
संतकबीरनगर- विधानसभा खलीलाबाद में बसपा प्रभारी/प्रत्याशी बन लोगों के सुख-दुख में बराबर भागीदार रहे पूर्व सांसद एवं पूर्वांचल के कद्दावर नेता रहे स्व. भालचंद यादव के पुत्र सुबोध यादव की जगह अचानक 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन वो भी पूर्व सांसद स्व.भालचंद यादव की पुष्यतिथि से दो दिन पहले एक कार्यक्रम के माध्यम से डुमरियागंज लोकसभा के बसपा प्रत्याशी रहे #आफताब आलम को खलीलाबाद से बसपा ने अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया जिसको लेकर पूरे विधानसभा क्षेत्र समेत राजनैतिक गलियारों में हलचल रही तो वहीं सुबोध यादव के समर्थकों में मायूसी भी देखी गयी। वहीं शोसल मीडिया के प्लेफार्म पर बसपा सुप्रीमो समेत अन्य बड़े नेताओं के रवैये को लेकर लोगों ने काफी भर्तसना की । खलीलाबाद विधानसभा का मुख्य केंद्र तप्पा उजियार माना जाता है कहा जाता है कि यहां के मतदाताओं ने जिसके सर पर हाथ रख दिया समझो उसकी नैया पार लग गयी और जो सबसे खास बात यह है कि तप्पा उजियार पूर्व सांसद स्व. भालचंद यादव का गढ़ माना जाता है जिनको मतदाताओं ने हमेशा सर आंखों पर बैठाया। बसपा द्वारा दूसरा प्रत्याशी घोषित होते ही सबसे अधिक मायूसी तप्पा उजियार में देखी गयी। खासकर यहां के युवाओं में सुबोध यादव के अचानक टिकट कटने को लेकर काफी रोष देखा गया।युवा मतदाताओं के अनुसार चार वर्ष तक गांव-गावं, गली-गली घूमकर पार्टी का परचम फहराने वाले एक युवा का टिकट काटकर पैरासूट कैंडिडेट उतारना किसी को हजम नहीं हो रहा है। तो वहीं दूसरी ओर सुबोध यादव के पक्ष में सहानुभूति की लहर भी काफी जबरदस्त तरीके से दिखाई दे रही है जो हर हाल में बसपा समेत अन्य दलों को भारी पड़ने वाली है।अगर सुबोध यादव को अन्य दल से टिकट न भी मिला और वह मैदान में उतर गये तो खलीलाबाद विधानसभा की सीट पर काफी असर देखने को मिल सकता है।अब सुबोध यादव समर्थकों की राय शुमारी के बाद आगे क्या निर्णय लेते हैं यह तो पिता की पुष्यतिथि के बाद ही पता चल पाएगा लेकिन समर्थकों से पूरी तरह से ठान लिया है खलीलाबाद विधानसभा से उनको चुनाव लड़वाना है चाहे वह किसी दल से हो या निर्दल ।तप्पा उजियार का मुस्लिम बाहुल्य इलाका पूर्व सांसद स्व. भालचंद यादव का हमेशा से गढ़ रहा है इसीलिए उनके पुत्र से इस इलाके से काफी अधिक जनसर्थन मिल रहा है जो कहीं न कहीं सुबोध यादव के लिए काफी खुशी की बात है और विधानसभा चुनाव तक अगर सुबोध यादव यह लहर बरकरार रख पाते हैं तो यह उनके जीत की नींव होगी और उनका किला काफी हदतक महफूज रहेगा ।खैर चुनावी समीकरण तो बदलते रहते हैं लेकिन इस बार का समीकरण फ़िलहाल कुछ अलग दिखाई दे रहा है।अगर सहानुभूति की लहर कुछ बरकरार रही तो सुबोध यादव की नैया पार लग सकती और वह विधानसभा में पहुंच सकते है़ं।राजनीति कब किस करवट बैठ जाए यह कहा नहीं जा सकता है।तो वहीं शोसल मीडिया के माध्यम से समर्थक यह दावा कर रहे हैं वह सुबोध यादव को विधानसभा तक पहुंचाकर दम लेंगे। खैर अभी चुनाव में समय है लेकिन एक बात तो तय है इसबार भी खलीलाबाद विधानसभा का चुनाव काफी रोचक होने वाला है।वैसे प्रदेश में अपने पावं जमाने की कोशिश कर रहा एक दल तथा एक राष्ट्रीय दल के समर्थक तथा पार्टी पदाधिकारी सुबोध यादव के लिए दरवाजे खोल रखें हैं जो दूसरों की गणित बिगाड़ने के लिए काफी अधिक होगा। लगभग चार वर्ष तक लगातार विधानसभा खलीलाबाद में बसपा प्रभारी/प्रत्याशी बन लोगों के सुख-दुख में बराबर भागीदार रहे पूर्व सांसद एवं पूर्वांचल के कद्दावर नेता रहे स्व. भालचंद यादव के पुत्र सुबोध यादव की जगह अचानक 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन वो भी पूर्व सांसद स्व.