
संतकबीरनगर। सूफियाना परंपरा, रूहानी सुकून और इंसानियत का पैगाम लेकर अगया में हजरत सूफी निजामुद्दीन साहब का 14वां उर्स अकीदत और एहतराम के साथ आयोजित हुआ। दरगाह के माहौल में दुआओं की सदा, मोहब्बत का पैगाम और भाईचारे की खुशबू नजर आई। उर्स ने एक बार फिर याद दिलाया कि इंसानियत का रिश्ता मजहब की सरहदों से कहीं ज्यादा मजबूत होता है।
इस मुबारक मौके पर समाजवादी पार्टी के नेता एवं पूर्व लोकसभा प्रत्याशी रोहित पांडे ने मजार-ए-मुबारक पर चादरपोशी कर मुल्क और सूबे में अमन-ओ-अमान, खुशहाली, तरक्की तथा आपसी इत्तेहाद के लिए दुआ मांगी। उनके पहुंचने पर पूर्व प्रमुख मुमताज अहमद के नेतृत्व में स्थानीय कार्यकर्ताओं, गणमान्य नागरिकों और अकीदतमंदों ने गर्मजोशी से इस्तकबाल किया। रोहित पांडे ने सभी का शुक्रिया अदा किया।
मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए रोहित पांडे ने कहा कि सूफी संतों की दरगाहें सदियों से मोहब्बत, इंसानियत और भाईचारे का पैगाम देती रही हैं। उर्स जैसे आयोजन जाति, धर्म और मजहब की दीवारों को पीछे छोड़कर लोगों को एक-दूसरे के करीब लाते हैं। यही हमारी गंगा-जमुनी तहजीब की खूबसूरती है, जहां विभिन्न आस्थाओं के लोग मिल-जुलकर अमन की दुआ करते हैं।
उर्स में दूर-दराज से आए जायरीनों और स्थानीय लोगों की मौजूदगी ने माहौल को रूहानी रंग दिया। यह आयोजन केवल एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने, नफरत से दूर रहने और इंसानियत को सर्वोपरि रखने का संदेश भी बना।
अगया की इस महफिल-ए-अकीदत से यही पैगाम उभरा—मोहब्बत कायम रहे, भाईचारा मजबूत हो और हर दिल में अमन का चिराग रोशन रहे।