
सेमरियावां की सियासत में ‘सुपर-एक्टिव’ चाल के पीछे का असली सस्पेंस!
संतकबीरनगर जिले का सबसे बड़ा ब्लॉक सेमरियावां—और इस वक्त यहाँ के सियासी गलियारों में सिर्फ एक ही नाम की गूंज है… मुमताज़ अहमद! ब्लॉक क्षेत्र के छोटे से गांव सुकरौली से निकलकर पूर्व प्रमुख और मौजूदा प्रमुख प्रतिनिधि के पद तक पहुँचे मुमताज़ इन दिनों अचानक हर मोड़, हर चाक-चौराहे और हर घर के दरवाजे पर दस्तक देते नजर आ रहे हैं। धार्मिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना हो या ‘जनता का सेवक जनता के द्वार’ की अवधारणा को चरितार्थ करना….. मुमताज़ की यह अचानक बढ़ी बेतहाशा सक्रियता किसी आम जनसंपर्क जैसी तो बिल्कुल नहीं लगती। आख़िर क्या है इस खामोश हलचल का राज़? क्या यह कोई बड़ी राजनीतिक स्क्रिप्ट लिखे जाने की शुरुआत है या फिर बंद कमरों में बुना जा रहा कोई बड़ा माइंड गेम?
हमारे संवाददाता ने जब सेमरियावां की जनता की नब्ज टटोली तो सियासी सस्पेंस और गहरा गया। जनता की प्रतिक्रियाओं के कई रंग सामने आए—किसी ने दबी ज़ुबान में कहा कि मुमताज़ भाई किसी बहुत बड़ी राजनीतिक उपलब्धि की फिराक में हैं, तो किसी ने दावा ठोक दिया कि उनका सीधा निशाना आने वाला विधानसभा चुनाव है। चर्चाएं तो यहाँ तक गरम हैं कि मुमताज़ बहुत जल्द पाला बदलकर किसी नए राजनीतिक दल की तरफ रुख कर सकते हैं और टिकट की मजबूत दावेदारी पेश करने की फिराक में हैं।
लेकिन कहानी में असली रोमांच तब आया जब सत्ता की कड़ियों को आपस में जोड़ा गया। फिलहाल बीजेपी से जुड़े मुमताज़ उस वक्त अचानक सुर्खियों और विवादों में आ घिरे, जब बीजेपी की सहयोगी पार्टी सुभासपा से उनकी नजदीकियां बढ़ती दिखीं। पर सस्पेंस का असली धमाका तब हुआ जब सुभासपा सुप्रीमो ओपी राजभर के बेटे और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव ने बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मुमताज़ के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच और सख्त कार्रवाई की बात कर डाली! इस एक बयान ने सेमरियावां से लेकर पूरे जिले के सियासी गलियारे में हड़कंप मचा दिया। तो क्या सुभासपा के इस हमले के बाद मुमताज़ का बीजेपी और उसके सहयोगियों से मोहभंग हो चुका है? या फिर वो विरोधियों को धोबीपछाड़ देने के लिए कोई नया पैंतरा तैयार कर रहे हैं?
जब इस उठते तूफान के बीच हमारे संवाददाता ने सीधे मुमताज़ अहमद से तीखे सवाल पूछे, तो उन्होंने बेहद सधे हुए अंदाज में तमाम अटकलों को खारिज कर दिया। मुमताज़ ने कहा कि “मैं पिछले 10 सालों से जनता के सुख-दुख में शामिल होता आ रहा हूँ, इस सक्रियता का कोई राजनीतिक अर्थ निकालना सरासर गलत है।” पार्टी बदलने के दावों को महज एक कोरी अफवाह बताते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि “मैं बीजेपी का निष्ठावान कार्यकर्ता था, हूँ और हमेशा रहूँगा।”
मुमताज़ भले ही इसे अपनी पुरानी आदत और निस्वार्थ सेवा बता रहे हों, लेकिन चाक-चौराहों पर उनका यह संवाद और जनता के बीच बढ़ता प्रभाव साफ इशारा कर रहा है कि सेमरियावां की जमीन पर पर्दे के पीछे से कोई बहुत बड़ी पटकथा लिखी जा रही है… अब यह महज अफवाहों का धुआँ है या फिर किसी बड़े सियासी भूचाल से पहले की खामोशी, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा!