
मनरेगा उपायुक्त द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, एमआईएस रिपोर्ट में ग्राम पंचायत अतरौलिया उर्फ मठिया में कुल तीन परियोजनाओं का उल्लेख था। इनमें ध्रुपचंद के खेत से सुनील के खेत तक कुआनो नदी के किनारे रिंगबांध निर्माण, बिदेशी के खेत से वैभव के खेत तक कुआनो नदी के किनारे रिंगबांध निर्माण मिट्टी कार्य, और धीरज के खेत से नाले तक चकरोड पर मिट्टी कार्य शामिल थे। इन तीनों परियोजनाओं पर कुल 230 श्रमिक नियोजित बताए गए थे और 30 जून 2025 को एनएमएमएस ऐप के माध्यम से 228 श्रमिकों की ऑनलाइन उपस्थिति भी दर्ज की गई थी।
हालांकि, जिलाधिकारी के स्थलीय निरीक्षण में स्थिति कुछ और ही निकली। उन्हें इन तीनों परियोजनाओं पर दर्ज श्रमिकों की उपस्थिति के सापेक्ष बेहद कम काम मिला, जिस पर उन्होंने गहरा असंतोष व्यक्त किया। सबसे चिंताजनक बात यह थी कि ये तीनों परियोजनाएं कुआनो नदी के बिल्कुल पास स्थित थीं, जिससे उनके औचित्य और उपयोगिता पर ही सवाल खड़े हो गए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए, जिलाधिकारी आलोक कुमार ने संबंधित ग्राम पंचायत सचिव, ग्राम प्रधान, तकनीकी सहायक और ग्राम रोजगार सेवक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, उन्होंने इन तीनों परियोजनाओं को ‘श्रमदान’ घोषित करने का भी आदेश दिया है, जिसका अर्थ है कि इन पर किया गया कार्य अब सार्वजनिक हित में निःशुल्क माना जाएगा। यह कार्रवाई मनरेगा कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।