संत कबीर नगर: जिले के प्रभारी सत्र न्यायाधीश रमेश दुबे ने दहेज हत्या के एक गंभीर मामले में आरोपी पति राकेश और ससुर रामसूरत की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। यह फैसला जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) विशाल श्रीवास्तव के तर्कों के बाद आया, जिन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत का कड़ा विरोध किया था।
यह मामला तब सामने आया जब सुभाष नामक व्यक्ति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उनकी बेटी नीतू की शादी 4 साल पहले गोरयाभार गांव के रहने वाले राकेश से हुई थी। शादी के कुछ समय बाद से ही नीतू के ससुराल वाले दहेज की मांग करने लगे। जब सुभाष दहेज की मांग पूरी नहीं कर पाए, तो 12 मई, 2025 की रात को नीतू को उसके ससुराल वालों ने जलाकर मारने की कोशिश की।
इस घटना में नीतू गंभीर रूप से झुलस गई थी, जिसके बाद उसे गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। इस जघन्य अपराध में नीतू के पति राकेश, ससुर रामसूरत और एक चचेरी भाभी शामिल थे।
इस घटना के बाद खलीलाबाद थाने में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। गिरफ्तारी के बाद, पति राकेश और ससुर रामसूरत ने अपनी जमानत के लिए अर्जी दी। लेकिन, जिला शासकीय अधिवक्ता विशाल श्रीवास्तव ने अदालत में जोरदार विरोध करते हुए तर्क दिया कि यह एक बेहद गंभीर और जघन्य अपराध है। दोनों आरोपियों ने दहेज के लिए एक महिला की जान ली है।
अदालत ने विशाल श्रीवास्तव के तर्कों और मामले की गंभीरता पर विचार करते हुए आरोपी पति और ससुर की जमानत याचिका को खारिज कर दिया।