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सत्यमेव टाइम्स में आपका स्वागत है   ​बिना हलफनामे के नहीं मिलेगी बेल..... जिला जज का बड़ा आदेश, आपराधिक कुंडली छिपानी पड़ेगी भारी रिपोर्ट:कुलदीप मिश्र विधि संवाददाता ​संतकबीरनगर:सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद अब ज़मानत याचिकाओं को लेकर न्यायिक व्य वस्था में बड़ा और कड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जेबा खान बनाम उत्तर प्रदेश राज्य क्रिमिनल अपील सं.825/2026 मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 11 फरवरी 2026 को दिए गए ऐतिहासिक फैसले के अनुपालन में जनपद न्यायाधीश रणधीर सिंह ने 22 जुलाई 2026 को एक विस्तृत प्रशासनिक आदेश सं. 205/2026 जारी किया है। इस आदेश के तहत अब ज़मानत की अर्जी दाखिल करने वाले हर एक याचिकाकर्ता को अपनी पूरी आपराधिक कुंडली और केस का पाई- पाई हिसाब शपथ पत्र के साथ प्रस्तुत करना अनिवार्य कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि ज़मानत प्रक्रिया में एकरूपता पारदर्शिता और सत्यनिष्ठा बनाए रखने के लिए किसी भी तथ्य को छिपाना अपराध की श्रेणी में आएगा। इस नए नियम के तहत अब बेल एप्लीकेशन में एफआईआर संख्या तारीख संबंधित पुलिस स्टेशन जिला राज्य लागू धाराएं और उनमें मिलने वाली अधिकतम सजा का स्पष्ट ब्योरा देना होगा। इसके अलावा अभियुक्त की गिरफ्तारी की तारीख और अब तक काटी गई कुल हिरासत अवधि का सटीक ब्योरा देना अनिवार्य कर दिया गया है। ​ न्यायालय के विचारण ट्रायल की वर्तमान स्थिति को लेकर भी नियमों को बेहद सख्त बना दिया गया है। जनपद न्यायाधीश के प्रशासनिक आदेश के तहत अब याचिकाकर्ताओं को यह साफ- साफ बताना होगा कि केस जांच चार्जशीट संज्ञान, आरोप तय होने या ट्रायल के किस चरण में है साथ ही चार्जशीट में दर्ज कुल गवाहों और अब तक परीक्षित जांचे गए अभियोजन गवाहों की संख्या भी दर्ज करनी होगी। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव आपराधिक पूर्ववृत्त क्रिमिनल बैकग्राउंड और पिछली अर्जियों को लेकर है अब अभियुक्त को अपने पुराने सभी एफआईआर संबंधित धाराओं और उनके नतीजों लंबित बरी या दोषसिद्ध का पूरा ब्योरा देना होगा। साथ ही पूर्व में दाखिल ज़मानत याचिकाओं के परिणाम और यह भी हलफनामे में बताना होगा कि क्या उनके खिलाफ कोई गैर-जमानती वारंट जारी हुआ है या उन्हें घोषित भगोड़ा अपराधी करार दिया गया है। जनपद न्यायाधीश ने इस आदेश की प्रतियां सभी अदालतों फाइलिंग अनुभाग और सिविल व जनपद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष/महासचिव को भेजकर सख्त निर्देश दिए हैं कि सभी वकीलों व सदस्यों के बीच इसका त्वरित प्रसार और शत- प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।

​सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद एक्शन में जिला जज :  जमानत याचिका के साथ अब देना होगा पाई-पाई का हिसाब!

 

​बिना हलफनामे के नहीं मिलेगी बेल….. जिला जज का बड़ा आदेश, आपराधिक कुंडली छिपानी पड़ेगी भारी

रिपोर्ट:कुलदीप मिश्र विधि संवाददाता

​संतकबीरनगर:सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद अब ज़मानत याचिकाओं को लेकर न्यायिक व्य वस्था में बड़ा और कड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जेबा खान बनाम उत्तर प्रदेश राज्य क्रिमिनल अपील सं.825/2026 मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 11 फरवरी 2026 को दिए गए ऐतिहासिक फैसले के अनुपालन में जनपद न्यायाधीश रणधीर सिंह ने 22 जुलाई 2026 को एक विस्तृत प्रशासनिक आदेश सं. 205/2026 जारी किया है।

इस आदेश के तहत अब ज़मानत की अर्जी दाखिल करने वाले हर एक याचिकाकर्ता को अपनी पूरी आपराधिक कुंडली और केस का पाई- पाई हिसाब शपथ पत्र के साथ प्रस्तुत करना अनिवार्य कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि ज़मानत प्रक्रिया में एकरूपता पारदर्शिता और सत्यनिष्ठा बनाए रखने के लिए किसी भी तथ्य को छिपाना अपराध की श्रेणी में आएगा। इस नए नियम के तहत अब बेल एप्लीकेशन में एफआईआर संख्या तारीख संबंधित पुलिस स्टेशन जिला राज्य लागू धाराएं और उनमें मिलने वाली अधिकतम सजा का स्पष्ट ब्योरा देना होगा। इसके अलावा अभियुक्त की गिरफ्तारी की तारीख और अब तक काटी गई कुल हिरासत अवधि का सटीक ब्योरा देना अनिवार्य कर दिया गया है।
​ न्यायालय के विचारण ट्रायल की वर्तमान स्थिति को लेकर भी नियमों को बेहद सख्त बना दिया गया है। जनपद न्यायाधीश के प्रशासनिक आदेश के तहत अब याचिकाकर्ताओं को यह साफ- साफ बताना होगा कि केस जांच चार्जशीट संज्ञान, आरोप तय होने या ट्रायल के किस चरण में है साथ ही चार्जशीट में दर्ज कुल गवाहों और अब तक परीक्षित जांचे गए अभियोजन गवाहों की संख्या भी दर्ज करनी होगी। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव आपराधिक पूर्ववृत्त क्रिमिनल बैकग्राउंड और पिछली अर्जियों को लेकर है अब अभियुक्त को अपने पुराने सभी एफआईआर संबंधित धाराओं और उनके नतीजों लंबित बरी या दोषसिद्ध का पूरा ब्योरा देना होगा। साथ ही पूर्व में दाखिल ज़मानत याचिकाओं के परिणाम और यह भी हलफनामे में बताना होगा कि क्या उनके खिलाफ कोई गैर-जमानती वारंट जारी हुआ है या उन्हें घोषित भगोड़ा अपराधी करार दिया गया है। जनपद न्यायाधीश ने इस आदेश की प्रतियां सभी अदालतों फाइलिंग अनुभाग और सिविल व जनपद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष/महासचिव को भेजकर सख्त निर्देश दिए हैं कि सभी वकीलों व सदस्यों के बीच इसका त्वरित प्रसार और शत- प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।

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