Countdown To Mothers Day
सत्यमेव टाइम्स में आपका स्वागत है   संतकबीरनगर जिले में मानकों को ठेंगा दिखाकर या फिर बगैर रजिस्ट्रेशन के चल रहे अस्पतालों पर जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग का डंडा चलना शुरू हो गया है। डीएम के निर्देश पर जिला मुख्यालय के आसपास अस्पतालों पर स्वास्थ्य महकमे और जिला प्रशासन ने छापेमारी की है, इस दौरान दो अस्पतालों को सील कर दिया गया है। जिसके बाद पूरे जिले में हड़कंप मच गया है। आपको बता दें कि बुधवार को खलीलाबाद के मुखलिसपुर रोड पर बनियाबारी-चकदही के बीच बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित जीवनरेखा हॉस्पिटल और बेबीलैण्ड हॉस्पिटल पर पहुंचे एसडीएम अजय कुमार त्रिपाठी, अपर सीएमओ डा. मोहन झा व सीएचसी ख़लीलाबाद के अधीक्षक आरएस यादव ने उक्त हॉस्पिटल को सील करने की कार्रवाई की है। अपर सीएमओ डा. मोहन मोहन झा ने बताया कि दोनों अस्पतालों की शिकायतें मिली थीं, इसलिए सदर एसडीएम की मौजूदगी में जांच की गई तो जांच के दौरान शिकायतें सही पाई गई हैं। जहां हॉस्पिटल संचालक पंजीकरण समेत अन्य कागजात नही दिखा पाएं, जिसकी वजह से इन हॉस्पिटलों को सील किया गया है। इस दौरान अस्पताल में जो मरीज मिला उन्हें सरकारी हॉस्पिटल में भेजने की बात कही गई, बाकी जो स्वस्थ्य थे, उन्हें घर भेज दिया गया।  

अवैध रूप से संचालित अस्पतालों पर गिरा गाज, सील हुए 02 अस्पताल

 

संतकबीरनगर जिले में मानकों को ठेंगा दिखाकर या फिर बगैर रजिस्ट्रेशन के चल रहे अस्पतालों पर जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग का डंडा चलना शुरू हो गया है। डीएम के निर्देश पर जिला मुख्यालय के आसपास अस्पतालों पर स्वास्थ्य महकमे और जिला प्रशासन ने छापेमारी की है, इस दौरान दो अस्पतालों को सील कर दिया गया है। जिसके बाद पूरे जिले में हड़कंप मच गया है। आपको बता दें कि बुधवार को खलीलाबाद के मुखलिसपुर रोड पर बनियाबारी-चकदही के बीच बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित जीवनरेखा हॉस्पिटल और बेबीलैण्ड हॉस्पिटल पर पहुंचे एसडीएम अजय कुमार त्रिपाठी, अपर सीएमओ डा. मोहन झा व सीएचसी ख़लीलाबाद के अधीक्षक आरएस यादव ने उक्त हॉस्पिटल को सील करने की कार्रवाई की है। अपर सीएमओ डा. मोहन मोहन झा ने बताया कि दोनों अस्पतालों की शिकायतें मिली थीं, इसलिए सदर एसडीएम की मौजूदगी में जांच की गई तो जांच के दौरान शिकायतें सही पाई गई हैं। जहां हॉस्पिटल संचालक पंजीकरण समेत अन्य कागजात नही दिखा पाएं, जिसकी वजह से इन हॉस्पिटलों को सील किया गया है। इस दौरान अस्पताल में जो मरीज मिला उन्हें सरकारी हॉस्पिटल में भेजने की बात कही गई, बाकी जो स्वस्थ्य थे, उन्हें घर भेज दिया गया।

 

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