सियासत ने नदियों का कद खूब नापा, जहां नफा की उम्मीद दिखी वहीं वफा दिखाई
नदियों में एक डुबकी पर सियासत गरमाई है। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ अपने पूरे मंत्रिमंडल के साथ महाकुंभ में प्रयागराज के संगम में डुबकी लगाते हैं। दिल्ली के पूर्व सीएम केजरीवाल को यमुना में डुबकी लगाने की चुनौती देते हैं। फिर यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सीएम योगी को मथुरा की यमुना में आचमन कर सकने तक का चैलेंज करते हैं। राजीनिति में नदियों का संज्ञान लिया जाना अच्छा लगा। लेकिन न तो अखिलेश न ही मायावती और न ही अब तक किसी ने राजधानी में बह रही गोमती में डुबकी लगाने की सोची तक नहीं। दलित चेतना जगाते स्मारक बने, हाथी घोड़े बने। खूबसूरती के लिए रिवरफ्रंट बने लेकिन मां गोमती सिसकती रहीं। गंदे नालों को रोज पीती और कूड़ा कचरा निगलती मां गोमती के पास से गुजरते समय नाक पर रुमाल तक रखना पड़े इससे बदतर हालत क्या हो सकती है।
हमारे देश में नदियों को मां का दर्जा मिला हुआ है। मां का दर्जा मां का ही होता है। लेकिन सियासत ने भी नदियों का कद खूब नापा। जहां नफा की उम्मीद दिखी वहीं वफा दिखाई गई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पहली बार जब वाराणसी चुनाव लड़ने आये तब उन्होंने कहा कि मां गंगा ने मुझे बुलाया है। प्रधानमंत्री मोदी ने बेटे का फर्ज निभाया और गंगा और उनके घाटों की तस्वीर बदल गई। लेकिन मां गंगा की तरह मां गोमती की किस्मत नहीं रही। गोमती ने भी देश को प्रधानमंत्री दिया लेकिन मां गोमती को वो बेटा अब तक नहीं मिला जो अपनी मां का दर्द महसूस कर सके। मांं गोमती की पुकार सत्ता के शिखर पर बैठे बेटे भी नहीं सुन पा रहे। देश की रक्षा का भार उठाने वाले बेटे मां गोमती की कूड़े कचरे वाली गंदगी और नालों से रक्षा नहीं कर पा रहे।
मां गोमती के सीने पर गड़े खंभों पर अटके पुलों से यूपी की योगी सरकार का काफिला रोज गुजरता है लेकिन उनमें से किसी को भी मां की सिसकियां नहीं सुनाई देती। मां गोमती की सिसकियां सियासत में डुबकी नहीं लगा पाती। ये अलग बात है कि मां गोमती की अंधेरी दुनिया में उम्मीद की किरणें भी है। मां गोमती की सफाई में राजधानी के युवा पार्षद रंजीत सिंह की अगुवाई वाली स्वच्छ पर्यावरण सेना जी जान से जुटी है। हर रविवार जनसहयोग से मां गोमती का स्वच्छता अभियान चलता है। मां गोमती के कुड़ियाघाट को संवारने वाले समाजसेवी ऋद्धि किशोर गौड़ भी हैं जिन्होंने कुड़ियाघाट पर मां गोमती की आरती शुरू करवाई। यहां अपने साथियों के साथ मिलकर मां गोमती के स्वच्छता अभियान को गति प्रदान की। मूर्तियां और पूजन समाग्रियों को नदी के तट के करीब जमीन पर ही विसर्जित कराने की मुहिम छेड़ी। सियासत की डुबकी से बाहर निकल कर देखिये तो पायेंगे कि नदियां किसी शहर गांव कस्बे की जीवनरेखा होती हैं। बस हमें इस गणतंत्र दिवस पर संकल्प लेना होगा कि मां गोमती को भी डुबकी लायक बनाया जाये। देश के सबसे बड़े सूबे की राजधानी में मां गोमती को स्वच्छ करने की मुहिम को रफ्तार दी जाये।
इस गणतंत्र दिवस पर आप सभी को हार्दिक बधाई।