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  संतकबीरनगर में नवरात्रि महोत्सव की तैयारियां पूरे ज़ोर-शोर से चल रही हैं। शहर से लेकर गाँव तक, हर जगह पंडाल सज रहे हैं और मूर्तिकार देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को अंतिम रूप दे रहे हैं। लेकिन इन सब में, मेहदावल के प्रसिद्ध मूर्तिकार रामबेलास प्रजापति किसी साधारण कलाकार से कहीं बढ़कर हैं। वे सिर्फ मूर्तियाँ नहीं बनाते, बल्कि अपनी कला से उनमें प्राण फूंक देते हैं। रामबेलास ने अपनी कला अपने बड़े भाई दिलीप प्रजापति से सीखी थी, और आज वे अपनी कुशलता के लिए जाने जाते हैं। उनकी बनाई गई मूर्तियाँ सिर्फ संत कबीर नगर तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि उनकी ख्याति इतनी दूर तक फैल चुकी है कि उनकी कलाकृतियाँ बस्ती, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर, महराजगंज और बढ़नी जैसे दूर-दराज के इलाकों में भी पहुँचती हैं। रामबेलास प्रजापति की मूर्तियों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे हर बजट में उपलब्ध हैं। वे छोटी से लेकर बड़ी मूर्तियों तक का निर्माण करते हैं, ताकि कोई भी परिवार अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार माँ दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर सके। त्योहार जैसे-जैसे पास आ रहा है, पूरे क्षेत्र में भक्ति का माहौल छा गया है। लेकिन इस भक्ति को और भी खास बनाने का श्रेय इन मूर्तिकारों की अद्भुत कला को जाता है। माँ दुर्गा, लक्ष्मी, गणेश, कार्तिक और सरस्वती की मूर्तियाँ भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं, और रामबेलास जैसे कलाकार इस उत्सव में अपनी कला का जादू चला रहे हैं।

कलमकार और कलाकार का दूसरा रूप हैं पत्रकार राम विलास प्रजापति

 

संतकबीरनगर में नवरात्रि महोत्सव की तैयारियां पूरे ज़ोर-शोर से चल रही हैं। शहर से लेकर गाँव तक, हर जगह पंडाल सज रहे हैं और मूर्तिकार देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को अंतिम रूप दे रहे हैं। लेकिन इन सब में, मेहदावल के प्रसिद्ध मूर्तिकार रामबेलास प्रजापति किसी साधारण कलाकार से कहीं बढ़कर हैं। वे सिर्फ मूर्तियाँ नहीं बनाते, बल्कि अपनी कला से उनमें प्राण फूंक देते हैं।

रामबेलास ने अपनी कला अपने बड़े भाई दिलीप प्रजापति से सीखी थी, और आज वे अपनी कुशलता के लिए जाने जाते हैं। उनकी बनाई गई मूर्तियाँ सिर्फ संत कबीर नगर तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि उनकी ख्याति इतनी दूर तक फैल चुकी है कि उनकी कलाकृतियाँ बस्ती, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर, महराजगंज और बढ़नी जैसे दूर-दराज के इलाकों में भी पहुँचती हैं।

रामबेलास प्रजापति की मूर्तियों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे हर बजट में उपलब्ध हैं। वे छोटी से लेकर बड़ी मूर्तियों तक का निर्माण करते हैं, ताकि कोई भी परिवार अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार माँ दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर सके।

त्योहार जैसे-जैसे पास आ रहा है, पूरे क्षेत्र में भक्ति का माहौल छा गया है। लेकिन इस भक्ति को और भी खास बनाने का श्रेय इन मूर्तिकारों की अद्भुत कला को जाता है। माँ दुर्गा, लक्ष्मी, गणेश, कार्तिक और सरस्वती की मूर्तियाँ भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं, और रामबेलास जैसे कलाकार इस उत्सव में अपनी कला का जादू चला रहे हैं।

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