बलईपुर में तहफ्फुज-ए-खत्म-ए-नुबुव्वत व अजमत-ए-सहाबा का ऐतिहासिक सम्मेलन आयोजित, देश के प्रमुख उलेमा ने किए संबोधित
सेमरियावा। सेमरियावा ब्लाक के बलईपुर स्थित मदरसा अरबिया मकसूदुल इस्लाम में गुरुवार, 8 अक्टूबर को मजलिस तहफ्फुज-ए-खत्म-ए-नुबुव्वत, संतकबीरनगर के तत्वावधान में तहफ्फुज-ए-खत्म-ए-नुबुव्वत व अजमत-ए-सहाबा का भव्य सम्मेलन आयोजित किया गया। मदरसा के नाजिम एवं मजलिस तहफ्फुज-ए-खत्म-ए-नुबुव्वत, संतकबीरनगर के नाजिम मौलाना महमूदुर्रहमान कासमी की निगरानी में आयोजित इस सम्मेलन में देश के प्रमुख उलेमा और विभिन्न धार्मिक विषयों के जानकारों ने अपने विचार रखे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता एवं संचालन की जिम्मेदारी मजलिस तहफ्फुज-ए-खत्म-ए-नुबुव्वत, संतकबीरनगर के सदर तथा मदरसा अरबिया नूरुल उलूम, करमाखान के नाजिम-ए-तालीमात मौलाना मुहम्मद शाहिद कासमी ने निभाई। कार्यक्रम का आगाज मदरसा अरबिया दीनिया, मुंडाडीहा बेग के शिक्षक कारी नसीम अहमद की तिलावत-ए-कुरआन से हुआ। इसके बाद मदरसा अरबिया नूरुल उलूम, करमाखान के छात्र सईद अहमद और मदरसा अरबिया मकसूदुल इस्लाम, बलईपुर के छात्र हाफिज मुहम्मद फैजान ने संयुक्त रूप से नात-ए-पाक पेश की। अंत में बस्ती की जामा मस्जिद के इमाम मौलाना तफज्जुल हुसैन ने भी नात प्रस्तुत की।
फितनों से बचाव करना उलेमा की साझा जिम्मेदारी
कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए मौलाना मुहम्मद शाहिद कासमी ने कहा कि फितनों की पहचान करना तथा उनसे खुद बचना और दूसरों को बचाने का प्रयास करना सभी अहले-इल्म की साझा जिम्मेदारी है।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मजलिस तहफ्फुज-ए-खत्म-ए-नुबुव्वत, संतकबीरनगर के सचिव मौलाना मुहम्मद उसामा कासमी ने तहफ्फुज-ए-खत्म-ए-नुबुव्वत के विषय पर विचार रखे। इसके बाद मजलिस के उपाध्यक्ष मुफ्ती असदुल्लाह कासमी ने अजमत-ए-सहाबा के विषय पर विस्तार से संबोधित किया।
मुख्य अतिथि के रूप में जामिया महमूदिया अशरफुल उलूम, कानपुर के शिक्षक मौलाना मुहम्मद हुजैफा कासमी ने कहा कि अपनी आने वाली पीढ़ियों के ईमान की हिफाजत के लिए सहाबा-ए-किराम की अजमत और उनसे मोहब्बत को बच्चों के दिलों में बचपन से ही स्थापित करना जरूरी है।
मजलिस तहफ्फुज-ए-खत्म-ए-नुबुव्वत, कानपुर के उप नाजिम मौलाना अमीर हमजा कासमी ने फितना-ए-शकीलियत और रद्द-ए-कादियानियत के विषय पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस तरह के फितनों के प्रति जागरूक रहना और उनसे बचाव करना प्रत्येक मोमिन की बुनियादी जिम्मेदारी है।
लखनऊ से आए मदरसा दारुल मुबल्लीगीन, पाटा नाला के नाजिम एवं जानशीन हजरत इमाम अहले सुन्नत मौलाना अब्दुलबारी फारूकी ने कहा कि तहफ्फुज-ए-खत्म-ए-नुबुव्वत और अजमत-ए-सहाबा के काम को अपनी प्राथमिकता बनाना चाहिए। उन्होंने उम्मत के ईमान की हिफाजत के लिए निरंतर प्रयास करने पर जोर दिया।
सहाबा-ए-किराम की शान में गुस्ताखी से बचने की अपील
इसके बाद मजलिस तहफ्फुज-ए-खत्म-ए-नुबुव्वत, संतकबीरनगर के सचिव मौलाना मुहम्मद अरशद कासमी ने संगठन की तीन वर्षीय रिपोर्ट पेश की। मदरसा अरबिया मकसूदुल इस्लाम, बलईपुर के नाजिम मौलाना महमूदुर्रहमान कासमी ने सभी अतिथियों और उपस्थित लोगों का स्वागत करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया।
सम्मेलन के प्रमुख वक्ता दारुल उलूम देवबंद के नायब मोहतमिम एवं उस्ताद-ए-हदीस मुफ्ती मुहम्मद राशिद आजमी ने विस्तार से संबोधित किया। उन्होंने फितना-ए-कादियानियत और शकीलियत का परिचय देते हुए अपने विचार रखे। अजमत-ए-सहाबा-ए-किराम पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सहाबा-ए-किराम इल्म का घर हैं और हजरत अमीर मुआविया रजि. उस घर के पर्दे की तरह हैं। उन्होंने कहा कि हजरत अमीर मुआविया रजि. के बारे में अभद्र टिप्पणी करना ईमान के लिए बेहद खतरनाक है। उनके प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने से व्यक्ति के ईमान पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
मुफ्ती मुहम्मद राशिद आजमी ने मजलिस तहफ्फुज-ए-खत्म-ए-नुबुव्वत, संतकबीरनगर के कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने नई पीढ़ी के ईमान की हिफाजत के लिए एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी उठाई है।
छात्र ने मुकम्मल किया कुरआन पाक का हिफ्ज
सम्मेलन के दौरान मदरसा मकसूदुल इस्लाम, बलईपुर के छात्र मुहम्मद कासिम ने कुरआन पाक का हिफ्ज मुकम्मल किया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने खुशी जाहिर की। अंत में मुफ्ती मुहम्मद राशिद आजमी की दुआ के साथ सम्मेलन का समापन हुआ।
कार्यक्रम में दारुल उलूम इस्लामिया, बस्ती के नाजिम मौलाना मुहम्मद असद कासमी, दारुल उलूम इस्लामिया, खलीलाबाद के मोहतमिम मुफ्ती वसीम अहमद कासमी, मदरसा अरबिया जाफरिया हिदायतुल उलूम, करही के नायब नाजिम मौलाना अख्तर हुसैन कासमी तथा मुफ्ती जमाल अहमद कासमी समेत अन्य उलेमा ने भी संबोधित किया।
इस अवसर पर मौलाना शम्सुजुहा कासमी, मौलाना अल्लामा मुहम्मद उमर कासमी, मौलाना सिराज अहमद हमीदी, मुफ्ती इसहाक अहमद कासमी, मौलाना अबुल वफा कासमी, मौलाना मुहम्मद अहमद कासमी, मौलाना रहमतुल्लाह कासमी और मौलाना इनायतुल्लाह कासमी सहित बड़ी संख्या में उलेमा, मदरसों के जिम्मेदार और अन्य लोग मौजूद रहे।