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लुप्तप्राय नदियों के पुनर्जीवन की महत्वपूर्ण परियोजना

यह निरीक्षण एक महत्वपूर्ण परियोजना के तहत किया गया है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक जिले में लुप्तप्राय नदियों को पुनर्जीवित करने का कार्य किया जाना है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी ने केवनइया नदी की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया।

केवनइया नदी का भौगोलिक महत्व

केवनइया नदी सिसवा ग्राम के ढढ़वा ताल से निकलती है और तहसील क्षेत्र के एक अन्य महत्वपूर्ण ताल, जिगिना ताल को कुवानो नदी से जोड़ती है। ढढ़वा ताल कभी घाघरा नदी की गोखुर झील के रूप में जाना जाता था और वर्तमान में भी लगभग 5-6 किमी की लंबाई में विस्तृत एक वेटलैंड के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है। इसी प्रकार, जिगिना ताल भी एक महत्वपूर्ण जल भंडार है। केवनइया नदी इन दोनों महत्वपूर्ण तालों के लिए एक "वाल्व" का कार्य करती है, जो अतिरिक्त पानी को कुवानो नदी में प्रवाहित करके इन तालों के किनारे स्थित ग्रामों को सुरक्षित रखने में सहायक होती है।

जनोपयोगी बनाने के लिए तकनीकी परीक्षण के निर्देश

जिलाधिकारी ने निरीक्षण के दौरान उपस्थित अधिकारियों को निर्देश दिया कि विभिन्न तकनीकी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए यह परीक्षण किया जाए कि इस प्राचीन नदी को किस प्रकार अधिक सुरक्षित और जनोपयोगी बनाया जा सकता है। यह नदी तहसील क्षेत्र में ही प्रवाहित होती है और 18 राजस्व ग्रामों से होते हुए लगभग 18 किमी दूर ग्राम गाई बसंतपुर में कुवानो नदी में मिल जाती है।

उपस्थित अधिकारीगण

इस अवसर पर डीसी मनरेगा प्रभात द्विवेदी, उप जिलाधिकारी धनघटा डॉ. सुनील कुमार, तहसीलदार योगेंद्र कुमार पांडे, नायब तहसीलदार हरेराम यादव सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

DM ने केवनइया नदी का किया स्थलीय निरीक्षण, पुनरुद्धार के दिए निर्देश

लुप्तप्राय नदियों के पुनर्जीवन की महत्वपूर्ण परियोजना

यह निरीक्षण एक महत्वपूर्ण परियोजना के तहत किया गया है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक जिले में लुप्तप्राय नदियों को पुनर्जीवित करने का कार्य किया जाना है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी ने केवनइया नदी की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया।

केवनइया नदी का भौगोलिक महत्व

केवनइया नदी सिसवा ग्राम के ढढ़वा ताल से निकलती है और तहसील क्षेत्र के एक अन्य महत्वपूर्ण ताल, जिगिना ताल को कुवानो नदी से जोड़ती है। ढढ़वा ताल कभी घाघरा नदी की गोखुर झील के रूप में जाना जाता था और वर्तमान में भी लगभग 5-6 किमी की लंबाई में विस्तृत एक वेटलैंड के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है। इसी प्रकार, जिगिना ताल भी एक महत्वपूर्ण जल भंडार है। केवनइया नदी इन दोनों महत्वपूर्ण तालों के लिए एक “वाल्व” का कार्य करती है, जो अतिरिक्त पानी को कुवानो नदी में प्रवाहित करके इन तालों के किनारे स्थित ग्रामों को सुरक्षित रखने में सहायक होती है।

जनोपयोगी बनाने के लिए तकनीकी परीक्षण के निर्देश

जिलाधिकारी ने निरीक्षण के दौरान उपस्थित अधिकारियों को निर्देश दिया कि विभिन्न तकनीकी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए यह परीक्षण किया जाए कि इस प्राचीन नदी को किस प्रकार अधिक सुरक्षित और जनोपयोगी बनाया जा सकता है। यह नदी तहसील क्षेत्र में ही प्रवाहित होती है और 18 राजस्व ग्रामों से होते हुए लगभग 18 किमी दूर ग्राम गाई बसंतपुर में कुवानो नदी में मिल जाती है।

उपस्थित अधिकारीगण

इस अवसर पर डीसी मनरेगा प्रभात द्विवेदी, उप जिलाधिकारी धनघटा डॉ. सुनील कुमार, तहसीलदार योगेंद्र कुमार पांडे, नायब तहसीलदार हरेराम यादव सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

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