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सत्यमेव टाइम्स में आपका स्वागत है   संतकबीरनगर में स्वास्थ्य विभाग पर लाखों के घोटाले की योजना बनाने का गंभीर आरोप लगा है। यह घोटाला जेम पोर्टल (GeM Portal) पर निविदा प्रक्रिया में अनियमितताओं से जुड़ा है, जहां नियमों को ताक पर रखकर चहेती फर्मों को लाभ पहुंचाने का खेल चल रहा है। शिकायत के बाद इस पूरे मामले की जांच शुरू हो गई है, जिसमें कई जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर गाज गिरने की संभावना है। सीएमओ कार्यालय में भ्रष्टाचार का खुलासा, मंडलायुक्त से सीएम योगी तक पहुंची शिकायत मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय, संत कबीर नगर में हो रहे इस कथित भ्रष्टाचार का खुलासा तब हुआ जब एक सतर्क नागरिक ने इसकी शिकायत मंडल आयुक्त बस्ती से लेकर सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक की। शिकायत में कार्यालय मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जनपद-संत कबीर नगर में साफ-सफाई और लॉन्ड्री सेवा के लिए जेम निविदा संख्या-जेम/2025/बी/5839443 में की गई मनमानी और अनियमितताओं का विस्तृत विवरण दिया गया है। आरोप है कि नियमों की अनदेखी कर चहेती फर्मों को निविदा देकर सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगाया जा रहा है। जेम पोर्टल पर 'GST का बड़ा झोल': काम किसी और को, भुगतान किसी और को! शिकायत के अनुसार, जेम पोर्टल पर GST का बड़ा झोल चल रहा है। आरोप है कि काम किसी और फर्म से कराया जा रहा है, लेकिन भुगतान किसी और फर्म को किया जा रहा है। यह वित्तीय अनियमितता का एक गंभीर मामला है जो सीधे तौर पर सरकारी धन के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है। जांच के दायरे में जेम पोर्टल बाबू और सीएमओ की भूमिका संदिग्ध शिकायत के आधार पर मंडलायुक्त से लेकर सीएम योगी तक की शिकायत पर जांच बैठा दी गई है। यदि जांच सही ढंग से हुई तो कई जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होना तय है। शिकायत में विशेष रूप से जेम पोर्टल बाबू और सीएमओ की भूमिका संदिग्ध बताई गई है। निविदा प्रक्रिया में मनमानी और नियमों की अनदेखी शिकायतकर्ता ने बताया है कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में अधीनस्थ चिकित्सा इकाइयों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर साफ-सफाई, रखरखाव, गार्डनिंग और लॉन्ड्री कार्य के लिए जेम पोर्टल के माध्यम से 20 जनवरी 2025 को बिड संख्या-जेम/2025/बी/5839443 आमंत्रित की गई थी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के पत्रांक-एम.पी.एम.यू. आई. एम. ई. पी. मेनूयल क्लिनिंग / 2024-25/8/2554-2 दिनांक 02/08/2024 और महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवायें, उ०प्र० लखनऊ के दिशा निर्देश पत्र मंत्रयाः 11फ/29/2024-25/6926 दिनांक 18.07.2024 में स्पष्ट रूप से पांच वर्ष का अनुभव अनिवार्य किया गया था। इसके बावजूद, आमंत्रित की गई निविदा के तकनीकी नियम व शर्तों के बिंदु संख्या 8 व 14 पर ऐसे प्रमाण पत्र मांगे गए हैं जो किसी सामान्य सेवाप्रदाता के पास उपलब्ध नहीं होते हैं। महानिदेशक महोदय के पत्र में इन प्रमाण पत्रों का जिक्र भी नहीं है। इसके अलावा, निविदा में मांगी गई धरोहर धनराशि को भी अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग राशि अंकित कर निविदा को भ्रामक बनाया गया है। पसंदीदा फर्मों को लाभ पहुंचाने का आरोप: 21 फर्मों को अयोग्य घोषित बस्ती जनपद शिकायतकर्ता रामचंद्र चौधरी ने 22 जनवरी 2025 को ही इस मनमानी की सूचना आयुक्त बस्ती मंडल और अन्य संबंधित अधिकारियों को दी थी, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके बावजूद, 13 फरवरी 2025 को सार्वजनिक अवकाश होने के बावजूद तकनीकी रिपोर्ट लगाकर पहले से सीएमओ कार्यालय-संतकबीरनगर में मैनपावर की आपूर्ति कर रही अपनी चहेती फर्मों अपेक्षा इंटरप्राइजेज -कानपुर (GST संख्या -09लेप्स0765सिज़त, पंजीयन दिनांक 23/02/2021), जन संसाधन केंद्र कानपुर (GST संख्या -09आक्यूएफजे6959ह1ज़्ज, पंजीयन दिनांक 22/4/2021), और ए एस ग्रुप कानपुर को योग्य घोषित कर दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि 21 अन्य फर्मों को अयोग्य घोषित कर प्रतिस्पर्धा को खत्म कर दिया गया। शिकायत में यह भी आरोप है कि यदि किसी अन्य फर्म ने अपना पक्ष पोर्टल पर अपलोड भी किया तो उसे दरकिनार कर जन संसाधन केंद्र कानपुर को लगभग शत-प्रतिशत निविदा की अनुमानित लागत पर निविदा प्रदान कर दी गई। जिस फर्म को यह निविदा दी गई है, उसके पंजीकरण को अभी तीन वर्ष भी पूरे नहीं हुए हैं, जबकि पांच वर्ष का अनुभव अनिवार्य था। यह स्पष्ट रूप से राजकीय कोष को आर्थिक क्षति पहुंचाने का मामला है। अनुबंध रद्द कर निष्पक्ष निविदा की मांग शिकायतकर्ता रामचंद्र चौधरी ने जिलाधिकारी महोदय, अध्यक्ष जिला स्वास्थ्य समिति, संत कबीर नगर से निवेदन किया है कि उपरोक्त जेम निविदा के दिनांक 20 मई 2025 को हुए अनुबंध को तत्काल निरस्त किया जाए और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करते हुए पुनः निष्पक्ष निविदा कराई जाए। इस पूरे मामले पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं कि जांच में क्या सामने आता है और कौन-कौन से जिम्मेदार अधिकारी इस घोटाले की चपेट में आते हैं।

