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सत्यमेव टाइम्स में आपका स्वागत है   Exclusive रिपोर्ट -कुलदीप मिश्र संतकबीरनगर: तुरहा समाज के लोग भारत सरकार एवं उत्तर प्रदेश सरकार के शासनादेश, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान उत्तर प्रदेश एवं तहसीलदार खलीलाबाद द्वारा दिए गये सूचना में सुस्पष्ट रुप से लिखा है कि तुरहा जाति किसी भी सूची में सूचीबद्ध नहीं है। नगर पंचायत मगहर के विभिन्न मुहल्लों ने निवास करने वाले तुरहा समाज के सैकड़ों लोगों ने अपनी जाति तुरहा से फर्जी तुरैहा बनकर, जाति बदल कर तथ्यों को छिपाकर, राजस्वकर्मियों व तहसीलदार की मिलीभगत से अनुसूचित जाति का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर केन्द्र व प्रदेश सरकार द्वारा अनुसूचित जाति के लिए चलाये जा रहे विभिन्‍न योजनाओं का अवैध रुप से लाभ ले रहे हैं। जबकि तुरैहा जाति मगहर तो क्या पूरे जिले में कही भी निवास नहीं करती है। उत्तर प्रदेश सरकार के मझवार, कहार, कश्यप, केवट, मल्लाह, निषाद, कुम्हार, प्रजापति, धीवर, बिंद, भर, राजभर, धीमान, बाथम, तुरहा, गोडिया, मांझी और मछुआ हैं जातियों को 21 दिसंबर और 22 दिसंबर, 2016 एवं 24 जून, 2019 को अधिसूचना जारी कर अनुसूचित जाति में शामिल किया था जिसे माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने दिनाँक- 31-8-2022 को निरस्त कर दिया है।

अनुसूचित जाति के अधिकारों पर डाका डाल रहे है फर्जी अनुसूचित जाति के लोग

 

Exclusive

रिपोर्ट -कुलदीप मिश्र

संतकबीरनगर: तुरहा समाज के लोग भारत सरकार एवं उत्तर प्रदेश सरकार के शासनादेश, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान उत्तर प्रदेश एवं तहसीलदार खलीलाबाद द्वारा दिए गये सूचना में सुस्पष्ट रुप से लिखा है कि तुरहा जाति किसी भी सूची में सूचीबद्ध नहीं है। नगर पंचायत मगहर के विभिन्न मुहल्लों ने निवास करने वाले तुरहा समाज के सैकड़ों लोगों ने अपनी जाति तुरहा से फर्जी तुरैहा बनकर, जाति बदल कर तथ्यों को छिपाकर, राजस्वकर्मियों व तहसीलदार की मिलीभगत से अनुसूचित जाति का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर केन्द्र व प्रदेश सरकार द्वारा अनुसूचित जाति के लिए चलाये जा रहे विभिन्‍न योजनाओं का अवैध रुप से लाभ ले रहे हैं। जबकि तुरैहा जाति मगहर तो क्या पूरे जिले में कही भी निवास नहीं करती है। उत्तर प्रदेश सरकार के मझवार, कहार, कश्यप, केवट, मल्लाह, निषाद, कुम्हार, प्रजापति, धीवर, बिंद, भर, राजभर, धीमान, बाथम, तुरहा, गोडिया, मांझी और मछुआ हैं जातियों को 21 दिसंबर और 22 दिसंबर, 2016 एवं 24 जून, 2019 को अधिसूचना जारी कर अनुसूचित जाति में शामिल किया था जिसे माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने दिनाँक- 31-8-2022 को निरस्त कर दिया है।

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