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सत्यमेव टाइम्स में आपका स्वागत है   संतकबीरनगर – पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने आज एच.आर. इंटर कॉलेज खलीलाबाद में छात्रों को साइबर अपराध और विशेष रूप से डिजिटल अरेस्ट के संबंध में जागरूक किया। उन्होंने छात्रों को विभिन्न प्रकार के ऑनलाइन धोखाधड़ी और उनसे बचने के तरीकों के बारे में विस्तार से बताया। SP ने छात्रों को संबोधित करते हुए डिजिटल अरेस्ट को एक गंभीर ऑनलाइन धोखाधड़ी बताया। उन्होंने समझाया कि इसमें साइबर अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, जज, कस्टम, इनकम टैक्स या किसी अन्य सरकारी अधिकारी के रूप में प्रस्तुत कर वीडियो कॉल या अन्य डिजिटल माध्यमों से लोगों को डराते-धमकाते हैं। पुलिस अधीक्षक ने डिजिटल अरेस्ट से बचने के लिए छात्रों को महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जिसमें किसी भी प्रकार का ओटीपी, बैंक डिटेल या पर्सनल जानकारी किसी के साथ साझा न करने पर जोर दिया गया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने छात्रों को विभिन्न अन्य साइबर धोखाधड़ी जैसे कि वॉयस क्लोनिंग एआई वॉयस स्कैम, फिशिंग डेटिंग एप से संबंधित धोखाधड़ी,क्यूआर (QR) कोड स्कैम,एटीएम बैंकिंग फ्रॉड,ऑनलाइन ट्रेनिंग स्कैम,फर्जी मुनाफे का झांसा,फर्जी फेसबुक आईडी,न्यूड वीडियो कॉल फ्रॉड,वर्क फ्रॉम होम स्कैम,सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से दोस्ती से बचाव, एटीएम कार्ड क्लोनिंग,गूगल पर फर्जी कस्टमर केयर नंबर,ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड,केवाईसी (KYC) अपडेट फ्रॉड,फर्जी मोबाइल एप फ्रॉड से भी सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि किसी भी साइबर धोखाधड़ी का शिकार होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। इस जागरूकता कार्यक्रम के दौरान साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक आलोक सोनी, उपनिरीक्षक जयप्रकाश यादव, कांस्टेबल रामप्रवेश मद्धेशिया, महिला कांस्टेबल अमृता सिंह सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारीगण उपस्थित रहे। इस पहल का उद्देश्य युवा पीढ़ी को साइबर खतरों से बचाना और उन्हें सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार के लिए शिक्षित करना था।

SP ने छात्रों को साइबर अपराध के प्रति किया जागरूक: डिजिटल अरेस्ट से बचाव के दिए महत्वपूर्ण सुझाव

 

संतकबीरनगर – पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने आज एच.आर. इंटर कॉलेज खलीलाबाद में छात्रों को साइबर अपराध और विशेष रूप से डिजिटल अरेस्ट के संबंध में जागरूक किया। उन्होंने छात्रों को विभिन्न प्रकार के ऑनलाइन धोखाधड़ी और उनसे बचने के तरीकों के बारे में विस्तार से बताया।
SP ने छात्रों को संबोधित करते हुए डिजिटल अरेस्ट को एक गंभीर ऑनलाइन धोखाधड़ी बताया। उन्होंने समझाया कि इसमें साइबर अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, जज, कस्टम, इनकम टैक्स या किसी अन्य सरकारी अधिकारी के रूप में प्रस्तुत कर वीडियो कॉल या अन्य डिजिटल माध्यमों से लोगों को डराते-धमकाते हैं।

पुलिस अधीक्षक ने डिजिटल अरेस्ट से बचने के लिए छात्रों को महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जिसमें किसी भी प्रकार का ओटीपी, बैंक डिटेल या पर्सनल जानकारी किसी के साथ साझा न करने पर जोर दिया गया।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने छात्रों को विभिन्न अन्य साइबर धोखाधड़ी जैसे कि वॉयस क्लोनिंग एआई वॉयस स्कैम, फिशिंग डेटिंग एप से संबंधित धोखाधड़ी,क्यूआर (QR) कोड स्कैम,एटीएम बैंकिंग फ्रॉड,ऑनलाइन ट्रेनिंग स्कैम,फर्जी मुनाफे का झांसा,फर्जी फेसबुक आईडी,न्यूड वीडियो कॉल फ्रॉड,वर्क फ्रॉम होम स्कैम,सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से दोस्ती से बचाव, एटीएम कार्ड क्लोनिंग,गूगल पर फर्जी कस्टमर केयर नंबर,ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड,केवाईसी (KYC) अपडेट फ्रॉड,फर्जी मोबाइल एप फ्रॉड
से भी सतर्क रहने की सलाह दी।
उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि किसी भी साइबर धोखाधड़ी का शिकार होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।
इस जागरूकता कार्यक्रम के दौरान साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक आलोक सोनी, उपनिरीक्षक जयप्रकाश यादव, कांस्टेबल रामप्रवेश मद्धेशिया, महिला कांस्टेबल अमृता सिंह सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारीगण उपस्थित रहे। इस पहल का उद्देश्य युवा पीढ़ी को साइबर खतरों से बचाना और उन्हें सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार के लिए शिक्षित करना था।

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