हमले में देवेंद्र को कई गंभीर चोटें आईं। शिकायत में देवेंद्र ने यह भी बताया कि अतीत में भी उनकी जान लेने का प्रयास किया जा चुका है, जिसमें सौरभ मिश्रा का भाई अंकित मिश्रा भी शामिल था। उन्होंने कहा कि आरोपी लगातार उनका पीछा करते हैं और उनकी जान को खतरा है। जब देवेंद्र शोर मचाने लगे, तो वहाँ लोग इकट्ठा हो गए। तभी उनके चाचा विजय यादव भी ब्लॉक से बाहर आए। आरोपियों ने उन पर भी कट्टा तान दिया और जान से मारने की धमकी दी। किसी तरह दोनों ने अपनी जान बचाई और पुलिस को सूचना दी। इसके बाद, थाना बखिरा में मुकदमा दर्ज हुआ और पुलिस ने शिवम पाठक उर्फ बंटी पाठक और अमन पाल को गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपियों ने सत्र न्यायाधीश के सामने जमानत की अर्जी लगाई। जिला शासकीय अधिवक्ता विशाल श्रीवास्तव ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया कि आरोपियों ने अवैध हथियारों का इस्तेमाल करके जानलेवा हमला किया था, जिससे पीड़ित की जान को खतरा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए, न्यायाधीश ने दोनों आरोपियों की जमानत अर्जी रद्द कर दी।

जानलेवा हमले के आरोपियों की जमानत अर्जी ख़ारिज

संत कबीर नगर- बखिरा थाना क्षेत्र में हुए जानलेवा हमले के दो आरोपियों – शिवम पाठक उर्फ बंटी पाठक और अमन पाल – की जमानत अर्जी सत्र न्यायाधीश मोहनलाल विश्वकर्मा ने ख़ारिज कर दी है। जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी विशाल श्रीवास्तव ने अदालत में जोरदार विरोध करते हुए बताया कि आरोपियों का कृत्य बेहद गंभीर था और इससे पीड़ित की जान जा सकती थी।

यह मामला तब सामने आया जब देवेंद्र यादव नाम के एक व्यक्ति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि 16 जुलाई की शाम लगभग 6:15 बजे, वह तिघरा ब्लॉक पर ग्राम सभा के काम से गए थे। तभी बंटी पाठक, अनुराग उर्फ डॉन, सौरभ मिश्रा और दो अन्य अज्ञात लोगों ने उन पर हमला कर दिया। देवेंद्र के अनुसार, आरोपियों ने उन्हें बुरी तरह मारा-पीटा, गाली-गलौज की और जान से मारने की नीयत से कट्टे (पिस्टल) से उन पर चार गोलियाँ चलाईं। बाकी आरोपियों ने हवा में फायरिंग की। इस हमले में देवेंद्र को कई गंभीर चोटें आईं।

शिकायत में देवेंद्र ने यह भी बताया कि अतीत में भी उनकी जान लेने का प्रयास किया जा चुका है, जिसमें सौरभ मिश्रा का भाई अंकित मिश्रा भी शामिल था। उन्होंने कहा कि आरोपी लगातार उनका पीछा करते हैं और उनकी जान को खतरा है।

जब देवेंद्र शोर मचाने लगे, तो वहाँ लोग इकट्ठा हो गए। तभी उनके चाचा विजय यादव भी ब्लॉक से बाहर आए। आरोपियों ने उन पर भी कट्टा तान दिया और जान से मारने की धमकी दी। किसी तरह दोनों ने अपनी जान बचाई और पुलिस को सूचना दी।

इसके बाद, थाना बखिरा में मुकदमा दर्ज हुआ और पुलिस ने शिवम पाठक उर्फ बंटी पाठक और अमन पाल को गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपियों ने सत्र न्यायाधीश के सामने जमानत की अर्जी लगाई।

जिला शासकीय अधिवक्ता विशाल श्रीवास्तव ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया कि आरोपियों ने अवैध हथियारों का इस्तेमाल करके जानलेवा हमला किया था, जिससे पीड़ित की जान को खतरा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए, न्यायाधीश ने दोनों आरोपियों की जमानत अर्जी रद्द कर दी।

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