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सत्यमेव टाइम्स में आपका स्वागत है संतकबीरनगर: खलीलाबाद तहसील के पटखौली गाँव में एक विधवा महिला अर्चना सिंह अपनी ज़मीन पर हुए अवैध कब्ज़े को हटाने के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रही हैं। यह मामला तब और गंभीर हो जाता है जब अदालत के स्पष्ट आदेशों के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। क्या है पूरा मामला? अर्चना सिंह के मुताबिक, उनकी ज़मीन गाटा संख्या 119 ड़ में है। आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने अपनी कुछ ज़मीन बेच दी थी, लेकिन लगभग चार बिस्वा ज़मीन अभी भी उनके पास बची हुई है। अर्चना सिंह का आरोप है कि गाँव के शांति देवी, चंद्रेश, राकेश, राजेश, रमेश, और सरस्वती देवी ने उनकी बची हुई ज़मीन पर घूर, गाज और मड़हला आदि रखकर अवैध रूप से कब्ज़ा कर लिया है। अदालती आदेशों की अनदेखी इस मामले में न्याय पाने के लिए अर्चना सिंह ने उप-जिलाधिकारी, खलीलाबाद के न्यायालय में धारा 134, उत्तर प्रदेश भू-राजस्व संहिता के तहत वाद दायर किया था। न्यायालय ने 16 अगस्त 2019 को उनके पक्ष में आदेश दिया, जिसे 5 सितंबर 2019 को संशोधित भी किया गया था। विपक्षी लोगों ने इस आदेश के ख़िलाफ़ बस्ती मंडल के अपर आयुक्त के न्यायालय में अपील की, लेकिन 19 मई 2025 को वह अपील भी निरस्त कर दी गई। इस तरह, लगभग ढाई महीने पहले ही अदालत ने अवैध कब्ज़ा हटाने का रास्ता साफ़ कर दिया था। प्रशासन की कथित लापरवाही इतने स्पष्ट और अंतिम आदेशों के बावजूद, अर्चना सिंह का आरोप है कि प्रशासन ने अभी तक उनकी ज़मीन से अवैध कब्ज़ा नहीं हटवाया है। उन्होंने कई बार ज़िलाधिकारी और उप-जिलाधिकारी से शिकायत की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 17 जुलाई 2025 को उप-जिलाधिकारी, खलीलाबाद ने तहसीलदार और थाना प्रभारी को एक टीम बनाकर अवैध कब्ज़ा हटाने का आदेश दिया था। मगर यह आदेश भी केवल कागज़ों तक ही सीमित रहा। अर्चना सिंह का कहना है कि प्रशासन की इस लापरवाही के कारण उन्हें लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विधवा ने राज्य महिला आयोग से लगाई गुहार जब सभी सरकारी प्रयास विफल हो गए, तो अर्चना सिंह ने अपनी अंतिम उम्मीद के तौर पर राज्य महिला आयोग, लखनऊ से न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने आयोग से इस मामले में हस्तक्षेप कर अवैध कब्ज़ा हटवाने और न्याय सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है है।  

अवैध कब्जा हटाने को लेकर विधवा ने महिला आयोग से लगाई गुहार

संतकबीरनगर: खलीलाबाद तहसील के पटखौली गाँव में एक विधवा महिला अर्चना सिंह अपनी ज़मीन पर हुए अवैध कब्ज़े को हटाने के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रही हैं। यह मामला तब और गंभीर हो जाता है जब अदालत के स्पष्ट आदेशों के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
अर्चना सिंह के मुताबिक, उनकी ज़मीन गाटा संख्या 119 ड़ में है। आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने अपनी कुछ ज़मीन बेच दी थी, लेकिन लगभग चार बिस्वा ज़मीन अभी भी उनके पास बची हुई है। अर्चना सिंह का आरोप है कि गाँव के शांति देवी, चंद्रेश, राकेश, राजेश, रमेश, और सरस्वती देवी ने उनकी बची हुई ज़मीन पर घूर, गाज और मड़हला आदि रखकर अवैध रूप से कब्ज़ा कर लिया है।
अदालती आदेशों की अनदेखी
इस मामले में न्याय पाने के लिए अर्चना सिंह ने उप-जिलाधिकारी, खलीलाबाद के न्यायालय में धारा 134, उत्तर प्रदेश भू-राजस्व संहिता के तहत वाद दायर किया था। न्यायालय ने 16 अगस्त 2019 को उनके पक्ष में आदेश दिया, जिसे 5 सितंबर 2019 को संशोधित भी किया गया था।
विपक्षी लोगों ने इस आदेश के ख़िलाफ़ बस्ती मंडल के अपर आयुक्त के न्यायालय में अपील की, लेकिन 19 मई 2025 को वह अपील भी निरस्त कर दी गई। इस तरह, लगभग ढाई महीने पहले ही अदालत ने अवैध कब्ज़ा हटाने का रास्ता साफ़ कर दिया था।
प्रशासन की कथित लापरवाही
इतने स्पष्ट और अंतिम आदेशों के बावजूद, अर्चना सिंह का आरोप है कि प्रशासन ने अभी तक उनकी ज़मीन से अवैध कब्ज़ा नहीं हटवाया है। उन्होंने कई बार ज़िलाधिकारी और उप-जिलाधिकारी से शिकायत की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 17 जुलाई 2025 को उप-जिलाधिकारी, खलीलाबाद ने तहसीलदार और थाना प्रभारी को एक टीम बनाकर अवैध कब्ज़ा हटाने का आदेश दिया था। मगर यह आदेश भी केवल कागज़ों तक ही सीमित रहा। अर्चना सिंह का कहना है कि प्रशासन की इस लापरवाही के कारण उन्हें लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
विधवा ने राज्य महिला आयोग से लगाई गुहार
जब सभी सरकारी प्रयास विफल हो गए, तो अर्चना सिंह ने अपनी अंतिम उम्मीद के तौर पर राज्य महिला आयोग, लखनऊ से न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने आयोग से इस मामले में हस्तक्षेप कर अवैध कब्ज़ा हटवाने और न्याय सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है है।

 

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