संतकबीरनगर। अखिल भारतीय नौजवान सभा की तरफ से शहीदे आजम सरदार भगत सिंह का 92वां बलिदान दिवस का0 रूस्तम खान के आवास पर मनाया गया। जिसकी अध्यक्षता पूर्व सिक्रेटरी का0 बिस्मिल्लाह खान की अध्यक्षता में हुई। शहीदो के मजारो पर लगेंगे हर वर्ष मेले वतन पे मरने वालो के यही बाकी निशा होगें इस बात की गवाह वीर सपूत सरदार भगत सिंह को रात ही में सतलज नदी के किनारा मोहिबाने वतन के लिए तीर्थ स्थल बन गया। सरदार भगत सिंह ने का0 लेनिन की इस बात को अपने जेहन में बसा लिया था का0 लेनिन ने कहा था इंसान को एक ही जिंदगी रहने को मिलती है। वह इस तरह जिये कि मरते वक्त मन में यह अफसोस न पैदा हो कि मैंने जिदंगी का मतलब व मकसद बेकार खो दिया। सरदार भगत सिंह 14 साल की उमर में सरकारी स्कूलो की किताबो और विदेशी कपड़ो की होली जलायी थी 1921 में चौरी चौरा काण्ड में थानेदार और सत्यग्रह सिपाहियो को मारे जाने की वारदात से मुताफक्कीर गॉधी जी ने अचानक सत्याग्रह वापिस ले लिया तब भगत सिंह गांधी जी को छोड़कर क्रान्तिकारी दर में शामिल हो गये। घर में जब उनके सगाई की तैयारी चल रही थी तब वह घर से फरार हुये और अपने वालिद किशन सिंह के नाम एक पत्र छोड़ दिया जिसमें लिखा था मेरी जिन्दगी का मकसद सिर्फ वतन के आजादी के लिये है इसलिए मेरी जिन्दगी में आराम और दुनिया की ख्वाहिश पाने का मकसद नही है। 18, अप्रैल 1929 को ब्रिटिश हिन्दुस्तान की मौजूदा एसम्बली के इजलास में पब्लिक सेफटी बिल पेश हो रहा था भगत सिंह बटुकेश्वर दत्त ने बम और लाल पर्चे फेंक कर बहरो को सुनाने के लिए ऊॅची आवाज में बड़ा धमाका कर दिया धमाके से इजलास नीले धूॅए से भर गया धमाका करने के बाद वह अपनी जगह से भागे नही अपने जगह पर खड़े रहे उन दोनो ने इन्कलाब जिन्दाबाद साम्राज्यवाद मुर्दाबाद के नारे लगाये ।बम फेंकने का मकसद पर्चे पर लिखा था हमारे क्रान्ती का मकसद हिन्दुस्तान की आजादी है। 23, मार्च 1931 को फांसी को चूम लिया। वामपंथी व समाजवादी लीडरो इस दिन को बड़े एहतराम के साथ मनाया है डॉ0 राम मनोहर लोहिया का जन्म दिन भी 23 मार्च है जिसे उन्होंने कभी नही मनाया आज के इस दौर में फिरका परस्त के इस ऑधी में सरदार भगत सिंह की जिन्दगी हमारे और देश दुनिया के लिए एक दर्शन है मार्च 1926 में लाहौर में नौजवान भारत सभा के मेम्बरो को हल्फ दिलाया की मुल्क के मुुफाद में धर्म जात-पात से ऊपर उठकर देशहित मे हमारे जीने का मकसद है। भगत सिंह के विचारो में मजहबी व जात-पात के नफरती दिवार को गिरा कर ही हम देश को तरक्की की राह पर ले जा सकते है। भगत सिंह के विचार को ही प्रजातान्त्रीक एवं सेकूलर भारत बनाये रखा जा सकता है। आज के दिन सभी वीर सपूतो को लाल सलाम। इस कार्यक्रम में का0 रूस्तम खान, का0 मेहताब आलम, का0 राम दरश मौर्या, का0 शम्स जहीर, का0 अनवार अन्सार, का0 प्रकाश चन्द्र श्रीवास्तव, का0 ताहीर हुसैन, का0 अमीन खान, का0 दामोदर त्रिपाठी, का0 असलम, का0 गंगा राम यादव, का0 ऐनूल हक, का0 सईद अन्सारी आदि लोग शामिल हुए।