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सत्यमेव टाइम्स में आपका स्वागत है   संतकबीरनगर जिले के खलीलाबाद सदर तहसील क्षेत्र के पटखौली गांव में एक विधवा महिला की भूमिधारी ज़मीन पर दबंगों और भू-माफिया द्वारा अवैध कब्ज़ा कर लिया गया है। पीड़िता अर्चना सिंह पिछले कई वर्षों से अपनी ज़मीन वापस पाने के लिए तहसील से लेकर प्रदेश स्तर तक अधिकारियों के चक्कर लगा रही हैं, लेकिन उन्हें अब तक न्याय नहीं मिल पाया है। यह मामला प्रशासनिक ढिलाई और भू-राजस्व संहिता के उल्लंघन का एक बड़ा उदाहरण बन गया है जिससे क्षेत्र में दबंगों और भू-माफिया के हौसले बुलंद होते दिख रहे हैं। पूरा मामला और प्रशासनिक उदासीनता पटखौली गांव स्थित आराजी संख्या 119 ड0, राजस्व अभिलेखों में अर्चना सिंह पत्नी बलवंत सिंह के नाम बतौर संक्रमणीय भूमिधर दर्ज है। इसमें उनका कुल सवा छह बिस्वा हिस्सा था, जिसमें से आर्थिक तंगी के चलते उन्होंने लगभग सवा दो बिस्वा भूमि बेच दी थी। हालांकि, अभी भी उनका लगभग चार बिस्वा से अधिक भूमि बचा हुआ है, जिस पर दबंगों और भू-माफिया किस्म के लोगों ने मड़हला, छप्पर आदि रखकर अवैध रूप से कब्ज़ा कर लिया है। पीड़ित विधवा अर्चना सिंह का आरोप है कि उन्होंने कई वर्षों से अपनी भूमिधरी ज़मीन पर से अवैध कब्ज़ा हटवाने के लिए तहसील, जिला, मंडल और प्रदेश के अधिकारियों के चौखट पर दस्तक दी, लेकिन किसी भी अधिकारी ने उन्हें न्याय दिलाने की ज़हमत नहीं उठाई। कानूनी प्रक्रिया और अधिकारियों की शिथिलता थक-हारकर अर्चना सिंह ने धारा 134 उत्तर प्रदेश भू-राजस्व संहिता के तहत उप जिलाधिकारी खलीलाबाद के न्यायालय में एक मुकदमा दाखिल किया। न्यायालय ने 16 अगस्त 2019 को एक संशोधित आदेश (05 सितंबर 2019) पारित किया और अवैध कब्ज़ा हटाने के लिए एक टीम का गठन भी किया। हालांकि अर्चना सिंह का आरोप है कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने विपक्षियों को पर्याप्त समय दिया, जिससे उन्होंने मामले को लंबा खींचने का अवसर पा लिया। विपक्षियों ने मंडल आयुक्त बस्ती मंडल, बस्ती के न्यायालय में एक "बनावटी और फर्जी अपील" दाखिल की। मंडल आयुक्त महोदय के न्यायालय ने 19 मई 2025 को इस अपील को निरस्त करते हुए उप जिलाधिकारी खलीलाबाद न्यायालय के 16 अगस्त 2019 (संशोधित 05 सितंबर 2019) के आदेश को यथावत रखने का निर्देश दिया। मंडल आयुक्त का आदेश पारित हुए लगभग ढाई महीने का समय बीत चुका है और विधवा स्त्री ने जिलाधिकारी संतकबीरनगर व उप जिलाधिकारी खलीलाबाद को अवैध कब्ज़ा हटवाने के लिए पुनः प्रार्थना पत्र दिया है, लेकिन आज तक इस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है। दोहरे मापदंड का आरोप विधवा अर्चना सिंह का आरोप है कि यदि यही मामला सरकारी भूमि पर अवैध कब्ज़े का होता तो प्रशासन अब तक बुलडोज़र चलवाकर अवैध कब्ज़ा हटवाने का कार्य कर चुका होता। उनका यह बयान प्रशासन पर दोहरे मापदंड अपनाने और आम जनता विशेषकर कमज़ोर वर्गों के प्रति उदासीनता बरतने का गंभीर आरोप है। यह मामला एक बार फिर ज़मीनी स्तर पर कानून के राज की स्थापना और भू-माफिया पर लगाम कसने में प्रशासन की भूमिका पर सवालिया निशान खड़े कर रहा है।

