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सत्यमेव टाइम्स में आपका स्वागत है       संतकबीरनगर। माहे रबीउल अव्वल की 12वीं तारीख यानी मजहबे इस्लाम के आखिरी पैगंबर हजरत मोहम्मद (सल्लः) की 12 रबीउल अव्वल यौमे वेलादत का मुकद्दस व पाक पर्व मुस्लिम भाइयों ने पारंपरिक ढंग से मनाया गया। जुलूस में खलीलाबाद शहर के रजा मस्जिद, गौसिया मस्जिद, कादरी मस्जिद सहित अन्य मस्जिदों के मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल रहे। शहर में मदरसा दारूल उलूम अहले सुन्नत बहरूल उलूम अंसार टोला खलीलाबाद के तत्वावधान में जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया। जुलूस का नेतृत्व मुफ्ती मो0 नईम खां, मौलाना हसमुल्लाह, मास्टर वसीम, मास्टर नुरूल्लाह, डॉ0 अशरफ अली, पूर्व चेयरमैन नगर पालिका खलीलाबाद जगत जायसवाल, दारूल उलूम अहले सुन्नत से मुस्लिम भाईयों ने ‘नारा-ए-तकवीर अल्लाह हू अकबर’ सहित अन्य धार्मिक नारों के साथ बैंक चौराहे तक जुलूस निकाला। पुनः मदरसे पर दुआइया तकरीब व सलातो सलाम, नियाजे फातेहा के साथ जुलूस संपन्न हुआ। वक्ताओं ने कहा कि पैगंबरे इस्लाम नबी-ए-करीब (सल्लः) के आने के पहले दुनिया गुमराही की शिकार थी लोग कबीलों में बंटे हुए थे। आपसी भेदभाव व तमाम बुराइयां फैली हुई थी। नबी ने दुनिया को जो राह दिखाई और जो रोशनी दी उससे लोगों में भाईचारा, मोहब्बत व खुलूस बढ़ा। दुश्मनों को भी दोस्ती का पैगाम दिया और पूरी कायनात में अम्न व शांति कायम की। आपके दुश्मन भी आपके कायल हो गए और अल्लाह पर ईमान लाए। आपके पहले अल्लाह या खुदा से लोगों को जोड़ने और बुराइयों को खत्म करने की कोशिशे कामयाब नहीं हो सकी थीं। जब लोगों को ईमान की रोशनी मिली तब उन्होंने आपको अल्लाह का नबी मनाया। आपने दुनिया को न सिर्फ रोशनी बल्कि जिन्दगी भी दी। यही वजह है कि अल्लाहतआला ने आपके नाम को अर्शे-बरी पर अपने नाम के साथ रखा। आज दुनिया में कुछ लोग गलत तरीके से इस्लाम को पेश करने की कोशिश में लगे हैं जो नबी-ए-करीम (सल्लः) की हस्ती से नावाकिफ हैं या जानबूझ कर ऐसी बातें कर रहे है। इस अवसर पर जिलाधिकारी प्रेम रंजन सिंह व पुलिस अधीक्षक सोनम कुमार के निर्देशन में सीओ सदर अंशुमान मिश्र व इंस्पेक्टर कोतवाली विजय नरायन प्रसाद के नेतृत्व में कोतवाली पुलिस चुस्त-दुरूस्त रही और जुलूस व अन्य कार्यक्रम पुर अम्न व पुरसुकून माहौल में संपन्न हुआ।

संतकबीरनगर-12 रबीउल अव्वल के अवसर पर धूमधाम से निकला जूलूसे मोहम्मदी

 

 

 

संतकबीरनगर। माहे रबीउल अव्वल की 12वीं तारीख यानी मजहबे इस्लाम के आखिरी पैगंबर हजरत मोहम्मद (सल्लः) की 12 रबीउल अव्वल यौमे वेलादत का मुकद्दस व पाक पर्व मुस्लिम भाइयों ने पारंपरिक ढंग से मनाया गया। जुलूस में खलीलाबाद शहर के रजा मस्जिद, गौसिया मस्जिद, कादरी मस्जिद सहित अन्य मस्जिदों के मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल रहे। शहर में मदरसा दारूल उलूम अहले सुन्नत बहरूल उलूम अंसार टोला खलीलाबाद के तत्वावधान में जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया। जुलूस का नेतृत्व मुफ्ती मो0 नईम खां, मौलाना हसमुल्लाह, मास्टर वसीम, मास्टर नुरूल्लाह, डॉ0 अशरफ अली, पूर्व चेयरमैन नगर पालिका खलीलाबाद जगत जायसवाल, दारूल उलूम अहले सुन्नत से मुस्लिम भाईयों ने ‘नारा-ए-तकवीर अल्लाह हू अकबर’ सहित अन्य धार्मिक नारों के साथ बैंक चौराहे तक जुलूस निकाला। पुनः मदरसे पर दुआइया तकरीब व सलातो सलाम, नियाजे फातेहा के साथ जुलूस संपन्न हुआ। वक्ताओं ने कहा कि पैगंबरे इस्लाम नबी-ए-करीब (सल्लः) के आने के पहले दुनिया गुमराही की शिकार थी लोग कबीलों में बंटे हुए थे। आपसी भेदभाव व तमाम बुराइयां फैली हुई थी। नबी ने दुनिया को जो राह दिखाई और जो रोशनी दी उससे लोगों में भाईचारा, मोहब्बत व खुलूस बढ़ा। दुश्मनों को भी दोस्ती का पैगाम दिया और पूरी कायनात में अम्न व शांति कायम की। आपके दुश्मन भी आपके कायल हो गए और अल्लाह पर ईमान लाए। आपके पहले अल्लाह या खुदा से लोगों को जोड़ने और बुराइयों को खत्म करने की कोशिशे कामयाब नहीं हो सकी थीं। जब लोगों को ईमान की रोशनी मिली तब उन्होंने आपको अल्लाह का नबी मनाया। आपने दुनिया को न सिर्फ रोशनी बल्कि जिन्दगी भी दी। यही वजह है कि अल्लाहतआला ने आपके नाम को अर्शे-बरी पर अपने नाम के साथ रखा। आज दुनिया में कुछ लोग गलत तरीके से इस्लाम को पेश करने की कोशिश में लगे हैं जो नबी-ए-करीम (सल्लः) की हस्ती से नावाकिफ हैं या जानबूझ कर ऐसी बातें कर रहे है। इस अवसर पर जिलाधिकारी प्रेम रंजन सिंह व पुलिस अधीक्षक सोनम कुमार के निर्देशन में सीओ सदर अंशुमान मिश्र व इंस्पेक्टर कोतवाली विजय नरायन प्रसाद के नेतृत्व में कोतवाली पुलिस चुस्त-दुरूस्त रही और जुलूस व अन्य कार्यक्रम पुर अम्न व पुरसुकून माहौल में संपन्न हुआ।

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