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सत्यमेव टाइम्स में आपका स्वागत है संतकबीरनगर जिले में जिला अस्पताल की लॉन्ड्री और साफ-सफाई के टेंडर आवंटन में धांधली का आरोप लगाते हुए शिकायतकर्ता रामचंद्र चौधरी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि पसंदीदा फर्म को नियम-कानूनों को ताक पर रखकर टेंडर दिया गया है, और अब जिम्मेदार अधिकारी जांच में लीपापोती कर CMO को क्लीनचिट देने की कोशिश कर रहे हैं। हैरत की बात यह है कि इस मामले में अभी तक जांच पूरी नहीं हो पाई है। क्या है मामला? यह पूरा मामला जिला अस्पताल में लॉन्ड्री और साफ-सफाई सेवाओं के लिए जारी किए गए टेंडर से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा और CMO ने अपने चहेते फर्म को अनुचित तरीके से टेंडर आवंटित कर दिया। आरोप है कि इस आवंटन में निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया गया है। जांच में देरी और लीपापोती के आरोप शिकायतकर्ता ने बताया कि इस मामले की जांच अभी तक पूरी नहीं हुई है, जिससे संदेह गहरा रहा है। उनका कहना है कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले को दबाने और CMO को सभी आरोपों से बरी करने की कोशिश में लगे हुए हैं। यह आरोप तब और गंभीर हो जाते हैं जब सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े टेंडर में ऐसे वित्तीय अनियमितताओं के दावे सामने आते हैं। शिकायतकर्ता की मांग शिकायतकर्ता रामचंद्र चौधरी ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि वास्तव में नियमों का उल्लंघन हुआ है और किसी पसंदीदा फर्म को लाभ पहुंचाया गया है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जांच में किसी भी तरह की लीपापोती से जनता का विश्वास सरकारी तंत्र से उठ जाएगा। यह देखना होगा कि इस मामले की जांच कब तक पूरी होती है और क्या आरोपों में कोई सच्चाई निकलकर सामने आती है। जिले में इस मुद्दे को लेकर चर्चा गर्म है और लोग निष्पक्ष जांच के परिणामों का इंतजार कर रहे हैं।

लॉन्ड्री और साफ-सफाई टेंडर में धांधली का आरोप, जांचकर्ताओं पर CMO को क्लीनचिट देने के प्रयास का आरोप

संतकबीरनगर जिले में जिला अस्पताल की लॉन्ड्री और साफ-सफाई के टेंडर आवंटन में धांधली का आरोप लगाते हुए शिकायतकर्ता रामचंद्र चौधरी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि पसंदीदा फर्म को नियम-कानूनों को ताक पर रखकर टेंडर दिया गया है, और अब जिम्मेदार अधिकारी जांच में लीपापोती कर CMO को क्लीनचिट देने की कोशिश कर रहे हैं। हैरत की बात यह है कि इस मामले में अभी तक जांच पूरी नहीं हो पाई है।

क्या है मामला?

यह पूरा मामला जिला अस्पताल में लॉन्ड्री और साफ-सफाई सेवाओं के लिए जारी किए गए टेंडर से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा और CMO ने अपने चहेते फर्म को अनुचित तरीके से टेंडर आवंटित कर दिया। आरोप है कि इस आवंटन में निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन किया गया है।

जांच में देरी और लीपापोती के आरोप

शिकायतकर्ता ने बताया कि इस मामले की जांच अभी तक पूरी नहीं हुई है, जिससे संदेह गहरा रहा है। उनका कहना है कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले को दबाने और CMO को सभी आरोपों से बरी करने की कोशिश में लगे हुए हैं। यह आरोप तब और गंभीर हो जाते हैं जब सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े टेंडर में ऐसे वित्तीय अनियमितताओं के दावे सामने आते हैं।

शिकायतकर्ता की मांग

शिकायतकर्ता रामचंद्र चौधरी ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि वास्तव में नियमों का उल्लंघन हुआ है और किसी पसंदीदा फर्म को लाभ पहुंचाया गया है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जांच में किसी भी तरह की लीपापोती से जनता का विश्वास सरकारी तंत्र से उठ जाएगा।
यह देखना होगा कि इस मामले की जांच कब तक पूरी होती है और क्या आरोपों में कोई सच्चाई निकलकर सामने आती है। जिले में इस मुद्दे को लेकर चर्चा गर्म है और लोग निष्पक्ष जांच के परिणामों का इंतजार कर रहे हैं।

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