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गोपाल एग्रो इंडस्ट्रीज में लिखा गया युवा स्वावलंबन का नया अध्याय........
कृषि वैज्ञानिक श्री नारायण सिंह कौशिक ने सिखाए एग्रो-वेस्ट इंडस्ट्री के गुर।
खेती-किसानी अब सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह एक बड़ा उद्योग बन चुकी है। इसी विजन को साकार करने के लिए संतकबीरनगर के खलीलाबाद स्थित गोपाल एग्रो इंडस्ट्रीज में एक महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हुआ। जहां सुल्तानपुर जिले के श्री विश्वनाथ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट के 125 कृषि स्नातकों ने यहाँ 15 दिनों तक मॉडर्न एग्रो इंडस्ट्री की बारीकियां सीखीं। कृषि वैज्ञानिक और उद्योगपति श्री नारायण सिंह "कौशिक" के कुशल मार्गदर्शन में छात्रों ने सीखा कि कैसे कृषि अवशेषों (एग्रो-वेस्ट) का प्रबंधन कर उनसे सूक्ष्म पोषक तत्व, जैविक खाद, पशु आहार और वर्मी कम्पोस्ट जैसे बहुमूल्य उत्पाद तैयार किए जाते हैं।
सत्यमेव टाइम्स के कैमरे में कैद ये तस्वीरें खलीलाबाद के औद्योगिक क्षेत्र स्थित गोपाल एग्रो इंडस्ट्रीज की है जहां पर इन दिनों भविष्य के कृषि वैज्ञानिकों और उद्यमियों की पौध तैयार की जा रही है। 11 जनवरी से शुरू हुआ यह 15 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर गणतंत्र दिवस के दिन एक भव्य प्रमाण पत्र वितरण समारोह के साथ संपन्न हुआ।
इस ट्रेनिंग का नेतृत्व कृषि वैज्ञानिक और गोपाल एग्रो इंडस्ट्रीज के संचालक श्री नारायण सिंह कौशिक ने किया। उन्होंने छात्रों को किताबी ज्ञान से आगे ले जाकर उद्योगों की व्यावहारिक दुनिया से रूबरू कराया। प्रशिक्षण के दौरान छात्रों ने सीखा कि कैसे सूक्ष्म पोषक तत्व, जैविक खाद, पशु आहार और वर्मी कम्पोस्ट का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाता है। श्री कौशिक ने छात्रों को गुरुमंत्र देते हुए बताया कि एक सफल एग्रो-इंडस्ट्री के लिए सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि सही स्थल का चयन, मार्केटिंग की समझ और मशीनों का सही ज्ञान होना अनिवार्य है।
इस दौरान श्री नारायन सिंह कौशिक ने कहा कि कृषि स्नातक अब नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनेंगे। जब युवा खेती को इंडस्ट्री का रूप देंगे, तभी राष्ट्र निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित होगी। श्री कौशिक ने छात्रों को उद्योग स्थापना के 'पंचतत्व' समझाए। उन्होंने विस्तार से प्रकाश डाला कि किसी भी इकाई को खड़ा करने से पूर्व उत्पाद की मार्केटिंग क्षमता, कच्चे माल की निरंतरता, भूमि नियमों की जटिलता और मशीनों के तकनीकी चयन का बारीकी से अध्ययन करना कितना अनिवार्य है। उन्होंने छात्रों को यह विश्वास दिलाया कि आधुनिक तकनीक और उद्योग आधारित सोच अपनाकर वे न केवल स्वयं का भविष्य संवार सकते हैं, बल्कि खेती को इंडस्ट्रियल स्वरूप देकर रोजगार के नए द्वार भी खोल सकते हैं।
कार्यक्रम के समापन पर मुख्य अतिथि अनिल मोहन श्रीवास्तव और संस्थान के विभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष सिंह की उपस्थिति में मेधावी छात्रों को प्रमाण पत्र बांटे गए। इस अवसर पर वक्ताओं ने सरकार से मांग की कि जिस तरह कृषि में यह ट्रेनिंग अनिवार्य है, वैसे ही अन्य प्रोफेशनल कोर्सेज में भी इसे लागू किया जाए ताकि देश का युवा आत्मनिर्भर बन सके।

