

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में करोड़ों रुपये के बजट आवंटन को लेकर लगाए गए गंभीर आरोपों ने शासन के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। मामला अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंच चुका है। भाजपा जिला कार्यसमिति सदस्य एवं जिला संयोजक (मीडिया सेल) संदीप राय ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (EOW) से कराने की मांग की है। शिकायत पर मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव गृह को जांच के आदेश दिए हैं।
आरोपों की परतें खुलीं तो मामला सिर्फ बजट जारी करने की प्रक्रिया तक सीमित नहीं दिखाई देता। शिकायतकर्ता का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग में सामान्य बजट आवंटन की पूर्व निर्धारित व्यवस्था में बदलाव कर अधिकारियों को अलग-अलग समय पर बजट आवंटित किया गया। इस बदलाव की जरूरत और प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए वित्त नियंत्रक दीपक सिंह, महानिदेशक डॉ. पवन कुमार अरुण तथा वरिष्ठ लेखा अधिकारी दिनेश कुमार वर्मा की भूमिका की जांच की मांग की गई है।
सबसे बड़ा सवाल करोड़ों की रकम को लेकर है। शिकायत में CMO के लिए 23.18 करोड़ रुपये, अन्य मदों में 25.15 करोड़ रुपये, CMS के लिए 30.46 करोड़ रुपये तथा अतिरिक्त मद में 20.55 करोड़ रुपये के बजट आवंटन का उल्लेख किया गया है।
यही नहीं, शिकायत में कुछ अधिकारियों पर कथित रूप से चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने और 10 से 15 प्रतिशत तक कमीशन लिए जाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और इनकी सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की पहचान भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को लेकर रही है। ऐसे में अब निगाहें शासन की जांच पर टिक गई हैं।
क्या करोड़ों के बजट आवंटन में वास्तव में कोई बड़ा खेल हुआ? क्या नियमों को दरकिनार किया गया? और यदि आरोप सही निकले तो जिम्मेदार कौन होगा?
इन सवालों का जवाब अब जांच की रिपोर्ट देगी। फिलहाल मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग से जुड़े इस मामले ने सियासी और प्रशासनिक दोनों हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।