भालचंद यादव की पुष्यतिथि से दो दिन पहले एक कार्यक्रम के माध्यम से डुमरियागंज लोकसभा के बसपा प्रत्याशी रहे #आफताब आलम को खलीलाबाद से बसपा ने अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया जिसको लेकर पूरे विधानसभा क्षेत्र समेत राजनैतिक गलियारों में हलचल रही तो वहीं सुबोध यादव के समर्थकों में मायूसी भी देखी गयी। वहीं शोसल मीडिया के प्लेफार्म पर बसपा सुप्रीमो समेत अन्य बड़े नेताओं के रवैये को लेकर लोगों ने काफी भर्तसना की । खलीलाबाद विधानसभा का मुख्य केंद्र तप्पा उजियार माना जाता है कहा जाता है कि यहां के मतदाताओं ने जिसके सर पर हाथ रख दिया समझो उसकी नैया पार लग गयी और जो सबसे खास बात यह है कि तप्पा उजियार पूर्व सांसद स्व. भालचंद यादव का गढ़ माना जाता है जिनको मतदाताओं ने हमेशा सर आंखों पर बैठाया। बसपा द्वारा दूसरा प्रत्याशी घोषित होते ही सबसे अधिक मायूसी तप्पा उजियार में देखी गयी। खासकर यहां के युवाओं में सुबोध यादव के अचानक टिकट कटने को लेकर काफी रोष देखा गया।युवा मतदाताओं के अनुसार चार वर्ष तक गांव-गावं, गली-गली घूमकर पार्टी का परचम फहराने वाले एक युवा का टिकट काटकर पैरासूट कैंडिडेट उतारना किसी को हजम नहीं हो रहा है। तो वहीं दूसरी ओर सुबोध यादव के पक्ष में सहानुभूति की लहर भी काफी जबरदस्त तरीके से दिखाई दे रही है जो हर हाल में बसपा समेत अन्य दलों को भारी पड़ने वाली है।अगर सुबोध यादव को अन्य दल से टिकट न भी मिला और वह मैदान में उतर गये तो खलीलाबाद विधानसभा की सीट पर काफी असर देखने को मिल सकता है।अब सुबोध यादव समर्थकों की राय शुमारी के बाद आगे क्या निर्णय लेते हैं यह तो पिता की पुष्यतिथि के बाद ही पता चल पाएगा लेकिन समर्थकों से पूरी तरह से ठान लिया है खलीलाबाद विधानसभा से उनको चुनाव लड़वाना है चाहे वह किसी दल से हो या निर्दल ।तप्पा उजियार का मुस्लिम बाहुल्य इलाका पूर्व सांसद स्व. भालचंद यादव का हमेशा से गढ़ रहा है इसीलिए उनके पुत्र से इस इलाके से काफी अधिक जनसर्थन मिल रहा है जो कहीं न कहीं सुबोध यादव के लिए काफी खुशी की बात है और विधानसभा चुनाव तक अगर सुबोध यादव यह लहर बरकरार रख पाते हैं तो यह उनके जीत की नींव होगी और उनका किला काफी हदतक महफूज रहेगा ।खैर चुनावी समीकरण तो बदलते रहते हैं लेकिन इस बार का समीकरण फ़िलहाल कुछ अलग दिखाई दे रहा है।अगर सहानुभूति की लहर कुछ बरकरार रही तो सुबोध यादव की नैया पार लग सकती और वह विधानसभा में पहुंच सकते है़ं।राजनीति कब किस करवट बैठ जाए यह कहा नहीं जा सकता है।तो वहीं शोसल मीडिया के माध्यम से समर्थक यह दावा कर रहे हैं वह सुबोध यादव को विधानसभा तक पहुंचाकर दम लेंगे। खैर अभी चुनाव में समय है लेकिन एक बात तो तय है इसबार भी खलीलाबाद विधानसभा का चुनाव काफी रोचक होने वाला है।वैसे प्रदेश में अपने पावं जमाने की कोशिश कर रहा एक दल तथा एक राष्ट्रीय दल के समर्थक तथा पार्टी पदाधिकारी सुबोध यादव के लिए दरवाजे खोल रखें हैं जो दूसरों की गणित बिगाड़ने के लिए काफी अधिक होगा।कल होने वाली पूर्व सांसद, गरीबों के मसीहा तथा पूर्वांचल के कद्दावर नेता रहे स्व. भालच़द यादव की पुष्यतिथि पर सुबोध यादव के निर्णय पर समर्थकों का खास ध्यान रहेगा।
By-MOHD ADNAN DURRANI