संतकबीरनगर : कमरतोड़ महंगाई में जहां लोगों को खुद का घर बनाने मे कठिनाई आ रही है, वहीं यूपी के सन्तकबीरनगर में एक ऐसा गांव भी जहां बड़ी मुश्किल से खड़े खुद के आशियाने को ग्रामीण तोड़ रहें हैं। पूरा मामला जिले के धनघटा तहसील क्षेत्र के गायघाट गाँव का है। यहां के लोगों को दो माह बाढ़ और पूरे वर्ष नदी की कटान का भय सताता रहता है। आपको बता दें कि धनघटा तहसील क्षेत्र बाढ़ ग्रस्त इलाका है, जहां पर बहने वाली घाघरा नदी हर साल अपना कहर बरपाती है। वर्ष 2012 की बाढ़ में कई लोगों के मकान नदी में समा गए थे तो कई सौ एकड़ खेतों का अस्तित्व ही मिट गया। साल 2012 के बाद अबतक हर साल घाघरा नदी अपना जमकर कहर बरपाती चली आ रही है, इस साल भी घाघरा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है जिसको देख ग्रामीणों में साल 2012 के बाढ़ की विभीषिका की दहशत है, ग्रामीणों को डर है कि कहीं उनका आशियाना नदी की तेज धार में बह न जाए। इसलिए ग्रामीण खुद ही अपने घर को इसलिए तोड़ रहें हैं ताकि मकान में लगे ईंटों को बचाया जा सके। ग्रामीणों का कहना कि साहब आज ईंट की महंगाई इतनी है कि उसे खरीदना हमारे लिए बहुत मुश्किल है इसलिए हम ईंट बचा रहें हैं ताकि बाढ़ का खतरा टलने पर पुनः घर बना पाएंगे।
…साल 2012 में घर से बेघर हुए थे सैकड़ो परिवार
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वर्ष 2012 में आई भयंकर बाढ़ को याद कर ग्रामीण सिहर जाते हैं, उस समय घाघरा नदी जो तांडव मचाई थी, उसके चलते इलाके के भिखारीपुर समेत दर्जनों गाँव का नाम-ओ-निशान तक मिट गया था, सैकड़ों लोग घर से बेघर हो गए थे जिसकी कल्पना मात्र से ही गायघाट गांव के लोग डर रहें हैं शायद इसलिए आज वो अपने आशियाने को तोड़ रहें हैं ताकि ईंटों को बचाया जा सके और बाद में बरसात बाद पुनः घर बनवाने में उन ईंटों का इस्तेमाल किया जा सके। यहां घाघरा के कहर से तटबंध के बीच बसे गांव तुर्कवलिया, भिखारीपुर, दौलतपुर, चपरापूर्वी, जगदीशपुर, सियरकला, औराडाड़, गायघाट, करमपुर, कंचनपुर, खरगपुर, गुनवतिया, भौवापार, चकदहा, ढोलबाजार, सुअरहा, खालेपुरवा गांव घिर जाते है। धनघटा विधानसभा का अधिकांश भाग दोआबा सरयू और कुआनो नदी के बीच का क्षेत्र है। हर वर्ष बाढ़ से यहां बड़ी तबाही होती है। सरयू नदी और बांध के बीच स्थित 24 गांव के लोगों को तो बारिश का मौसम आरंभ होने के बाद घरों को छोड़कर बांध पर शरण लेना पड़ता है।