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संत कबीर नगर जनपद के एक दिल दहला देने वाले हत्याकांड में आखिरकार न्याय मिल गया है। तीन मासूम बच्चियों की निर्मम हत्या के दोषी उनके पिता सरफराज और उसके दोस्त नीरज मौर्य को जिला अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस जघन्य अपराध ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया था।यह घटना 31 मई 2020 की है, जब धनघटा थाना क्षेत्र के डिहवा गांव की रहने वाली साबिया खातून ने अपनी शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि उनकी शादी सरफराज खान से हुई थी और उनकी चार बेटियां थीं। साबिया के मुताबिक, उनके पति उनसे और बच्चियों से छुटकारा पाना चाहते थे। घटना के दिन, सरफराज अपने दोस्त नीरज मौर्य के साथ घर आए और अपनी तीन बड़ी बेटियों- सना (7), सवा (4.5) और शमा (2.5) को डॉक्टर के पास ले जाने के बहाने साथ ले गए।जब काफी देर तक बच्चियां वापस नहीं आईं, तो साबिया ने सरफराज को फोन किया, लेकिन उनका मोबाइल बंद था। बाद में सरफराज अकेले घर लौटे और झूठ बोला कि बदमाशों ने मारपीट करके बच्चियों का अपहरण कर लिया है। हालांकि, बाद में अस्पताल में उसने अपने भाई और पत्नी के सामने अपना गुनाह कबूल कर लिया।सरफराज ने बताया कि उसने और नीरज ने मिलकर योजना बनाई थी। वे बच्चियों को बीड़हर घाट पुल पर ले गए और उन्हें जिंदा ही नदी में फेंक दिया, ताकि उनकी मौत हो जाए और कोई सबूत न बचे।मामले की जांच के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। जिला शासकीय अधिवक्ता विशाल श्रीवास्तव ने बताया कि अभियोजन पक्ष ने 9 गवाहों को पेश किया, जिन्होंने घटना की पुष्टि की। सभी सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर, सत्र न्यायाधीश मोहनलाल विश्वकर्मा ने दोनों आरोपियों, सरफराज और नीरज मौर्य, को दोषी पाया।न्यायाधीश ने दोनों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई और उन पर 35-35 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। यह फैसला उन मासूमों को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

बच्चियों के हत्यारे पिता और उसके दोस्त को आजीवन कारावास की सजा

संत कबीर नगर जनपद के एक दिल दहला देने वाले हत्याकांड में आखिरकार न्याय मिल गया है। तीन मासूम बच्चियों की निर्मम हत्या के दोषी उनके पिता सरफराज और उसके दोस्त नीरज मौर्य को जिला अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस जघन्य अपराध ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया था।यह घटना 31 मई 2020 की है, जब धनघटा थाना क्षेत्र के डिहवा गांव की रहने वाली साबिया खातून ने अपनी शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि उनकी शादी सरफराज खान से हुई थी और उनकी चार बेटियां थीं। साबिया के मुताबिक, उनके पति उनसे और बच्चियों से छुटकारा पाना चाहते थे। घटना के दिन, सरफराज अपने दोस्त नीरज मौर्य के साथ घर आए और अपनी तीन बड़ी बेटियों- सना (7), सवा (4.5) और शमा (2.5) को डॉक्टर के पास ले जाने के बहाने साथ ले गए।जब काफी देर तक बच्चियां वापस नहीं आईं, तो साबिया ने सरफराज को फोन किया, लेकिन उनका मोबाइल बंद था। बाद में सरफराज अकेले घर लौटे और झूठ बोला कि बदमाशों ने मारपीट करके बच्चियों का अपहरण कर लिया है। हालांकि, बाद में अस्पताल में उसने अपने भाई और पत्नी के सामने अपना गुनाह कबूल कर लिया।सरफराज ने बताया कि उसने और नीरज ने मिलकर योजना बनाई थी। वे बच्चियों को बीड़हर घाट पुल पर ले गए और उन्हें जिंदा ही नदी में फेंक दिया, ताकि उनकी मौत हो जाए और कोई सबूत न बचे।मामले की जांच के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। जिला शासकीय अधिवक्ता विशाल श्रीवास्तव ने बताया कि अभियोजन पक्ष ने 9 गवाहों को पेश किया, जिन्होंने घटना की पुष्टि की। सभी सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर, सत्र न्यायाधीश मोहनलाल विश्वकर्मा ने दोनों आरोपियों, सरफराज और नीरज मौर्य, को दोषी पाया।न्यायाधीश ने दोनों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई और उन पर 35-35 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। यह फैसला उन मासूमों को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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