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कलश स्थापना के लिए सुबह 6:20 से 10:11 बजे तक शुभ मुहूर्त, 20 अक्टूबर को विजयादशमी संतकबीरनगर। शारदीय नवरात्र इस बार दस दिनों तक चलेंगे। 11 अक्टूबर, रविवार से मां दुर्गा की आराधना का महापर्व शुरू होगा। ज्योतिषाचार्य सुजीत महाराज के अनुसार, इस बार जगत जननी मां दुर्गा का आगमन हाथी पर हो रहा है, जिसे धार्मिक मान्यताओं में शुभ संकेत माना जाता है। नवरात्र के आगमन के साथ ही मंदिरों और घरों में पूजा-अर्चना, कलश स्थापना तथा दुर्गा सप्तशती के पाठ की तैयारियां तेज हो गई हैं। सुजीत महाराज ने बताया कि 11 अक्टूबर को आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा पूरे दिन रहने के कारण श्रद्धालु शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना कर सकते हैं। कलश स्थापना का सामान्य शुभ मुहूर्त सुबह 6:20 बजे से पूर्वाह्न 10:11 बजे तक रहेगा। वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक निर्धारित है। उन्होंने बताया कि कालरात्रि पूजन 17 अक्टूबर को होगा, जबकि महाअष्टमी व्रत 18 अक्टूबर, रविवार को रखा जाएगा। इसी दिन रात्रि 11 बजे से अगले दिन रात 1:30 बजे तक महानिशा की विशेष तांत्रिक पूजा का समय बताया गया है। नवमी तिथि पर व्रत-पूजन, हवन और मां सिद्धिदात्री की आराधना 19 अक्टूबर को होगी। विजयादशमी 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी। नवरात्र व्रत रखने वाले श्रद्धालु इसी दिन पारण करेंगे। दो दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए 11 और 18 अक्टूबर की तिथियां बताई गई हैं। नवरात्र केवल धार्मिक अनुष्ठान का पर्व नहीं, बल्कि शक्ति, आस्था और आत्मशुद्धि का अवसर भी है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा कर श्रद्धालु सुख, समृद्धि और परिवार की मंगलकामना करते हैं।

दस दिन की होगी शारदीय नवरात्र, हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा: – सुजीत महाराज

कलश स्थापना के लिए सुबह 6:20 से 10:11 बजे तक शुभ मुहूर्त, 20 अक्टूबर को विजयादशमी

संतकबीरनगर। शारदीय नवरात्र इस बार दस दिनों तक चलेंगे। 11 अक्टूबर, रविवार से मां दुर्गा की आराधना का महापर्व शुरू होगा। ज्योतिषाचार्य सुजीत महाराज के अनुसार, इस बार जगत जननी मां दुर्गा का आगमन हाथी पर हो रहा है, जिसे धार्मिक मान्यताओं में शुभ संकेत माना जाता है। नवरात्र के आगमन के साथ ही मंदिरों और घरों में पूजा-अर्चना, कलश स्थापना तथा दुर्गा सप्तशती के पाठ की तैयारियां तेज हो गई हैं।

सुजीत महाराज ने बताया कि 11 अक्टूबर को आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा पूरे दिन रहने के कारण श्रद्धालु शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना कर सकते हैं। कलश स्थापना का सामान्य शुभ मुहूर्त सुबह 6:20 बजे से पूर्वाह्न 10:11 बजे तक रहेगा। वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक निर्धारित है।

उन्होंने बताया कि कालरात्रि पूजन 17 अक्टूबर को होगा, जबकि महाअष्टमी व्रत 18 अक्टूबर, रविवार को रखा जाएगा। इसी दिन रात्रि 11 बजे से अगले दिन रात 1:30 बजे तक महानिशा की विशेष तांत्रिक पूजा का समय बताया गया है। नवमी तिथि पर व्रत-पूजन, हवन और मां सिद्धिदात्री की आराधना 19 अक्टूबर को होगी। विजयादशमी 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी। नवरात्र व्रत रखने वाले श्रद्धालु इसी दिन पारण करेंगे। दो दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए 11 और 18 अक्टूबर की तिथियां बताई गई हैं।

नवरात्र केवल धार्मिक अनुष्ठान का पर्व नहीं, बल्कि शक्ति, आस्था और आत्मशुद्धि का अवसर भी है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा कर श्रद्धालु सुख, समृद्धि और परिवार की मंगलकामना करते हैं।

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