बस्ती। शारदीय नवरात्रि केवल शक्ति की आराधना का पर्व नहीं, बल्कि आस्था, सेवा, सद्भाव और सामाजिक एकता का संदेश देने वाला अवसर भी है। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना के बीच गांव-गांव सजे पूजा पंडाल और मंदिरों में गूंजते जयकारे धार्मिक उल्लास के साथ लोकमंगल की कामना को भी स्वर देते हैं। इसी भक्तिमय वातावरण में बस्ती सदर विधानसभा क्षेत्र-310 के भावी प्रत्याशी एवं नाथनगर के पूर्व ब्लॉक प्रमुख राकेश चतुर्वेदी ने विभिन्न गांवों और पूजा पंडालों का भ्रमण कर मां जगदम्बे के दर्शन-पूजन किए।
राकेश चतुर्वेदी ने उचगांव, जमोहे, कुशमहा, कुशमा, विगहिया, पकरी नासीर, रामावापुर, बेलाउर, सनंडा और पकरीचंदा चौराहा सहित एक दर्जन से अधिक स्थानों पर पहुंचकर मां दुर्गा की आराधना की। उन्होंने माता रानी के समक्ष क्षेत्र की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। पूजा पंडालों में विधि-विधान से दर्शन-पूजन और आरती के बीच श्रद्धालुओं के साथ उनकी मुलाकात भी हुई।
आस्था के साथ सामाजिक सद्भाव का संदेश
नवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है। यह पर्व नारी शक्ति के सम्मान, अन्याय के विरुद्ध संघर्ष और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूप साहस, करुणा, धैर्य और शक्ति का संदेश देते हैं। ऐसे अवसरों पर धार्मिक आयोजनों में सहभागिता समाज के लोगों को आपसी मेल-मिलाप और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर प्रदान करती है।
भ्रमण के दौरान स्थानीय लोगों, बुजुर्गों और युवाओं से राकेश चतुर्वेदी की मुलाकात हुई। आयोजकों और श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया। उन्होंने बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया और क्षेत्रवासियों से आत्मीय संवाद किया। पूजा समितियों के पदाधिकारी तथा स्थानीय समर्थक भी इस दौरान मौजूद रहे।
हर घर में खुशहाली की कामना
क्षेत्रवासियों के बीच अपने संदेश में राकेश चतुर्वेदी ने कहा कि शारदीय नवरात्रि शक्ति, भक्ति और सामाजिक एकता का पावन पर्व है। मां जगदम्बे की कृपा से समाज में सद्भाव और सकारात्मकता बनी रहे, यही उनकी प्रार्थना है। उन्होंने क्षेत्र के प्रत्येक परिवार के सुखी, स्वस्थ और समृद्ध जीवन की कामना करते हुए कहा कि जनमानस से मिलने वाला स्नेह और अपनत्व उनके लिए महत्वपूर्ण है।
नवरात्रि के इस अवसर पर मंदिरों और पूजा पंडालों में उमड़ती श्रद्धा यह संदेश देती है कि धर्म का सार लोककल्याण, सेवा और परस्पर सम्मान में निहित है। मां दुर्गा की आराधना के साथ समाज में प्रेम, सहयोग और सद्भाव की भावना मजबूत हो, तो पर्व की सार्थकता और बढ़ जाती है।