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बगैर ऋण दिए ईएमआई काटना पड़ा भारी, एक लाख 10 हजार क्षतिपूर्ति का आदेश

  • ऋण धनराशि 6.43 लाख वापस लेकर जारी करें अदेयता प्रमाण पत्र
  • जिला उपभोक्ता आयोग ने सुनाया फैसला
    संतकबीरनगर : निजी कंपनी द्वारा रोजगार करने हेतु रुपए सात लाख का ऋण बगैर खाते में भेजे मासिक किस्त की धनराशि काटना महंगा पड़ गया। न्यायालय ने ब्रांच क्रेडिट मैनेजर समेत तीन लोगों को दोषी मानते हुए 60 दिनों के भीतर रुपए एक लाख 10 हजार क्षतिपूर्ति अदा करने का आदेश जारी किया है। मामला चोलामंडलम फाइनेंस कंपनी का है।
    मेंहदावल तहसील के अव्वल केवटलिया गांव निवासी अखिलेश कुमार ने अद्विक लीगल कंसल्टेंसी के माध्यम से न्यायालय में वाद दाखिल कर कहा कि वह दिव्यांग व्यक्ति हैं। उन्होंने रोजगार करने हेतु रुपए सात लाख ऋण लेने के लिए चोलामंडलम फाइनेंस कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि सत्यव्रत पांडेय तथा ऋण सलाहकार प्रतिनिधि ज्ञानदेव पांडेय से बात किया। कागजात तैयार कराने के नाम पर रुपए 27 हजार पांच सौ ले लिए। दो माह बीत जाने के बाद भी ऋण की रकम खाते में नही आई। शिकायत कर्ता का एक बचत खाता भारतीय स्टेट बैंक, शाखा मेंहदावल में था, जिसमें महज रुपए 12 हजार 40 था, बगैर ऋण की रकम दिए ही उक्त बचत खाते से ईएमआई की रकम कंपनी द्वारा काट लिया गया। इतना ही नही आगे की किस्त को बाउंस कराकर अतिरिक्त प्रभार जोड़ लिया गया तथा चार-पांच रिकवरी एजेंट किस्त जमा करने का दबाव बनाने लगे और अपशब्दों का प्रयोग करने लगे। कंपनी से शिकायत करने कोई सुनवाई नही हुई। दो माह बाद खाते में रुपए छह लाख 43 हजार 162 भेजा गया। उन्होंने ऋण लेने से मना कर दिया, बावजूद इसके उसी ऋण की धनराशि से मासिक किस्त की रकम काटते रहे।
    न्यायालय ने वाद को स्वीकार करते हुए उक्त ऋण धनराशि को वापस लेकर अदेयता प्रमाण पत्र जारी करने का आदेश दिया है। साथ ही क्षतिपूर्ति के रुप में रुपये एक लाख 10 हजार अतिरिक्त अदा करना होगा।

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