डीएम के नाक के नीचे स्वास्थ्य विभाग में लाखों के घोटाले की योजना का भंडाफोड़

 

संतकबीरनगर में स्वास्थ्य विभाग पर लाखों के घोटाले की योजना बनाने का गंभीर आरोप लगा है। यह घोटाला जेम पोर्टल (GeM Portal) पर निविदा प्रक्रिया में अनियमितताओं से जुड़ा है, जहां नियमों को ताक पर रखकर चहेती फर्मों को लाभ पहुंचाने का खेल चल रहा है। शिकायत के बाद इस पूरे मामले की जांच शुरू हो गई है, जिसमें कई जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर गाज गिरने की संभावना है।

सीएमओ कार्यालय में भ्रष्टाचार का खुलासा, मंडलायुक्त से सीएम योगी तक पहुंची शिकायत
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय, संत कबीर नगर में हो रहे इस कथित भ्रष्टाचार का खुलासा तब हुआ जब एक सतर्क नागरिक ने इसकी शिकायत मंडल आयुक्त बस्ती से लेकर सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक की। शिकायत में कार्यालय मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जनपद-संत कबीर नगर में साफ-सफाई और लॉन्ड्री सेवा के लिए जेम निविदा संख्या-जेम/2025/बी/5839443 में की गई मनमानी और अनियमितताओं का विस्तृत विवरण दिया गया है। आरोप है कि नियमों की अनदेखी कर चहेती फर्मों को निविदा देकर सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगाया जा रहा है।
जेम पोर्टल पर ‘GST का बड़ा झोल’: काम किसी और को, भुगतान किसी और को!
शिकायत के अनुसार, जेम पोर्टल पर GST का बड़ा झोल चल रहा है। आरोप है कि काम किसी और फर्म से कराया जा रहा है, लेकिन भुगतान किसी और फर्म को किया जा रहा है। यह वित्तीय अनियमितता का एक गंभीर मामला है जो सीधे तौर पर सरकारी धन के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है।
जांच के दायरे में जेम पोर्टल बाबू और सीएमओ की भूमिका संदिग्ध
शिकायत के आधार पर मंडलायुक्त से लेकर सीएम योगी तक की शिकायत पर जांच बैठा दी गई है। यदि जांच सही ढंग से हुई तो कई जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होना तय है। शिकायत में विशेष रूप से जेम पोर्टल बाबू और सीएमओ की भूमिका संदिग्ध बताई गई है।
निविदा प्रक्रिया में मनमानी और नियमों की अनदेखी
शिकायतकर्ता ने बताया है कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में अधीनस्थ चिकित्सा इकाइयों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर साफ-सफाई, रखरखाव, गार्डनिंग और लॉन्ड्री कार्य के लिए जेम पोर्टल के माध्यम से 20 जनवरी 2025 को बिड संख्या-जेम/2025/बी/5839443 आमंत्रित की गई थी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के पत्रांक-एम.पी.एम.यू. आई. एम. ई. पी. मेनूयल क्लिनिंग / 2024-25/8/2554-2 दिनांक 02/08/2024 और महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवायें, उ०प्र० लखनऊ के दिशा निर्देश पत्र मंत्रयाः 11फ/29/2024-25/6926 दिनांक 18.07.2024 में स्पष्ट रूप से पांच वर्ष का अनुभव अनिवार्य किया गया था।
