
कोलकाता दूरदर्शन में ‘बैकडोर भर्ती’ की निष्पक्ष जांच और देश भर के अंशकालिक संवाददाताओं के लिए न्याय की गुहार; यूनियन ने सौंपा पत्र
नई दिल्ली/नागपुर
प्रसार भारती के अधीन आकाशवाणी और दूरदर्शन के लिए देश के कोने-कोने से समाचार जुटाने वाले पार्ट टाइम कॉरस्पॉन्डेंट्स (पीटीसी) के नियमितीकरण का मुद्दा अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत जी के समक्ष पहुंच गया है। ‘प्रसार भारती पार्ट टाइम कॉरस्पॉन्डेंट्स यूनियन’ के अध्यक्ष विकास कालिया ने संघ प्रमुख को एक विस्तृत पत्र लिखकर वर्षों से शोषित हो रहे संविदा कर्मियों को न्याय दिलाने की मांग की है।
संघ प्रमुख को जून 03, 2026 को भेजे गए इस पत्र में न्यायालयों के आदेशों का हवाला देते हुए सरकारी संस्थानों में संविदा कर्मियों के शोषण को समाप्त करने और पीटीसी कर्मियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया को लागू कराने हेतु आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया गया है।
यूनियन के अध्यक्ष विकास कालिया ने पत्र में स्पष्ट किया है कि देश के अधिकतर सभी जिलों में काम कर रहे पीटीसी की नियुक्ति सभी सरकारी नियमों और निर्धारित भर्ती प्रक्रियाओं का पालन करते हुए की गई है। ये कोई ‘बैकडोर एंट्री’ से आए कर्मचारी नहीं हैं और न ही इनकी नियुक्ति को कभी किसी ने चुनौती दी है।
ये कर्मचारी बिना किसी व्यवधान के वर्षों से निरंतर सेवाएं दे रहे हैं और इनके काम पर कभी कोई सवाल नहीं उठा है। इसके विपरीत, इनके अनुबंधों का 10 वर्षों से भी अधिक समय तक लगातार नवीनीकरण किया जाता रहा है। पत्र में दर्द बयां करते हुए कहा गया है कि:”पीटीसी आकाशवाणी एवं दूरदर्शन दोनों के लिए समाचार संकलन, रिपोर्टिंग, कैमरा संचालन तथा संपादन जैसे महत्वपूर्ण दायित्व निभाते हैं। उनकी शैक्षणिक एवं तकनीकी योग्यताएं स्थायी संवाददाताओं के समान हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न्यूनतम वेतन, सेवा लाभ तथा नियमितीकरण के अधिकार से वंचित रखा गया है।”
यूनियन ने पत्र के माध्यम से प्रसार भारती में चल रहे कथित दोहरे मानदंडों और भारी भेदभाव को भी उजागर किया है। एक तरफ जहां योग्य पीटीसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कोलकाता दूरदर्शन में नियमों को ताक पर रखकर की गई एक नियुक्ति पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
पत्र के अनुसार, कोलकाता दूरदर्शन में एक ‘कंसल्टिंग एडिटर’ की नियुक्ति बिना किसी समुचित विज्ञापन, साक्षात्कार या मानक भर्ती प्रक्रिया का पालन किए (बैकडोर से) की गई। इसके बावजूद, उनका अनुबंध वर्षों से नवीनीकृत हो रहा है और उन्हें प्रति माह दो लाख रुपये से अधिक का पारिश्रमिक दिया जा रहा है। यूनियन ने समान योग्यता रखने वाले पीटीसी कर्मियों के साथ इसे घोर अन्याय बताते हुए इस कथित बैकडोर भर्ती की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है।
यूनियन ने संघ प्रमुख का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि देश के सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों ने सरकारी कार्यालयों में कार्यरत संविदा कर्मियों के नियमितीकरण के संबंध में बेहद स्पष्ट और कड़े निर्देश दिए हैं। न्यायालयों ने साफ कहा है कि कोई भी प्राधिकरण नियमितीकरण की तय प्रक्रिया की अनदेखी नहीं कर सकता।
पत्र के अंत में अध्यक्ष विकास कालिया ने संघ प्रमुख से विनम्र अनुरोध करते हुए कहा है कि देश के सर्वोच्च पदों पर आसीन होने के नाते वे इस मामले में हस्तक्षेप करें, ताकि प्रसार भारती के पीटीसी के नियमितीकरण के मामले में अदालती आदेशों को लागू कराया जा सके। यूनियन को उम्मीद है कि इस सकारात्मक पहल से वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे पीटीसी कर्मियों को बड़ी राहत मिलेगी और संविदा कर्मियों के शोषण पर पूरी तरह अंकुश लग सकेगा।