विधवा की भूमि पर भू-माफिया का कब्ज़ा, प्रशासन पर निष्क्रियता का आरोप

 

संतकबीरनगर जिले के खलीलाबाद सदर तहसील क्षेत्र के पटखौली गांव में एक विधवा महिला की भूमिधारी ज़मीन पर दबंगों और भू-माफिया द्वारा अवैध कब्ज़ा कर लिया गया है। पीड़िता अर्चना सिंह पिछले कई वर्षों से अपनी ज़मीन वापस पाने के लिए तहसील से लेकर प्रदेश स्तर तक अधिकारियों के चक्कर लगा रही हैं, लेकिन उन्हें अब तक न्याय नहीं मिल पाया है। यह मामला प्रशासनिक ढिलाई और भू-राजस्व संहिता के उल्लंघन का एक बड़ा उदाहरण बन गया है जिससे क्षेत्र में दबंगों और भू-माफिया के हौसले बुलंद होते दिख रहे हैं।
पूरा मामला और प्रशासनिक उदासीनता
पटखौली गांव स्थित आराजी संख्या 119 ड0, राजस्व अभिलेखों में अर्चना सिंह पत्नी बलवंत सिंह के नाम बतौर संक्रमणीय भूमिधर दर्ज है। इसमें उनका कुल सवा छह बिस्वा हिस्सा था, जिसमें से आर्थिक तंगी के चलते उन्होंने लगभग सवा दो बिस्वा भूमि बेच दी थी। हालांकि, अभी भी उनका लगभग चार बिस्वा से अधिक भूमि बचा हुआ है, जिस पर दबंगों और भू-माफिया किस्म के लोगों ने मड़हला, छप्पर आदि रखकर अवैध रूप से कब्ज़ा कर लिया है।
पीड़ित विधवा अर्चना सिंह का आरोप है कि उन्होंने कई वर्षों से अपनी भूमिधरी ज़मीन पर से अवैध कब्ज़ा हटवाने के लिए तहसील, जिला, मंडल और प्रदेश के अधिकारियों के चौखट पर दस्तक दी, लेकिन किसी भी अधिकारी ने उन्हें न्याय दिलाने की ज़हमत नहीं उठाई।
कानूनी प्रक्रिया और अधिकारियों की शिथिलता
थक-हारकर अर्चना सिंह ने धारा 134 उत्तर प्रदेश भू-राजस्व संहिता के तहत उप जिलाधिकारी खलीलाबाद के न्यायालय में एक मुकदमा दाखिल किया। न्यायालय ने 16 अगस्त 2019 को एक संशोधित आदेश (05 सितंबर 2019) पारित किया और अवैध कब्ज़ा हटाने के लिए एक टीम का गठन भी किया।
हालांकि अर्चना सिंह का आरोप है कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने विपक्षियों को पर्याप्त समय दिया, जिससे उन्होंने मामले को लंबा खींचने का अवसर पा लिया। विपक्षियों ने मंडल आयुक्त बस्ती मंडल, बस्ती के न्यायालय में एक “बनावटी और फर्जी अपील” दाखिल की। मंडल आयुक्त महोदय के न्यायालय ने 19 मई 2025 को इस अपील को निरस्त करते हुए उप जिलाधिकारी खलीलाबाद न्यायालय के 16 अगस्त 2019 (संशोधित 05 सितंबर 2019) के आदेश को यथावत रखने का निर्देश दिया। मंडल आयुक्त का आदेश पारित हुए लगभग ढाई महीने का समय बीत चुका है और विधवा स्त्री ने जिलाधिकारी संतकबीरनगर व उप जिलाधिकारी खलीलाबाद को अवैध कब्ज़ा हटवाने के लिए पुनः प्रार्थना पत्र दिया है, लेकिन आज तक इस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है।
दोहरे मापदंड का आरोप
विधवा अर्चना सिंह का आरोप है कि यदि यही मामला सरकारी भूमि पर अवैध कब्ज़े का होता तो प्रशासन अब तक बुलडोज़र चलवाकर अवैध कब्ज़ा हटवाने का कार्य कर चुका होता। उनका यह बयान प्रशासन पर दोहरे मापदंड अपनाने और आम जनता विशेषकर कमज़ोर वर्गों के प्रति उदासीनता बरतने का गंभीर आरोप है। यह मामला एक बार फिर ज़मीनी स्तर पर कानून के राज की स्थापना और भू-माफिया पर लगाम कसने में प्रशासन की भूमिका पर सवालिया निशान खड़े कर रहा है।

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