इसके बावजूद, आमंत्रित की गई निविदा के तकनीकी नियम व शर्तों के बिंदु संख्या 8 व 14 पर ऐसे प्रमाण पत्र मांगे गए हैं जो किसी सामान्य सेवाप्रदाता के पास उपलब्ध नहीं होते हैं। महानिदेशक महोदय के पत्र में इन प्रमाण पत्रों का जिक्र भी नहीं है। इसके अलावा, निविदा में मांगी गई धरोहर धनराशि को भी अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग राशि अंकित कर निविदा को भ्रामक बनाया गया है।
पसंदीदा फर्मों को लाभ पहुंचाने का आरोप: 21 फर्मों को अयोग्य घोषित
बस्ती जनपद शिकायतकर्ता रामचंद्र चौधरी ने 22 जनवरी 2025 को ही इस मनमानी की सूचना आयुक्त बस्ती मंडल और अन्य संबंधित अधिकारियों को दी थी, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके बावजूद, 13 फरवरी 2025 को सार्वजनिक अवकाश होने के बावजूद तकनीकी रिपोर्ट लगाकर पहले से सीएमओ कार्यालय-संतकबीरनगर में मैनपावर की आपूर्ति कर रही अपनी चहेती फर्मों अपेक्षा इंटरप्राइजेज -कानपुर (GST संख्या -09लेप्स0765सिज़त, पंजीयन दिनांक 23/02/2021), जन संसाधन केंद्र कानपुर (GST संख्या -09आक्यूएफजे6959ह1ज़्ज, पंजीयन दिनांक 22/4/2021), और ए एस ग्रुप कानपुर को योग्य घोषित कर दिया गया।
चौंकाने वाली बात यह है कि 21 अन्य फर्मों को अयोग्य घोषित कर प्रतिस्पर्धा को खत्म कर दिया गया। शिकायत में यह भी आरोप है कि यदि किसी अन्य फर्म ने अपना पक्ष पोर्टल पर अपलोड भी किया तो उसे दरकिनार कर जन संसाधन केंद्र कानपुर को लगभग शत-प्रतिशत निविदा की अनुमानित लागत पर निविदा प्रदान कर दी गई। जिस फर्म को यह निविदा दी गई है, उसके पंजीकरण को अभी तीन वर्ष भी पूरे नहीं हुए हैं, जबकि पांच वर्ष का अनुभव अनिवार्य था। यह स्पष्ट रूप से राजकीय कोष को आर्थिक क्षति पहुंचाने का मामला है।
अनुबंध रद्द कर निष्पक्ष निविदा की मांग
शिकायतकर्ता रामचंद्र चौधरी ने जिलाधिकारी महोदय, अध्यक्ष जिला स्वास्थ्य समिति, संत कबीर नगर से निवेदन किया है कि उपरोक्त जेम निविदा के दिनांक 20 मई 2025 को हुए अनुबंध को तत्काल निरस्त किया जाए और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करते हुए पुनः निष्पक्ष निविदा कराई जाए। इस पूरे मामले पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं कि जांच में क्या सामने आता है और कौन-कौन से जिम्मेदार अधिकारी इस घोटाले की चपेट में आते हैं।

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