संतकबीरनगर। शारदीय नवरात्र में महाअष्टमी की पूजा का विशेष धार्मिक महत्व है। ज्योतिषाचार्य सुजीत महाराज के अनुसार, इस वर्ष 18 अक्टूबर, रविवार को महाअष्टमी का व्रत, पूजन और रात्रिकालीन विशेष अनुष्ठान किया जाएगा। आश्विन शुक्ल पक्ष की अष्टमी को शास्त्रों में मोहरात्रि कहा गया है। इस तिथि में निशीथ काल की पूजा और महानिशा पूजन का विशेष महत्व माना जाता है।
सुजीत महाराज ने बताया कि “कालरात्रि महारात्रिस्थ दारुणा” की धार्मिक मान्यता के अनुरूप महाअष्टमी की रात्रि मां भगवती की आराधना के लिए विशेष मानी जाती है। इस दौरान श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। वहीं, तांत्रिक परंपरा में भी इस रात्रि के अनुष्ठानों का विशेष महत्व बताया गया है।
उन्होंने तिथियों के अनुसार पूजा और व्रत के विधान का पालन करने की सलाह देते हुए बताया कि 20 अक्टूबर को नवमी तिथि सुबह 9:35 बजे तक रहेगी। इसके बाद दशमी में पारण किया जा सकता है। हालांकि, मां भगवती से संबंधित कुछ धार्मिक कार्यों और नवमी पूजन को दशमी में करना निषिद्ध माना गया है। इसलिए श्रद्धालुओं को नवमी से जुड़े पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान 19 अक्टूबर को ही संपन्न कर लेने चाहिए, ताकि तिथि संबंधी विधान का पालन हो सके।