125 कृषि छात्रों ने गोपाल एग्रो इंडस्ट्रीज में लिया 15 दिनों का विशेष प्रशिक्षण

गोपाल एग्रो इंडस्ट्रीज में लिखा गया युवा स्वावलंबन का नया अध्याय……..
कृषि वैज्ञानिक श्री नारायण सिंह कौशिक ने सिखाए एग्रो-वेस्ट इंडस्ट्री के गुर।
खेती-किसानी अब सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह एक बड़ा उद्योग बन चुकी है। इसी विजन को साकार करने के लिए संतकबीरनगर के खलीलाबाद स्थित गोपाल एग्रो इंडस्ट्रीज में एक महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हुआ। जहां सुल्तानपुर जिले के श्री विश्वनाथ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट के 125 कृषि स्नातकों ने यहाँ 15 दिनों तक मॉडर्न एग्रो इंडस्ट्री की बारीकियां सीखीं। कृषि वैज्ञानिक और उद्योगपति श्री नारायण सिंह “कौशिक” के कुशल मार्गदर्शन में छात्रों ने सीखा कि कैसे कृषि अवशेषों (एग्रो-वेस्ट) का प्रबंधन कर उनसे सूक्ष्म पोषक तत्व, जैविक खाद, पशु आहार और वर्मी कम्पोस्ट जैसे बहुमूल्य उत्पाद तैयार किए जाते हैं।
सत्यमेव टाइम्स के कैमरे में कैद ये तस्वीरें खलीलाबाद के औद्योगिक क्षेत्र स्थित गोपाल एग्रो इंडस्ट्रीज की है जहां पर इन दिनों भविष्य के कृषि वैज्ञानिकों और उद्यमियों की पौध तैयार की जा रही है। 11 जनवरी से शुरू हुआ यह 15 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर गणतंत्र दिवस के दिन एक भव्य प्रमाण पत्र वितरण समारोह के साथ संपन्न हुआ।
इस ट्रेनिंग का नेतृत्व कृषि वैज्ञानिक और गोपाल एग्रो इंडस्ट्रीज के संचालक श्री नारायण सिंह कौशिक ने किया। उन्होंने छात्रों को किताबी ज्ञान से आगे ले जाकर उद्योगों की व्यावहारिक दुनिया से रूबरू कराया। प्रशिक्षण के दौरान छात्रों ने सीखा कि कैसे सूक्ष्म पोषक तत्व, जैविक खाद, पशु आहार और वर्मी कम्पोस्ट का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाता है। श्री कौशिक ने छात्रों को गुरुमंत्र देते हुए बताया कि एक सफल एग्रो-इंडस्ट्री के लिए सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि सही स्थल का चयन, मार्केटिंग की समझ और मशीनों का सही ज्ञान होना अनिवार्य है।
इस दौरान श्री नारायन सिंह कौशिक ने कहा कि कृषि स्नातक अब नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनेंगे। जब युवा खेती को इंडस्ट्री का रूप देंगे, तभी राष्ट्र निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित होगी। श्री कौशिक ने छात्रों को उद्योग स्थापना के ‘पंचतत्व’ समझाए। उन्होंने विस्तार से प्रकाश डाला कि किसी भी इकाई को खड़ा करने से पूर्व उत्पाद की मार्केटिंग क्षमता, कच्चे माल की निरंतरता, भूमि नियमों की जटिलता और मशीनों के तकनीकी चयन का बारीकी से अध्ययन करना कितना अनिवार्य है। उन्होंने छात्रों को यह विश्वास दिलाया कि आधुनिक तकनीक और उद्योग आधारित सोच अपनाकर वे न केवल स्वयं का भविष्य संवार सकते हैं, बल्कि खेती को इंडस्ट्रियल स्वरूप देकर रोजगार के नए द्वार भी खोल सकते हैं।
कार्यक्रम के समापन पर मुख्य अतिथि अनिल मोहन श्रीवास्तव और संस्थान के विभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष सिंह की उपस्थिति में मेधावी छात्रों को प्रमाण पत्र बांटे गए। इस अवसर पर वक्ताओं ने सरकार से मांग की कि जिस तरह कृषि में यह ट्रेनिंग अनिवार्य है, वैसे ही अन्य प्रोफेशनल कोर्सेज में भी इसे लागू किया जाए ताकि देश का युवा आत्मनिर्भर बन सके।

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