क्या पिछड़ा कार्ड खेलकर ‘राम’ को प्रत्याशी बनाएगी बसपा? खलीलाबाद में राम सिंह चौधरी टिकट की रेस में
संतकबीरनगर। उत्तर प्रदेश की सियासत में चुनावी बिसात बिछने के साथ ही जातीय समीकरणों, सामाजिक प्रतिनिधित्व और संगठन के प्रति समर्पण की चर्चाएं तेज होने लगी हैं। खलीलाबाद विधानसभा क्षेत्र संख्या 313 में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के संभावित प्रत्याशियों को लेकर भी राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं। इसी चर्चा के केंद्र में राम सिंह चौधरी का नाम उभर रहा है। सवाल यह है कि क्या बसपा आगामी विधानसभा चुनाव में पिछड़ा वर्ग कार्ड के सहारे राम सिंह चौधरी पर दांव लगाएगी?
राम सिंह चौधरी लंबे समय से बसपा की राजनीति से जुड़े हुए हैं। संगठन में पूर्व जिला उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाने के बाद वर्तमान में वह पिछड़ा वर्ग मोर्चा के अध्यक्ष राम सिंह की पार्टी के भीतर भूमिका बड़ी ही जबरदस्त है जो उन्हें संभावित दावेदारों की कतार में खड़ा करती है। हालांकि उनकी उम्मीदवारी को लेकर अभी किसी आधिकारिक घोषणा की पुष्टि नहीं है।
सोशल इंजीनियरिंग में कितने फिट बैठेंगे राम सिंह?
बसपा की राजनीति में सामाजिक समीकरणों का विशेष महत्व रहा है। दलित आधार के साथ पिछड़े वर्गों और सवर्ण समाज के मतदाताओं को जोड़ने की रणनीति पार्टी के लिए चुनावी दृष्टि से अहम मानी जाती है। ऐसे में राम सिंह चौधरी की दावेदारी को इसी सोशल इंजीनियरिंग के नजरिए से देखा जा रहा है।
कुर्मी समाज में उनकी पहुंच और दलित वर्ग के बीच संपर्क को उनकी राजनीतिक संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके अलावा ब्राह्मणों तथा अन्य सवर्ण मतदाताओं के बीच भी समर्थन जुटाने की संभावनाएं उनकी दावेदारी को चर्चा में ला रही हैं।
जिला पंचायत चुनाव का अनुभव भी बनेगा आधार?
राम सिंह चौधरी वार्ड नंबर 13 से जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव भी लड़ चुके हैं। इस चुनावी अनुभव को क्षेत्रीय राजनीति में उनकी सक्रियता और जनसंपर्क के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। स्थानीय स्तर पर चुनाव लड़ने से उन्हें क्षेत्र की समस्याओं, मतदाताओं की अपेक्षाओं और सामाजिक समीकरणों को समझने का अवसर मिला होगा।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि पार्टी नेतृत्व संगठन के प्रति उनकी वर्षों की सक्रियता, पिछड़े वर्ग में संभावित प्रभाव और व्यापक सामाजिक स्वीकार्यता को कितनी अहमियत देता है।
दावेदारी के बीच फैसला नेतृत्व के हाथ
खलीलाबाद विधानसभा सीट पर बसपा की रणनीति क्या होगी, यह फिलहाल भविष्य के गर्भ में है। राम सिंह चौधरी की दावेदारी की चर्चा के बीच पार्टी के सामने ऐसा चेहरा चुनने की चुनौती होगी, जो संगठन को मजबूती देने के साथ विभिन्न सामाजिक वर्गों में भी स्वीकार्य हो।क्या बसपा राम सिंह चौधरी को मौका देकर पिछड़ा वर्ग और दलित मतदाताओं के बीच नए समीकरण बनाने की कोशिश करेगी, या टिकट की दौड़ में कोई दूसरा चेहरा बाजी मार लेगा? इसका जवाब पार्टी नेतृत्व के फैसले और आने वाले दिनों में क्षेत्र की राजनीतिक गतिविधियों से ही सामने आएगा।