जिलाधिकारी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग,अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां न मिलने से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित
किसान,फरियादी,वकील मुंशी सब परेशान प्रशासनिक सुस्ती के कारण तहसील परिसर में बढ़ी बेचैनी
रिपोर्ट -कुलदीप मिश्र
संतकबीरनगर:जिले के खलीलाबाद सदर तहसील का रिकॉर्ड रूम इन दिनों प्रशासनिक उदासीनता और मनमाने रवैये की बदहाली का जीवंत प्रमाण बन चुका है। रिकॉर्ड कीपर बाबूराम के स्थानांतरण को लंबा वक्त बीत जाने के बावजूद उनके स्थान पर किसी नए और जिम्मेदार कर्मचारी को विधिवत चार्ज न सौंपे जाने के कारण पूरे रिकॉर्ड रूम का कामकाज पूरी तरह से ठप हो गया है। नतीजा यह है कि विगत 20 अगस्त से यहाँ ताला सा लगा हुआ है और मुकदमों की रीढ़ माने जाने वाले अति महत्वपूर्ण 1359 फसली खसरे समेत तमाम जरूरी पुरानी नकलें और अभिलेखों के मुआयने का कार्य ठप पड़ा हुआ है। ज़िम्मेदारों की इस घोर लापरवाही ने न्याय की आस लगाए बैठे आम नागरिकों और न्यायिक प्रक्रिया के पहरुओं के सामने संकट खड़ा कर दिया है।
इस व्यवस्थागत नाकामी की सबसे बड़ी मार तहसील आने वाले उन तमाम जरूरतमंदों पर पड़ रही है जिनकी पेशियाँ और तारीखें मुकदमों की पैरवी के इर्द-गिर्द घूमती हैं।
खलीलाबाद तहसील में प्रतिदिन किसानों से लेकर आम फरियादियों कीमती वक्त निकालकर तहसील पहुँचने वाले की वकीलों और उनके मुंशियों तक के लिए यह स्थिति मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना जैसी बन गई है। पुराने राजस्व अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां समय पर हाथ न लगने के कारण जहाँ मुकदमों की सुनवाई बाधित हो रही है वहीं न्याय की प्रक्रिया में अनावश्यक और असहनीय विलंब हो रहा है। तहसील की चौखट पर न्याय की गुहार लगाने आने वाले लोग रोज़ाना बाबूओं के कमरों और अधिकारियों की चौखटों के चक्कर काटकर खाली हाथ लौटने को विवश हैं जिससे प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति उनका आक्रोश लगातार उबल रहा है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन की नींद कब टूटती है और कब इस प्रशासनिक गतिरोध को समाप्त किया जाता है। वकीलों और आम जनता ने जिलाधिकारी से तत्काल हस्तक्षेप करने और बिना किसी देरी के रिकॉर्ड रूम का चार्ज किसी सक्षम तथा ईमानदार कर्मचारी को सौंपे जाने की माँग की है। जनहित से जुड़े इस बेहद संवेदनशील मामले में रिकॉर्ड रूम की व्यवस्थाओं को युद्धस्तर पर पटरी पर लाना प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए ताकि राजस्व अभिलेखों के अभाव में किसी भी फरियादी का हक न मारा जाए और तहसील का यह अहम ढांचा एक बार फिर सुचारू रूप से दौड़ सके।