- शैक्षणिक संस्थानों से लेकर सरकारी कार्यालयों तक ध्वजारोहण की जगह फहराया गया तिरंगा
- अपने ऐतिहासिक पर्वों की संवैधानिक महत्ता से कितना दूर खड़ा है हमारा सिस्टम
संतकबीरनगर।(विशेष आलेख – Y यादव)
स्वतंत्रता दिवस के 79वे वर्षगांठ पर जब तिरंगे के ध्वजारोहण को लेकर एक पड़ताल की गई तो चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। सरकारी प्रतिष्ठान और शैक्षणिक संस्थान समाज के गुरु माने जाते हैं। इन्ही संस्थानों से समाज अपनी परंपराओं के निर्वहन की प्रेरणा लेता। शुक्रवार को संतकबीरनगर जिले के कई सरकारी संस्थानों और शैक्षणिक प्रतिष्ठानों के ध्वजारोहण प्रक्रिया का जायजा लिया तो चौंकाने वाली स्थिति सामने आई। संविधान के तहत स्वतंत्रता दिवस के पर्व पर ध्वजारोहण का प्राविधान है जबकि गणतंत्र दिवस के पर्व पर तिरंगा फहराने का नियम रखा गया है। ध्वजारोहण का तात्पर्य तिरंगे को धीरे धीरे उपर उठा कर तब फहराना होता है, जिसका उदाहरण लालकिले की प्राचीर पर देखने को मिल सकता है। जबकि गणतंत्र दिवस पर झंडा फहराने में तिरंगे को ऊपर बांधकर फहराया जाता है। संविधान में निहित प्रविधानो के तहत स्वतंत्रता दिवस के ध्वजारोहण का पर्याय यह है कि तिरंगे को बीच के स्थान से धीरे धीरे ऊपर ले जाना होता है। शिखर पर पहुंचाने के बाद तिरंगा फहराया जाता है। इस का संवैधानिक महत्व भी है। ध्वजारोहण में तिरंगे को धीरे धीरे ऊपर ले जाने का मतलब यह कि तमाम संघर्षों और कुर्बानियों के बाद हिंदुस्तान को आजादी मिली है। जबकि गणतंत्र दिवस में फहरता तिरंगा हमारी आजादी के जश्न को आनंदित करने का प्रतीक है। शुक्रवार को जब सरकारी संस्थानों में स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण की गलत प्रक्रिया पर व्यवस्था में जुड़े जिम्मेदारों से वार्ता हुई तो उन्हे भी इसकी जानकारी नहीं थी। जिम्मेदार अधिकारी भी इस पहलू से अंजान बने रहे। मजे की बात यह है कि स्वतंत्रता और गणतंत्रता के महत्व से अनभिज्ञ अधिकारी अपने कमीशन के रेट को कार्य स्थल पर पहुंचते ही पता कर लेते हैं लेकिन देशहित और संविधान के दायित्व को समझना ही नही चाहते। यह हमारी नियत का ही परिचायक है जिसे समाज सिस्टम का गड़बड़झाला समझता है। मतलब साफ है कहीं सर्व समाज को राष्ट्रीयता का संदेश देने वाला प्रशासनिक तबका भी राष्ट्रीयता का दिखावा करके समाज को लूटने के लिए ही तो अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन तो नहीं कर रहा है। यह सवाल आज के हर देशवासी की जुबां पर तैर रहा है।