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सत्यमेव टाइम्स में आपका स्वागत है   संतकबीरनगर- सरकारी खजाने पर हाथ साफ करने वालों की अब खैर नहीं। करोड़ों की वित्तीय अनियमितता की खबर पर जिलाधिकारी आलोक कुमार ने सख्त रुख अपनाते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। 'दैनिक जागरण' में छपी खबर का संज्ञान लेते हुए डीएम ने जांच रिपोर्ट के आधार पर बड़े-बड़े अधिकारियों और कर्मचारियों पर शिकंजा कस दिया है। जिलाधिकारी की यह कार्रवाई दिखाती है कि अब भ्रष्टाचार और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस घोटाले में तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों ने नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों की सरकारी धनराशि का गबन किया है। बिना काम कराए ही फर्मों को पैसे दिए गए और शासन के निर्देशों की जमकर अनदेखी की गई। अब डीएम के आदेश से हड़कंप मच गया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि दोषी पाए गए हर व्यक्ति पर कानूनी और विभागीय कार्रवाई होगी। डीएम के सख्त निर्देश बाद तत्कालीन सचिव शिवप्रकाश सिंह पर विभागीय कार्रवाई फिर से शुरू होगी, क्योंकि उन्होंने रोक के बावजूद पैसे ट्रांसफर किए। सचिवों और ग्राम प्रधानों से एक हफ्ते के भीतर गलत तरीके से दी गई धनराशि वसूल की जाएगी, वरना उन पर गबन का मुकदमा दर्ज होगा। जिन 30 ग्राम पंचायतों में पैसा वापस नहीं हुआ, वहां के सचिवों और प्रधानों पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। तत्कालीन जिला पंचायत राज अधिकारी और सहायक विकास अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय जांच शुरू होगी।घोटाले में शामिल फर्मों को ब्लैकलिस्ट करके उनसे भी एक-एक पैसा वसूला जाएगा।घोटाले में सहयोग करने वाले तत्कालीन पटल सहायक को सेवा से बर्खास्त करने का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। डीएम ने सभी जांच अधिकारियों को निर्देश दिया है कि दो महीने के भीतर पूरी रिपोर्ट सौंपकर आवश्यक कार्रवाई पूरी की जाए।

भ्रष्टाचार पर DM की बड़ी चोट : नपेंगे हेराफेरी में शामिल अधिकारी-कर्मचारी

 

संतकबीरनगर- सरकारी खजाने पर हाथ साफ करने वालों की अब खैर नहीं। करोड़ों की वित्तीय अनियमितता की खबर पर जिलाधिकारी आलोक कुमार ने सख्त रुख अपनाते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। ‘दैनिक जागरण’ में छपी खबर का संज्ञान लेते हुए डीएम ने जांच रिपोर्ट के आधार पर बड़े-बड़े अधिकारियों और कर्मचारियों पर शिकंजा कस दिया है। जिलाधिकारी की यह कार्रवाई दिखाती है कि अब भ्रष्टाचार और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस घोटाले में तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों ने नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों की सरकारी धनराशि का गबन किया है। बिना काम कराए ही फर्मों को पैसे दिए गए और शासन के निर्देशों की जमकर अनदेखी की गई। अब डीएम के आदेश से हड़कंप मच गया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि दोषी पाए गए हर व्यक्ति पर कानूनी और विभागीय कार्रवाई होगी।
डीएम के सख्त निर्देश बाद तत्कालीन सचिव शिवप्रकाश सिंह पर विभागीय कार्रवाई फिर से शुरू होगी, क्योंकि उन्होंने रोक के बावजूद पैसे ट्रांसफर किए। सचिवों और ग्राम प्रधानों से एक हफ्ते के भीतर गलत तरीके से दी गई धनराशि वसूल की जाएगी, वरना उन पर गबन का मुकदमा दर्ज होगा। जिन 30 ग्राम पंचायतों में पैसा वापस नहीं हुआ, वहां के सचिवों और प्रधानों पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। तत्कालीन जिला पंचायत राज अधिकारी और सहायक विकास अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय जांच शुरू होगी।घोटाले में शामिल फर्मों को ब्लैकलिस्ट करके उनसे भी एक-एक पैसा वसूला जाएगा।घोटाले में सहयोग करने वाले तत्कालीन पटल सहायक को सेवा से बर्खास्त करने का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
डीएम ने सभी जांच अधिकारियों को निर्देश दिया है कि दो महीने के भीतर पूरी रिपोर्ट सौंपकर आवश्यक कार्रवाई पूरी की जाए।

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