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सत्यमेव टाइम्स में आपका स्वागत है संतकबीरनगर जिले के वरिष्ठ सपा नेता सुनील सिंह अब अभिभावकों के हक में उतर निजी स्कूलों के खिलाफ आर पार की लड़ाई में जुट गए हैं। निजी स्कूलों द्वारा हर साल ली जाने वाली 'एडमिशन फीस', बार-बार यूनिफॉर्म बदलना और महंगी किताबें-कॉपियां थोपना अब आम बात हो गई है। शिक्षा को व्यापार बना चुके इन स्कूलों की मनमानी से अभिभावकों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। जिसको लेकर सपा नेता सुनील सिंह ने अपनी शिकायत दर्ज कराते हुए शिक्षा विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।सपा नेता सुनील सिंह ने अपनी शिकायत में कहा है कि कई निजी स्कूल शिक्षा को सेवा की जगह मुनाफा कमाने का जरिया बना चुके हैं। इन स्कूलों की अनियमितताओं से मजदूर वर्ग और आम परिवार बुरी तरह परेशान हैं।इन निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ सुनील सिंह ने कहा कि हर साल दोबारा एडमिशन फीस: स्कूल प्रबंधन हर साल पुराने छात्रों से भी दोबारा 'एडमिशन फीस' वसूलता है, जो पूरी तरह से अनुचित है। सपा नेता सुनील सिंह ने कहा कि अभिभावकों को खास दुकानों से ही जूते, ड्रेस और मोजे खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है, जहां ये चीजें मनमाने दाम पर बेची जाती है। हर साल यूनिफॉर्म बदल दी जाती है, जिससे अभिभावकों को बेवजह नई ड्रेस खरीदनी पड़ती है, हर साल किताबें भी बदल दी जाती हैं और उनकी कीमतें बहुत ज्यादा होती हैं। कॉपियों और किताबों का कोई मानक मूल्य तय नहीं है, और स्कूल अपनी मनमानी से इन्हें महंगे दामों पर बिकवाते हैं।स्थानीय अफसर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से लेकर शासन के जिम्मेदारों और मुख्यमंत्री को पत्र लिखने वाले सपा नेता सुनील सिंह ने अपनी शिकायत में मांग की है कि किताबों और कॉपियों के दाम का एक सरकारी मानक तय किया जाए और यूनिफॉर्म कम से कम पांच साल तक न बदली जाए। उन्होंने शिक्षा विभाग से इस मामले में तुरंत जांच और कठोर कार्रवाई करने का आग्रह किया है ताकि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आए और अभिभावकों को राहत मिले।

निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ उतरे सपा नेता सुनील सिंह, जिम्मेदारों को लिखा पत्र 

संतकबीरनगर जिले के वरिष्ठ सपा नेता सुनील सिंह अब अभिभावकों के हक में उतर निजी स्कूलों के खिलाफ आर पार की लड़ाई में जुट गए हैं। निजी स्कूलों द्वारा हर साल ली जाने वाली ‘एडमिशन फीस’, बार-बार यूनिफॉर्म बदलना और महंगी किताबें-कॉपियां थोपना अब आम बात हो गई है। शिक्षा को व्यापार बना चुके इन स्कूलों की मनमानी से अभिभावकों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। जिसको लेकर सपा नेता सुनील सिंह ने अपनी शिकायत दर्ज कराते हुए शिक्षा विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।सपा नेता सुनील सिंह ने अपनी शिकायत में कहा है कि कई निजी स्कूल शिक्षा को सेवा की जगह मुनाफा कमाने का जरिया बना चुके हैं। इन स्कूलों की अनियमितताओं से मजदूर वर्ग और आम परिवार बुरी तरह परेशान हैं।इन निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ सुनील सिंह ने कहा कि हर साल दोबारा एडमिशन फीस: स्कूल प्रबंधन हर साल पुराने छात्रों से भी दोबारा ‘एडमिशन फीस’ वसूलता है, जो पूरी तरह से अनुचित है। सपा नेता सुनील सिंह ने कहा कि अभिभावकों को खास दुकानों से ही जूते, ड्रेस और मोजे खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है, जहां ये चीजें मनमाने दाम पर बेची जाती है। हर साल यूनिफॉर्म बदल दी जाती है, जिससे अभिभावकों को बेवजह नई ड्रेस खरीदनी पड़ती है, हर साल किताबें भी बदल दी जाती हैं और उनकी कीमतें बहुत ज्यादा होती हैं। कॉपियों और किताबों का कोई मानक मूल्य तय नहीं है, और स्कूल अपनी मनमानी से इन्हें महंगे दामों पर बिकवाते हैं।स्थानीय अफसर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से लेकर शासन के जिम्मेदारों और मुख्यमंत्री को पत्र लिखने वाले सपा नेता सुनील सिंह ने अपनी शिकायत में मांग की है कि किताबों और कॉपियों के दाम का एक सरकारी मानक तय किया जाए और यूनिफॉर्म कम से कम पांच साल तक न बदली जाए। उन्होंने शिक्षा विभाग से इस मामले में तुरंत जांच और कठोर कार्रवाई करने का आग्रह किया है ताकि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आए और अभिभावकों को राहत मिले।

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