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सत्यमेव टाइम्स में आपका स्वागत है लखनऊ। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने अदालती आदेश की अवहेलना को गंभीरता से लेते हुए बस्ती मंडल के कमिश्नर और एक तीन सदस्यीय जांच समिति के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय ने विनोद प्रताप सिंह द्वारा दायर अवमानना याचिका संख्या 1045/2026 पर सुनवाई करते हुए इसे प्रथम दृष्टया न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन माना है। मामला वर्ष 2008 के एक पुराने आदेश से जुड़ा है, जिसे हाईकोर्ट ने 19 नवंबर 2025 को रिट याचिका संख्या 10758/2025 के माध्यम से निरस्त कर दिया था। उस पुराने आदेश में जिला मजिस्ट्रेट, संत कबीर नगर ने निर्देश दिया था कि उनके अनुमोदन के बिना आवेदक विनोद प्रताप सिंह की किसी भी शिकायत पर जांच न की जाए। आवेदक के अधिवक्ता मनोज कुमार गुप्ता और राजेश कुमार शुक्ला ने न्यायालय को बताया कि हाईकोर्ट द्वारा उक्त प्रतिबंधात्मक आदेश को रद्द किए जाने के बावजूद, बस्ती मंडल के अधिकारियों ने लोकायुक्त के समक्ष लंबित एक शिकायत पर जांच आगे बढ़ाने से मना कर दिया। वित्त एवं लेखा अधिकारी (बेसिक शिक्षा), अधिशासी अभियंता (पी.डब्ल्यू.डी.) और अपर जिला मजिस्ट्रेट (वित्त एवं राजस्व) की समिति ने 24 दिसंबर 2025 की अपनी रिपोर्ट में उसी निरस्त हो चुके 2008 के आदेश का हवाला दिया है। न्यायालय ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि कमिश्नर, बस्ती को हाईकोर्ट के आदेश की जानकारी थी, फिर भी निर्देशों की अनदेखी की गई। अदालत ने अब विद्वान स्थायी अधिवक्ता को निर्देश प्राप्त करने को कहा है कि क्या समिति के सदस्यों को आदेश रद्द होने की जानकारी थी और इसके बावजूद उन्होंने जानबूझकर पुराने आदेश का पालन क्यों किया। मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल, 2026 को तय की गई है।

हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ सख्त: आदेश के बावजूद जांच से इनकार पर बस्ती कमिश्नर और समिति से जवाब तलब

लखनऊ। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने अदालती आदेश की अवहेलना को गंभीरता से लेते हुए बस्ती मंडल के कमिश्नर और एक तीन सदस्यीय जांच समिति के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय ने विनोद प्रताप सिंह द्वारा दायर अवमानना याचिका संख्या 1045/2026 पर सुनवाई करते हुए इसे प्रथम दृष्टया न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन माना है। मामला वर्ष 2008 के एक पुराने आदेश से जुड़ा है, जिसे हाईकोर्ट ने 19 नवंबर 2025 को रिट याचिका संख्या 10758/2025 के माध्यम से निरस्त कर दिया था। उस पुराने आदेश में जिला मजिस्ट्रेट, संत कबीर नगर ने निर्देश दिया था कि उनके अनुमोदन के बिना आवेदक विनोद प्रताप सिंह की किसी भी शिकायत पर जांच न की जाए।
आवेदक के अधिवक्ता मनोज कुमार गुप्ता और राजेश कुमार शुक्ला ने न्यायालय को बताया कि हाईकोर्ट द्वारा उक्त प्रतिबंधात्मक आदेश को रद्द किए जाने के बावजूद, बस्ती मंडल के अधिकारियों ने लोकायुक्त के समक्ष लंबित एक शिकायत पर जांच आगे बढ़ाने से मना कर दिया। वित्त एवं लेखा अधिकारी (बेसिक शिक्षा), अधिशासी अभियंता (पी.डब्ल्यू.डी.) और अपर जिला मजिस्ट्रेट (वित्त एवं राजस्व) की समिति ने 24 दिसंबर 2025 की अपनी रिपोर्ट में उसी निरस्त हो चुके 2008 के आदेश का हवाला दिया है। न्यायालय ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि कमिश्नर, बस्ती को हाईकोर्ट के आदेश की जानकारी थी, फिर भी निर्देशों की अनदेखी की गई। अदालत ने अब विद्वान स्थायी अधिवक्ता को निर्देश प्राप्त करने को कहा है कि क्या समिति के सदस्यों को आदेश रद्द होने की जानकारी थी और इसके बावजूद उन्होंने जानबूझकर पुराने आदेश का पालन क्यों किया। मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल, 2026 को तय की गई है।

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