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सत्यमेव टाइम्स में आपका स्वागत है   पोस्टर से डरने वाली सत्ता निरंकुशता की प्रतीक, दमन से नहीं मरेंगे विचारसंतकबीरनगर: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अ [caption id="attachment_27696" align="alignnone" width="222"] रिपोर्ट - कुलदीप मिश्र (उप संपादक)[/caption] ध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बेहद करीबी,कद्दावर सपा नेता और पूर्व विधान परिषद सदस्य (MLC) संतोष यादव सनी भैया ने गोरखपुर में सपा नेता अरविंद उपेनद्र शुक्ला की गिरफ्तारी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की असली ताकत उसकी दीवारों और इमारतों में नहीं बल्कि उसके नागरिकों की स्वतंत्र आवाज़ों में बसती है। गोरखपुर के शास्त्री चौक पर अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन के आरोपों से जुड़ा बैनर लगाने पर जिस तरह पुलिस और नगर निगम ने मिलकर कार्रवाई की और अरविंद शुक्ला,भारत निषाद व रामचंद्र मौर्य को जेल भेजा वह पूरी तरह सत्ता का अहंकार और प्रतिशोध की राजनीति है। हमारा संविधान हर व्यक्ति को बोलने लिखने और अपनी असहमति प्रकट करने का बुनियादी अधिकार देता है। डाक्टर राममनोहर लोहिया अक्सर कहते थे कि जिंदा कौमें पांच साल तक इंतजार नहीं करतीं वे हर गलत फैसले पर सड़क और संसद में अपनी आवाज बुलंद करती हैं। आज जब राजनीति में जन-संवाद की जगह बदले, प्रतिशोध और पुलिसिया उत्पीड़न ने ले ली है, तो यह लोकतंत्र की स्वस्थ परंपरा पर सबसे बड़ा आघात है। ​ ​पूर्व विधान परिषद बस्ती मण्डल संतोष यादव सनी भैया ने सत्ता पक्ष को राष्ट्रनायकों के विचारों की याद दिलाते हुए कहा कि महात्मा गांधी ने हमेशा सिखाया था कि सत्ता का अहंकार जब सत्य को दबाने लगे तो शांतिपूर्ण विरोध सबसे बड़ा धर्म बन जाता है। दमन कभी भी विचारों को नहीं मार सकता। जब सत्ता असहमति के एक पोस्टर या एक तीखे शब्द से डरकर पुलिस को आगे कर दे तो वह अपनी कमजोरी जाहिर करती है क्योंकि लोकतंत्र का मतलब सिर्फ हुकूमत करना नहीं बल्कि आलोचना को सुनने का साहस रखना है। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भी संसद में हमेशा मजबूत विपक्ष और तीखी आलोचना का स्वागत किया था क्योंकि वे जानते थे कि बिना आलोचना के सत्ता निरंकुश हो जाती है। अंततः राजनीति में प्रतिशोध की यह भावना केवल लोकतंत्र को कमजोर कर रही है। एक स्वस्थ समाज वही है जहां नागरिक बिना किसी डर के अपनी आवाज उठा सके और सत्ता उस आवाज को दबाने के बजाय उसका सम्मान करे, यही हमारे राष्ट्रनायकों का सपना था जिसे यह सरकार कुचलना चाहती है।

विपक्ष की आवाज़ दबाने के लिए पुलिसिया दमन का सहारा ले रही सरकार: संतोष यादव सनी

 

पोस्टर से डरने वाली सत्ता निरंकुशता की प्रतीक, दमन से नहीं मरेंगे विचार

संतकबीरनगर: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अ

रिपोर्ट – कुलदीप मिश्र (उप संपादक)

ध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बेहद करीबी,कद्दावर सपा नेता और पूर्व विधान परिषद सदस्य (MLC) संतोष यादव सनी भैया ने गोरखपुर में सपा नेता अरविंद उपेनद्र शुक्ला की गिरफ्तारी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की असली ताकत उसकी दीवारों और इमारतों में नहीं बल्कि उसके नागरिकों की स्वतंत्र आवाज़ों में बसती है। गोरखपुर के शास्त्री चौक पर अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन के आरोपों से जुड़ा बैनर लगाने पर जिस तरह पुलिस और नगर निगम ने मिलकर कार्रवाई की और अरविंद शुक्ला,भारत निषाद व रामचंद्र मौर्य को जेल भेजा वह पूरी तरह सत्ता का अहंकार और प्रतिशोध की राजनीति है। हमारा संविधान हर व्यक्ति को बोलने लिखने और अपनी असहमति प्रकट करने का बुनियादी अधिकार देता है। डाक्टर राममनोहर लोहिया अक्सर कहते थे कि जिंदा कौमें पांच साल तक इंतजार नहीं करतीं वे हर गलत फैसले पर सड़क और संसद में अपनी आवाज बुलंद करती हैं। आज जब राजनीति में जन-संवाद की जगह बदले, प्रतिशोध और पुलिसिया उत्पीड़न ने ले ली है, तो यह लोकतंत्र की स्वस्थ परंपरा पर सबसे बड़ा आघात है।

​पूर्व विधान परिषद बस्ती मण्डल संतोष यादव सनी भैया ने सत्ता पक्ष को राष्ट्रनायकों के विचारों की याद दिलाते हुए कहा कि महात्मा गांधी ने हमेशा सिखाया था कि सत्ता का अहंकार जब सत्य को दबाने लगे तो शांतिपूर्ण विरोध सबसे बड़ा धर्म बन जाता है। दमन कभी भी विचारों को नहीं मार सकता। जब सत्ता असहमति के एक पोस्टर या एक तीखे शब्द से डरकर पुलिस को आगे कर दे तो वह अपनी कमजोरी जाहिर करती है क्योंकि लोकतंत्र का मतलब सिर्फ हुकूमत करना नहीं बल्कि आलोचना को सुनने का साहस रखना है। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भी संसद में हमेशा मजबूत विपक्ष और तीखी आलोचना का स्वागत किया था क्योंकि वे जानते थे कि बिना आलोचना के सत्ता निरंकुश हो जाती है। अंततः राजनीति में प्रतिशोध की यह भावना केवल लोकतंत्र को कमजोर कर रही है। एक स्वस्थ समाज वही है जहां नागरिक बिना किसी डर के अपनी आवाज उठा सके और सत्ता उस आवाज को दबाने के बजाय उसका सम्मान करे, यही हमारे राष्ट्रनायकों का सपना था जिसे यह सरकार कुचलना चाहती है।

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