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संतकबीरनगर-जनपद के बखिरा थाना क्षेत्र अंतर्गत पठान टोला मोहल्ले में एक मामूली विवाद के बाद मां-बेटों पर एसिड (तेजाब) फेंकने के गंभीर मामले में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। सत्र न्यायाधीश ने मामले की गंभीरता और अपराध की प्रकृति को देखते हुए तीनों मुख्य आरोपियों—गुलाम हुसैन, उसके पुत्रों मनसूर और मसकूर की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है।

जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी विशाल श्रीवास्तव ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि यह घटना 15 मार्च 2026 की रात करीब 8:30 बजे की है। पीड़िता आसमा खातून के परिवार और आरोपी गुलाम हुसैन के परिवार के बीच मुर्गी द्वारा दरवाजे पर गंदगी करने को लेकर कहासुनी शुरू हुई थी। विवाद इतना बढ़ा कि गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देते हुए गुलाम हुसैन, मनसूर और मसकूर ने पीड़ित परिवार पर एसिड फेंक दिया।

इस जघन्य हमले में आसमा की मां अमीरून्निशा बुरी तरह झुलस गईं, जिन्हें गंभीर हालत में पहले मेंहदवल अस्पताल और फिर जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर किया गया, जहाँ उनका इलाज अब भी चल रहा है। हमले में आसमा और उसके दो भाई फिरोज व अफरोज भी झुलस गए थे। सुनवाई के दौरान शासकीय अधिवक्ता विशाल श्रीवास्तव ने तर्क दिया कि आरोपियों का कृत्य अत्यंत जघन्य है और इससे पीड़ितों का जीवन संकट में पड़ गया है। अभियोजन के तर्कों को स्वीकार करते हुए सत्र न्यायालय ने तीनों आरोपियों को राहत देने से इनकार कर दिया और उनकी जमानत अर्जी निरस्त कर दी।

एसिड अटैक के तीनों आरोपियों की जमानत अर्जी कोर्ट ने की खारिज, जेल में रहेंगे हमलावर

संतकबीरनगर-जनपद के बखिरा थाना क्षेत्र अंतर्गत पठान टोला मोहल्ले में एक मामूली विवाद के बाद मां-बेटों पर एसिड (तेजाब) फेंकने के गंभीर मामले में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। सत्र न्यायाधीश ने मामले की गंभीरता और अपराध की प्रकृति को देखते हुए तीनों मुख्य आरोपियों—गुलाम हुसैन, उसके पुत्रों मनसूर और मसकूर की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है।

जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी विशाल श्रीवास्तव ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि यह घटना 15 मार्च 2026 की रात करीब 8:30 बजे की है। पीड़िता आसमा खातून के परिवार और आरोपी गुलाम हुसैन के परिवार के बीच मुर्गी द्वारा दरवाजे पर गंदगी करने को लेकर कहासुनी शुरू हुई थी। विवाद इतना बढ़ा कि गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देते हुए गुलाम हुसैन, मनसूर और मसकूर ने पीड़ित परिवार पर एसिड फेंक दिया।

इस जघन्य हमले में आसमा की मां अमीरून्निशा बुरी तरह झुलस गईं, जिन्हें गंभीर हालत में पहले मेंहदवल अस्पताल और फिर जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर किया गया, जहाँ उनका इलाज अब भी चल रहा है। हमले में आसमा और उसके दो भाई फिरोज व अफरोज भी झुलस गए थे। सुनवाई के दौरान शासकीय अधिवक्ता विशाल श्रीवास्तव ने तर्क दिया कि आरोपियों का कृत्य अत्यंत जघन्य है और इससे पीड़ितों का जीवन संकट में पड़ गया है। अभियोजन के तर्कों को स्वीकार करते हुए सत्र न्यायालय ने तीनों आरोपियों को राहत देने से इनकार कर दिया और उनकी जमानत अर्जी निरस्त कर दी।

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