DM ने 38 बाबुओं के बाद SDM और तहसीलदारों के बदले कार्यक्षेत्र, लापरवाही पर 18 कर्मियों का वेतन रोका
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को धरातल पर उतारते हुए संतकबीरनगर के जिलाधिकारी आलोक कुमार ने जिले की प्रशासनिक व्यवस्था में व्यापक सुधार करते हुए बड़ी कार्रवाई की है। अपनी ईमानदार छवि और कड़क कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले जिलाधिकारी ने कलेक्ट्रेट के 38 बाबुओं के हालिया तबादले के बाद अब राजस्व सर्किल के उच्चाधिकारियों के कार्यक्षेत्र में भी बड़ा बदलाव कर हड़कंप मचा दिया है। शासन की मंशा के अनुरूप जनहित के कार्यों में पारदर्शिता और तेजी लाने के उद्देश्य से किए गए इस फेरबदल के तहत ह्रदय राम तिवारी को खलीलाबाद, अरुण कुमार को मेहदावल और रवि कांत चौबे को धनघटा का नया उपजिलाधिकारी (SDM) नियुक्त किया गया है। प्रशासनिक ढांचे में इस सुधार को विस्तार देते हुए नायब तहसीलदारों की टीम में भी बदलाव किया गया है, जिसके अंतर्गत हरेराम यादव और प्रेम नारायण को खलीलाबाद, श्रीमती प्रियंका तिवारी को मेहदावल तथा राजेश मिश्रा को धनघटा तहसील की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है।
प्रशासनिक सर्जरी के साथ-साथ जिलाधिकारी ने विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ भी कड़ा रुख अख्तियार किया है। शासन की प्राथमिकता वाली ‘फार्मर रजिस्ट्री’ योजना की समीक्षा बैठक के दौरान यह पाया गया कि जिले के 25 राजस्व गांवों में कार्य की प्रगति अत्यंत खराब है और कई कर्मचारी बिना किसी पूर्व सूचना के अनुपस्थित मिले। इस अनुशासनहीनता पर तत्काल एक्शन लेते हुए जिलाधिकारी ने 5 लेखपाल, 7 पंचायत सहायक, 3 रोजगार सेवक और 3 ग्राम सचिवों सहित कुल 18 कर्मचारियों का एक दिन का वेतन रोकने का सख्त आदेश जारी किया है। वर्तमान में जिले में करीब 62,000 किसानों की रजिस्ट्री का कार्य शेष है, जिसे समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए डीएम स्वयं मोर्चे पर डटे हुए हैं। जिलाधिकारी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 15 अप्रैल तक निर्धारित लक्ष्य पूरा नहीं किया गया, तो संबंधित दोषियों के विरुद्ध निलंबन और प्रतिकूल प्रविष्टि जैसी कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। डीएम के इन कड़े और निष्पक्ष फैसलों ने जनपद में सुशासन की नई मिसाल पेश की है, जिससे लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों में भारी खलबली मची हुई है।