
संतकबीरनगर। जनपद के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) अमित कुमार सिंह एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गए हैं। उन पर अपने पद और अधिकारों का दुरुपयोग करने, वित्तीय अनियमितताओं को बढ़ावा देने तथा नियम-विरुद्ध तरीके से चहेते व सजातीय कर्मचारियों को लाभ पहुँचाने के गंभीर आरोप लगे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता विनोद प्रताप सिंह ने महानिदेशक स्कूल शिक्षा, आयुक्त बस्ती मण्डल और जिलाधिकारी संतकबीरनगर को एक विस्तृत शिकायत पत्र भेजकर बीएसए के कृत्यों की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित करने और सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जुलाई 2023 में कार्यभार संभालने के बाद से ही बीएसए अमित कुमार सिंह लगातार विधिक प्रावधानों और उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं। पत्र में उल्लेख किया गया है कि मध्यान्ह भोजन योजना के जिला समन्वयक धीरेन्द्र प्रताप चन्द, जिनकी सेवा पूर्व में भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण समाप्त कर दी गई थी, को बीएसए ने माननीय उच्च न्यायालय में लंबित वादों की गलत स्थिति दर्शाकर और एक अधीनस्थ त्रिस्तरीय जांच समिति के प्रभाव में आकर नियम-विरुद्ध तरीके से पुनः बहाल कर दिया। इतना ही नहीं, बीएसए पर आरोप है कि उन्होंने बिना सक्षम अधिकारी (जिलाधिकारी) की अनुमति के कई महत्वपूर्ण आउटसोर्सिंग कर्मियों और लेखाकारों के पटल परिवर्तन कर दिए तथा आईजीआरएस पोर्टल पर आने वाली जनसामान्य की शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण करने के बजाय उन्हें जानबूझकर लंबित रखा।
शिकायत पत्र में बीएसए की कार्यप्रणाली पर जातिवादी मानसिकता से ग्रसित होने का भी आरोप लगाया गया है। आरोप है कि एक तरफ जहाँ गंभीर अनाचरण के दोषी सजातीय शिक्षकों और कर्मचारियों को मामूली परिनिंदा या बिना वेतन वृद्धि रोके बहाल कर दिया गया, वहीं दूसरी तरफ गैर-सजातीय शिक्षकों के खिलाफ बिना किसी ठोस कारण के निलंबन जैसी कठोर कार्रवाई की गई। इसके अलावा, मान्यता से जुड़े मामलों में भी व्यापक स्तर पर धांधली उजागर हुई है, जिसमें मानकों को ताक पर रखकर बिना भवन और बुनियादी सुविधाओं वाले विद्यालयों को भी मान्यता प्रदान कर दी गई, जिन्हें बाद में पुलिस बल के सहयोग से सील करना पड़ा। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि ६९००० शिक्षक भर्ती के तहत नेपाल से डिग्री हासिल करने वाली एक ऐसी अभ्यर्थी, जिसका चयन विधिक रूप से निरस्त किया जा चुका था, से जुड़े संवेदनशील मामले में भी संदिग्ध रूप से ढिलाई बरती जा रही है। शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री कार्यालय और महानिदेशक तक पहुँच चुके इन मामलों की निष्पक्ष व गहन जांच कराने की मांग की है ताकि बेसिक शिक्षा विभाग की छवि को धूमिल होने से बचाया जा सके।