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सत्यमेव टाइम्स में आपका स्वागत है संतकबीरनगर। जनपद के खलीलाबाद कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत माननीय कांशीराम स्पोर्ट्स स्टेडियम से राष्ट्रीय गौरव को ठेस पहुँचाने वाली एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहाँ गणतंत्र दिवस के अवसर पर फहराए गए तिरंगे को सूर्यास्त के बाद उतारना जिम्मेदार अधिकारी भूल गए। राष्ट्रीय ध्वज के प्रति इस घोर उदासीनता को लेकर स्थानीय लोगों और खेल प्रेमियों में जबरदस्त आक्रोश है और उन्होंने दोषी अधिकारी के खिलाफ तत्काल कड़ी कार्रवाई की मांग की है। मिली जानकारी के अनुसार 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर स्टेडियम में पूरे राजकीय सम्मान के साथ ध्वजारोहण किया गया था। भारतीय ध्वज संहिता के नियमों के मुताबिक, विशेष परिस्थितियों को छोड़कर ध्वज को सूर्यास्त के बाद ससम्मान उतार लिया जाता है, लेकिन यहाँ रात भर तिरंगा स्टैंड पर ही लगा रहा। अगली सुबह जब लोगों ने तिरंगे को फहराते देखा, तो विभाग की लापरवाही उजागर हो गई। स्टेडियम में मौजूद खिलाड़ियों और स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जिला क्रीड़ा अधिकारी की देखरेख में हुई यह चूक सीधे तौर पर राष्ट्रध्वज का अपमान है। घटना के बाद स्टेडियम परिसर में भारी गहमागहमी का माहौल रहा। आक्रोशित लोगों ने स्टेडियम में व्याप्त अन्य अव्यवस्थाओं को लेकर भी प्रशासन को घेरा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जिस अधिकारी पर अनुशासन और खेल भावना सिखाने की जिम्मेदारी है, वही राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति इतना लापरवाह कैसे हो सकता है? मामले की गंभीरता को देखते हुए अब जिला प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में दोषी पर जल्द एक्शन नहीं लिया गया तो वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

शर्मनाक: रात भर फहराता रहा झंडा, जिला क्रीड़ा अधिकारी पर भड़के लोग


संतकबीरनगर। जनपद के खलीलाबाद कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत माननीय कांशीराम स्पोर्ट्स स्टेडियम से राष्ट्रीय गौरव को ठेस पहुँचाने वाली एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहाँ गणतंत्र दिवस के अवसर पर फहराए गए तिरंगे को सूर्यास्त के बाद उतारना जिम्मेदार अधिकारी भूल गए। राष्ट्रीय ध्वज के प्रति इस घोर उदासीनता को लेकर स्थानीय लोगों और खेल प्रेमियों में जबरदस्त आक्रोश है और उन्होंने दोषी अधिकारी के खिलाफ तत्काल कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
मिली जानकारी के अनुसार 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर स्टेडियम में पूरे राजकीय सम्मान के साथ ध्वजारोहण किया गया था। भारतीय ध्वज संहिता के नियमों के मुताबिक, विशेष परिस्थितियों को छोड़कर ध्वज को सूर्यास्त के बाद ससम्मान उतार लिया जाता है, लेकिन यहाँ रात भर तिरंगा स्टैंड पर ही लगा रहा। अगली सुबह जब लोगों ने तिरंगे को फहराते देखा, तो विभाग की लापरवाही उजागर हो गई। स्टेडियम में मौजूद खिलाड़ियों और स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जिला क्रीड़ा अधिकारी की देखरेख में हुई यह चूक सीधे तौर पर राष्ट्रध्वज का अपमान है।
घटना के बाद स्टेडियम परिसर में भारी गहमागहमी का माहौल रहा। आक्रोशित लोगों ने स्टेडियम में व्याप्त अन्य अव्यवस्थाओं को लेकर भी प्रशासन को घेरा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जिस अधिकारी पर अनुशासन और खेल भावना सिखाने की जिम्मेदारी है, वही राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति इतना लापरवाह कैसे हो सकता है? मामले की गंभीरता को देखते हुए अब जिला प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में दोषी पर जल्द एक्शन नहीं लिया गया तो वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

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