(चित्र परिचय अब्दुल अजीम)…..बसपा की राजनीति और अब निषाद पार्टी से जुड़ी तस्वीरें कुछ तो बता ही रही होंगी…..पब्लिक समझे,हमको क्या? कोई हो राजा हमें का हानि………!!!
कभी पार्टी के लिए दिन रात एक करने वाले एक मुस्लिम नौजवान की राजनीति हाशिए पर है। वजह बना पार्टी का वो अल्टीमेटम जिसमें शीर्ष नेतृत्व ने उस नौजवान को अब पार्टी का नेता कार्यकर्ता बताना बंद कर दिया। पार्टी ने उसे दल का माना ही नहीं! ऐसा उस के साथ क्यों हुआ यहां वो लिखने पढ़ने की नहीं बस समझने की जरूरत है। “बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना”… यह कहावत तो आपने सुनी होगी, लेकिन इसका एक जीता-जागता उदाहरण संतकबीरनगर जिले में देखने को मिला है। किरदार के रूप में हैं अब्दुल अज़ीम जिनको बीते दिनों गोली लगी, वह अस्पताल पहुंचे और खुद को निषाद पार्टी का प्रदेश सचिव बता दिया। बस फिर क्या था! पार्टी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर साफ कर दिया कि उनका अब्दुल अज़ीम से दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं है! राजनीति की दुनिया भी अजीब है। जब तक सब ठीक चल रहा हो, लोग हाथ-पांव जोड़कर कहते हैं, “हमारे अपने हैं”। लेकिन जैसे ही कोई मुसीबत आती है, तो झट से पल्ला झाड़ लेते हैं। बेचारे अब्दुल अज़ीम, जो कभी बसपा के खास हुआ करते थे और अब निषाद पार्टी के साथ दिखते थे, उन्हें गोली लगी तो पार्टी ने उन्हें पहचानने से ही इनकार कर दिया।
पार्टी के जनसंपर्क अधिकारी राजीव यादव ने बताया कि “कई लोग तो ऐसे ही अपना पद बता देते हैं।” भई, ये तो वही बात हुई कि किसी को चोट लगे और घरवाले कह दें, “यह तो हमारे परिवार का है ही नहीं, बस कभी-कभी खाने आ जाता था।” अब्दुल अज़ीम के साथ भी यही हुआ। वह पार्टी के अध्यक्ष और उनके बेटे के साथ लगातार दिखते रहे, लेकिन गोली लगने के बाद अचानक से ‘अज्ञात’ हो गए।ख़ैर, अब तो हमें अब्दुल अज़ीम के बयान का इंतज़ार है, ताकि पता चले कि यह निषाद पार्टी उनका परित्याग क्यों की है? ऐसी वाली स्थिति क्यों आई? जब तक अब्दुल अजीम का पक्ष सामने नहीं आता तब तक राजनीति में मिली इस बेरुखी का कारण क्या रहा?

